“डिक्री का निष्पादन” क्या होता है। इसके लिए आवेदन कैसे करे।

जैसा कि आप सभी जानते है । अदालत में समय की अवधि में और उचित प्रक्रियाओं के साथ वाद को  दायर किया जाता है।  इसलिए मामले में शामिल होने वाले किसी भी पक्ष के पक्ष में मामला तय किया जाता है। जब कोई न्यायाधीश निर्णय की घोषणा करते है, तो निर्णय का निर्देशन भाग एक डिक्री होता है। उदाहरण के लिए; यदि माया  पैसे की वसूली के लिए रमेश  के खिलाफ वाद दायर करता है और समय की अवधि के बाद और उचित प्रक्रियाओं के साथ, मामला माया  (डिक्री धारक) के पक्ष में और रमेश  (निर्णीत ऋणी (जजमेंट डेंटर)) के खिलाफ तय किया जाता है, और निर्णय में, यह निर्देश दिया गया कि रमेश  को विवादित राशि का भुगतान माया  को करना है, तो निर्देशन भाग डिक्री होता है क्योंकि यह रमेश  पर प्रदर्शन का दायित्व प्रदान करता है।

अब, एक उचित समय के बाद भी, जब माया  माननीय न्यायालय द्वारा लगाए गए अपने दायित्व का पालन नहीं करता है, तो माया  को कानूनी उपायों के माध्यम से निर्णीत ऋणी को उनके दायित्व को निभाने के लिए कहने का अधिकार है। इस विशेष कानूनी उपाय को डिक्री का निष्पादन कहा जाता है और यह उपाय आमतौर पर उस अदालत में निष्पादन याचिका दायर करके शुरू किया जाता है जहां डिक्री पारित की गई थी।

सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अनुसार, डिक्री के निष्पादन के लिए मौखिक रूप से या लिखित आवेदन के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।

सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के आदेश XXI के नियम 11 में मौखिक रूप से एक डिक्री को निष्पादित करने के लिए आवेदन के बारे में बात की गई है। इस तरीके का उपयोग पक्षों द्वारा तब किया जाता है जब न्यायाधीश अदालत में निर्णय की घोषणा करते है।

See Also  कोई आपको दे रहा धमकी तो जान लीजिए कानून IPC Section guilty of criminal intimidation

सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के आदेश XXI के नियम 12 में डिक्री की प्रमाणित (सर्टिफाइड) प्रति के साथ लिखित आवेदन के माध्यम से एक डिक्री को निष्पादित करने के बारे में बात की गई है। नियम यह भी बताता है कि लिखित निष्पादन याचिका का मसौदा (ड्राफ्ट) कैसे तैयार किया जाएगा। निष्पादन याचिका में वाद की संख्या; पक्षों के नाम, डिक्री की तारीख; क्या डिक्री के निष्पादन के लिए पहले कोई आवेदन किए गए हैं, ऐसे आवेदनों की तारीखें और उनके परिणाम; क्या डिक्री से कोई अपील की गई है।  प्रदान की गई लागतों की राशि (यदि कोई हो)। उस व्यक्ति का नाम जिसके विरुद्ध डिक्री के निष्पादन की मांग की गई है।

ऐसे  वादों में जहां डिक्री जो पारित की गई है।  वह डिक्री धारक को पैसे के भुगतान के लिए है, तो निर्णीत ऋणी को अपने दायित्व को पूरा करना होगा और उस पैसे का भुगतान करना होगा जो डिक्री धारक को देय है। कुछ मामलों में, निर्णीत ऋणी या तो राशि का भुगतान नहीं करता है।  या किसी अन्य कारण से, उस राशि का भुगतान करने में असमर्थ है जिसे भुगतान करने के लिए उसे निर्देशित किया गया है, तो न्यायालय के पास सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश XXI के नियम 40-46 के तहत निर्णीत ऋणी की अचल और चल संपत्ति को कुर्क करने और बेचने की शक्ति है।

हमारी Hindi law notes classes के नाम से video भी अपलोड हो चुकी है तो आप वहा से भी जानकारी ले सकते है।  कृपया हमे कमेंट बॉक्स मे जाकर अपने सुझाव दे सकते है।और अगर आपको किसी अन्य पोस्ट के बारे मे जानकारी चाहिए तो उसके लिए भी आप उससे संबंधित जानकारी भी ले सकते है
यदि आप इससे संबंधित कोई सुझाव या जानकारी देना चाहते है।या आप इसमें कुछ जोड़ना चाहते है। या इससे संबन्धित कोई और सुझाव आप हमे देना चाहते है।  तो कृपया हमें कमेंट बॉक्स में जाकर अपने सुझाव दे सकते है।

See Also  आईपीसी की धारा 506 आपराधिक धमकी के लिए सजा का प्रावधान IPC section 506

Leave a Comment