अपकृत्य विधि (Law of Tort) क्या होता है ?

Law of tort in India- AN INTRODUCTION- Hindi Law Notes

लॉ ऑफ टोर्ट के शाब्दिक अर्थ के अंतर्गत लॉ का मतलब रुल्स (नियम) का एकत्रित समूह और टोर्ट का मतलब डैमेज यानि की लॉस से हानि से है। यह कोई एक्ट नही है। परंतु यह समाज के द्वारा समय समय पर बनाई गयी नियम है जो समाज कई वर्षो के ज्ञान के अनुसार लागू किया है। यह इस लिए  भी  है की अगर आपका कोई नुकसान किया है या आपके राइट को कोई नुकसान पाहुचाया है तो यह लागू होगा।

जैसे ए के पास एक बिल्ली है और वह रोज उसके साथ घूमने जाता था। और एक पार्क मे उसको टहलता था एक दिन बिल्ली ने सी को पंजा मार दिया। क्योकि बिल्ली ए की थी इसलिए ए उसका जिम्मेदार है और ए को उसकी भरपाई करनी पड़ेगी।

यह एक सिविल रोंग है जिसमे हानि और किसी के द्वारा अधिकार का हनन शामिल होता है। जिसने टोर्ट किया है वह tort feasor कहलाता है।

टोर्ट मे कार्य तो गलत होता है परंतु गलती जान बुझ कर नही की जाती है यानि जब कोई कार्य गलती से हो तो उसको टोर्ट के अंदर आएगा और उसकी भरपाई करनी पड़ती है।

टोर्ट को हम मिस्टेक भी कह सकते है परंतु यह बिलकुल सही नही है।

अब हम आपको इसके प्रिन्सिपल को बताने जा रहे है ।

INJURIA SINE DAMANO-

इसमे injuria का मतलब होता है injury sine का मतलब होता है बिना किसी वजह से और damano का मतलब damage से है जिसका अर्थ होता है नुकसान अर्थात जब किसी के द्वारा किसी के अधिकारो का हनन बिना किसी नुकसान के होता है तो यह इसके अंतर्गत आता है।

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जैसे व ने ग का कोई अधिकार का हनन किया पर ग का कोई हानि नही हुआफिर भी वह केस कर सकता है। इसको हम एक केस के माध्यम से समझाते है।

Ashby V white

इलैक्शन टाइम मे व्हाइट ने अशबी को इलैक्शन वाले दिन वोट डालने नही दिया और इसलिए आशयबी ने व्हाइट के खिलाफ केस किया की व्हाइट ने मेरे अधिकार का हनन किया है वह मुझको वोट डालने नही जाने दिया मुझे इसकी भरपाई चाहिए।

व्हाइट ने कोर्ट मे यह सिद्ध किया की बिना वोट डाले भी इसका कैंडिडैट जीता है इसलिए इसके वोट डालने या नही डालने से कोई फर्क नही पड़ा ।

कोर्ट ने यह निर्णय दिया कि इसमे अशबी के अधिकारो का हनन हुआ है भले उसको नुकसान हुआ या नही इसलिए व्हाइट इसको भुगतान करने के लिए बाध्य होगा।

Damno sine injuria-

Damno का मतलब  damage यानि की हानि   sine का मतलब  without यानि की बिना  injuria का मतलब  injury यानि की चोट या अधिकारो का हनन से है। यानि कि बिना अधिकारो के हनन के नुकसान करना इसके लिए आप केस नही कर सकते है।

इसका एक केस है जो कि ग्लोकास्टर ग्रामर स्कूल का है इसके अनुसार-

ग्लोकास्टर ग्रामर स्कूल मे पढ़ाने वाले एक टीचर ने अपना खुद का स्कूल खोल दिया जिससे इस स्कूल के विधार्थी उस स्कूल मे चले गए ग्लोकास्टर ग्रामर स्कूल को काफी नुकसान हुआ और ग्लोकास्टर ग्रामर स्कूल ने उस टीचर के खिलाफ वाद दायर किया जिसमे यह निर्णय लिया गया कि बिना अधिकारो के हनन यदि किसी को नुकसान होता है तो कोई compensation नही क्लैम कर सकता है।

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Vicarious liability-

सामान्यता कोई व्यक्ति अपने द्वारा किए गए कार्यो के लिए उत्तरदायी होता है परंतु कभी कभी दूसरे के किए गए गलत कार्यो के लिए भी उत्तरदायी होना पड़ता है यह vicarious liability कहलाता है।

यह निम्न पर लागू होता है।

यह मालिक और नौकर इसके अनुसार यदि नौकर कोई गलत कार्य करता है तो मालिक उसके लिए जिम्मेदार होगा।

प्रिन्सिपल और एजेंट –

इसके अनुसार यदि कोई एजेंट अपने प्रिन्सिपल के बदले मे कोई कार्य कर रहा है तो एजेंट के द्वारा किए गए सभी कार्यो के लिए प्रिन्सिपल जिम्मेदार होगा।

पार्टनर्शिप फ़र्म –

यदि 2 या 2 से अधिक लोग मिलकर कोई फ़र्म चलाते है तो एक पार्टनर के द्वारा किए गए गलत कार्यो का दूसरा भी जिम्मेदार होगा।

जिसमे एक केस है हमलयन  vs जॉन ह्यूस्टन

जॉन  ने हमलयन के क्लर्क को पैसे देकर उसके प्राइवेट इन्फॉर्मेशन निकाल ली और उसका फाइदा उठाया यह बात हमलयन को पता चल गया और उसने जॉन ह्यूस्टन के खिलाफ वाद दायर किया  ह्यूस्टन ने इसका विरोध किया की उसको इस बात की जानकारी नही थी इसलिए वह इसके लिए उत्तरदायी नही है परंतु कोर्ट ने यह कहा की फायदा दोनों को मिलेगा क्योकि दोनों पार्टनर है इसलिए दोनों ही इसके लिए जिम्मेदार है।

Vicarious liability of state –

State की परिभाषा आर्टिकेल 12 भारतीय संविधान मे बतायी गयी है। यह बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योकि मूल अधिकारो का हनन करने पर हम स्टेट के खिलाफ जा सकते है।

अब हम आपको बताते है की अनुच्छेद 12 मे स्टेट यानि की राज्य की परिभाषा दी गयी है जो इस प्रकार है।

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राज्य मे निम्न को शामिल किया गया है।

भारतीय संसद और सरकार

राज्य सरकारे और विधान मण्डल

भारत राज्य के अंदर के अधिकारी और भारत सरकार के अधीन सभी आस्थानीय अधिकारी

अन्य अधिकारी

इसमे यह बताया गया है की गवर्नमेंट एम्प्योयी की वजह से आप को कोई नुकसान होता है तो गवर्नमेंट उसके लिए उत्तरदायी होती है। यह क्राउन प्रोसीडिंग अक्त 1947 के अनुसार इंग्लैंड लॉं मे बताया गया है ।

परंतु भारत मे टोर्ट का कोई एक्ट नही है परंतु इस केस मे इसका निर्णय लिया गया। गवर्नमेंट कुछ केस मे जिम्मेदार होती है किसी केस म नही होती ।

[email protected] of rajasthan

इस वाद मे उदयपुर के कलेक्टर के द्वारा किसी व्यक्ति का एक्सिडेंट हो गया था। जिसको गवर्नमेंट के द्वारा जीप और ड्राईवर मिला हुआ था ।उसके द्वारा बाद मे उस व्यक्ति की डैथ हो गयी जो कि विध्यावाती का रिसतेदार था और उसने वाद दायर किया और कोर्ट ने उसके पच्छ मे फैशला देते हुए सरकार को इसका हर्जाना देने को कहा।

राजस्थान स्टेट ने अपील फ़ाइल करते हुए सुप्रीम कोर्ट गए और सुप्रीम कोर्ट ने भी इसको सही माना और उसके अनुसार भी सरकार इसके लिए जिम्मेदार है क्योकि यह सरकारी गाड़ी से हुआ इसलिए सरकार यानि कि राजस्थान राज्य को इसका हर्जाना देना पड़ेगा।

इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको टोर्ट कि जानकारी दे रहे है इससे संबन्धित सुझाव आप हमे कमेंट बॉक्स मे दे सकते है।

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