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सिर्फ प्राथमिकी दर्ज होने मात्रा और बिना उचित जांच किए कर्मचारी को सेवा से बर्खास्त करना, न्याय के नैसर्गिक सिद्धान्तों का उल्लंघन

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न्यायमूर्ति सत्येन वैद्य की ओर से “इस प्रकार कहा गया कि  याचिकाकर्ता को उचित प्रक्रिया अपनाए बिना

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संक्षेप कार्रवाई में बर्खास्त करना स्पष्ट रूप से प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन था।

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याचिकाकर्ता के खिलाफ नैतिक भ्रष्टता से जुड़े गंभीर आरोप किसी ओर ने नहीं बल्कि स्कूल के एक छात्र ने लगाए थे जहां याचिकाकर्ता एक शिक्षक था। हालांकि, उसे बरी कर दिया गया है, लेकिन यह सामान्य कानून है कि केवल बरी होने से कर्मचारी को सेवा लाभ प्राप्त करने का अधिकार नहीं मिलता है।

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इसका उद्देश्य न्यायालय द्वारा दर्ज बरी होने की पृष्ठभूमि में कर्मचारी की वांछनीयता और उपयुक्तता का आकलन करना है।