सिविल प्रक्रिया संहिता 151 से लेकर के 155 तक

जैसा की आप सबको ज्ञात होगा कि इससे पहले की पोस्ट में हमने धारा 151 से लेकर के 155 तक बताया था ।अगर आपने धाराएं नहीं पढ़ी है ।तो सबसे पहले आप इन धाराओं को पढ़ लीजिए । जिससे की आगे की 

धाराएं समझने में आपको आसानी होगी ।

धारा 151

  इस धारा के अनुसार न्यायालय की अंतर्निहित शक्तियों की व्यावृत्ति

संगीता की किसी भी बात के बारे में यह नहीं समझा जाएगा कि ऐसे आदेशों को देने के न्यायालय की अंतर्निहित शक्ति को परिसीमित या अन्यथा प्रभावित करती है।

जो न्याय के उद्देश्यों के लिए आदेश का के दुरुपयोग का निवारण करने के लिए आवश्यक है।

धारा 152

इस धारा के अनुसार निर्णयों या आदेशों का संशोधन

निर्णयों या आदेश में कि लिखने में गणित संबंधी भूले या फिर किसी आकस्मिक भूल या लोप से उस में हुई गलतियां न्यायालय द्वारा स्वप्रेरणा से या फिर पछकार में से किसी के आवेदन पर किसी भी समय शुद्ध की जा सकती है।

धारा 153

इस धारा के अनुसार संशोधन करने की साधारण शक्ति को बताया गया है।

न्यायालय किसी भी समय और खर्च संबंधी ऐसी शर्तों पर या फिर अन्यथा जो वह ठीक समझे। वाद की किसी भी कार्यवाही में कि किसी भी त्रुटि या गलती को संशोधित कर सकेगा ।और ऐसी कार्यवाही द्वारा उठाए गए या उस पर और लंबित वास्तविक प्रश्न या विवाद के उदाहरण के प्रयोजन के लिए सभी आवश्यक संशोधन किए जाएंगे।

धारा 153 क

जहां पर अपनी संक्षिप्त खारिज की जाती है वहां पर डीक्री या आदेश का संशोधन करने की शक्ति को बताया गया हैं।

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धारा 153 ख

इस धारा के अनुसार विचारण के स्थान को खुला न्यायालय समझा जाना चाहिए यह बताया गया है। जिसके अनुसार वे स्थान जहां किसी वाद के विचारण के लिए कोई खुला न्यायालय लगता है उस सिविल न्यायालय को खुला न्यायालय समझा जाएगा और उसमें साधन थे अजंता की वहां तक पहुंच होगी जहां तक की जनता इसमें सुविधा पूर्वक समा सकें।

परंतु यदि पीठासीन न्यायाधीश ठीक समझे तो वह किसी विशिष्ट मामले की जांच या विचारण के किसी भी प्रक्रम पर यह आदेश दे सकता है कि साधारण जनता या किसी विशिष्ट व्यक्ति की न्यायालय द्वारा प्रयुक्त कमरे या भवन तक पहुंच नहीं होगी या फिर भी उस में नहीं आएगा या वह नहीं रहेगा।

धारा 154

इस धारा में अपील के वर्तमान अधिकार की ब्यावृति को बताया गया है जिसके अनुसार यह धारा दर्शन कर दी गई है।

धारा 155

इस धारा में कुछ नियमों का संशोधन के बारे में बताया गया है यह धारा निर्षित कर दी गई है।

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