HindiLawNotes.Com

सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले मे कहा कि किसी अपंजीकृत बिक्री समझौते के आधार पर स्थायी निषेधाज्ञा की राहत नहीं मांगी जा सकती है।

HindiLawNotes.Com

जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस कृष्ण मुरारी की पीठ ने कहा कि किसी वादी को अप्रत्यक्ष रूप से राहत नहीं मिल सकती है, जो उसे वह विशिष्ट प्रदर्शन के लिए वाद में नहीं मिल सकती है।

HindiLawNotes.Com

इसमे अपीलकर्ता-प्रतिवादी ने तर्क दिया कि बिक्री का एक अपंजीकृत समझौता साक्ष्य में स्वीकार्य नहीं है । और मूल वादी द्वारा दायर किया गया वाद केवल स्थायी निषेधाज्ञा के लिए था । 

HindiLawNotes.Com

और उसने एक चतुर मसौदा अपनाकर बिक्री के लिए समझौते के विशिष्ट प्रदर्शन के लिए राहत की मांग नहीं की थी क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि वह बिक्री के एक अपंजीकृत समझौते के आधार पर विशिष्ट प्रदर्शन के लिए वाद में सफल नहीं होगी।

HindiLawNotes.Com

वही पर प्रतिवादी-वादी ने तर्क दिया कि एक अपंजीकृत दस्तावेज़ का उपयोग अप्रासंगिक उद्देश्य के लिए किया जा सकता है ।

HindiLawNotes.Com

और इसलिए दोनों, प्रथम अपीलीय न्यायालय और साथ ही हाईकोर्ट ने अप्रासंगिक उद्देश्य के लिए बिक्री समझौते पर विचार करते हुए स्थायी निषेधाज्ञा के लिए एक डिक्री पारित की है।