सिविल प्रक्रिया संहिता 146 लेकर के 150 तक

जैसा की आप सबको ज्ञात होगा कि इससे पहले की पोस्ट में हमने धारा 140 से लेकर के 145 तक बताया था ।अगर आपने धाराएं नहीं पढ़ी है ।तो सबसे पहले आप इन धाराओं को पढ़ लीजिए । जिससे की आगे की 

धाराएं समझने में आपको आसानी होगी ।

धारा 146

  इस धारा के अनुसार प्रतिनिधियों के द्वारा या फिर उनके विरुद्ध कार्यवाही के बारे में बताया गया है।

इसके अनुसार उनके शिवाय जैसा इस संहिता के द्वारा तत समय प्रवृति किसी विधि के द्वारा अन्यथा उप बंधित है। जहां पर किसी व्यक्ति के द्वारा या फिर उसके विरुद्ध कोई कार्यवाही की जा सकती है। आवेदन किया जा सकता है। वहां पर उससे व्युत्पन्न अधिकार के अधीन दावा करने वाले किसी भी व्यक्ति द्वारा या फिर उसके विरुद्ध वह कार्यवाही की जा सकेगी या फिर आवेदन किया जा सकेगा ।

धारा 147

इस धारा के अनुसार निर्योग्यता के अधीन व्यक्तियों के द्वारा सहमति या करार को बताया गया है।

जिसके अनुसार इन सभी वादों में, जिनमें निर्योग्यता के अधीन कोई व्यक्ति पक्षकार है। किसी भी कार्यवाही के संबंध में कोई भी सहमति या फिर करार , यदि वह उसके बाद मित्र या फिर वादार्थ संरक्षक द्वारा न्यायालय की अभिव्यक्ति इजाजत से दी जाए या फिर किया जाए तू भी ऐसा ही बलिया प्रभाव रखेगी या फिर रखेगा मानो कि ऐसा व्यक्ति किसी निर्योग्यता के अधीन नहीं था। और उसने ऐसी सहमति दी थी ।या फिर ऐसा करार किया था।

धारा 148 

इस धारा के अनुसार समय का बढ़ाया जाना बताया गया है।

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इस धारा के अनुसार जहां पर न्यायालय ने इसे संहिता के द्वारा विहित या अनुज्ञात कोई कार्य करने के लिए कोई अवधि नियत या अनुदत्त की है ।वहां पर न्यायालय ऐसी अवधि को स्व विवेकाअनुसार समय-समय पर बड़ा सकेगा।

जोकि कुल मिलाकर के 30 दिन से अधिक नहीं होना चाहिए। यद्यपि पहले नियत या अनुदत्त अवधि का अवसान हो चुका हो।

148 क

 इस धारा के अनुसार केवियट दायर करने का अधिकार को बताया गया है।

इसके अनुसार जहां पर किसी न्यायालय में संस्थित या फिर शीघ्र ही संस्थित होने वाले किसी वाद या कार्यवाही जिसमें इसके पश्चात केविएट करता कहा गया है ।उस व्यक्ति पर जिसके द्वारा उप धारा 1 के अधीन आवेदन किया गया है। यह किए जाने की प्रत्याशा है ।केविएट के सूचना की तामील रसीदी रजिस्ट्री डाक द्वारा करेगा।

जहां पर उप धारा 1 के अधीन कोई भी केविएट दायर किया गया है ।वहां वह व्यक्ति जिसके द्वारा केविएट दायर किया गया है। केविएट दायर किए जाने के पश्चात किसी वाद या कार्यवाही में कोई आवेदन फाइल किया जाता है। वहां न्यायालय आवेदन की सूचना केविएट कर्ता को देगी।

जहां पर आवेदक पर किसी केविएट की सूचना की तामील की गई है। वहां उसके द्वारा किए गए आवेदन की और उस आवेदन के समर्थन में उसके द्वारा फाइल किया गया। या फिर फाइल की जाने वाली किसी भी कागज या फिर दस्तावेज की प्रतियां केविएट कर्ता के खर्चे पर केविएट कर्ता को तुरंत देगा।

एक के अधीन कोई केविएट दायर किया गया है। वहां ऐसा केविएट उस तारीख के जिस दिन में दायर किया गया था ।उसके 90 दिन के अवसान के पश्चात प्रवृत्त नहीं रहेगा ।जब तक की उप धारा 1 में निर्दिष्ट आवेदन उक्त अवधि के अवशान के पूर्व नहीं किया गया हो।

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धारा 149

इस धारा के अनुसार न्यायालय फीस की कमी को पूरा करने की शक्ति को बताया गया है।

इसके अनुसार जहां पर न्यायालय से संबंधित तत्सम प्रवृत्त किसी भी विधि के द्वारा किसी भी दस्तावेज के लिए विहित पूरी फीस या उसका कोई भाग संदत्त नहीं किया गया है। वहां जिस व्यक्ति के द्वारा ऐसी फीस ही संदेय है। उसे न्यायालय किसी भी प्रक्रम में स्वामी विवेका अनुसार अज्ञात कर सकेगा कि वह यथास्थिति ऐसी पूरी न्यायालय फीस या उसका वह भाग संदत्त करे । और ऐसा संदाय किए जाने का उस दस्तावेज का जिसकी बाबत वह फीस संदेय है। वही बल और प्रभाव होगा मानो ऐसा फीस पहली बार ही संदत् कर दी गई हो।

धारा 150 

इस धारा के अनुसार कारबार का अंतरण के बारे में बताया गया है।

इस धारा के अनुसार उनके सिवाय जैसा अन्यथा पंडित है जहां पर किसी भी न्यायालय के द्वारा कारवार किसी अन्य न्यायालय को अंतरित कर दिया जाता है ।वहां पर जिस न्यायालय को कार्यभार इस प्रकार अंतरित किया गया है। जिसकी वह शक्तियां होंगी और वह उन्हीं कर्तव्यों का पालन करेगा । जो कि उसे प्रदान की गई हैं। और इस पर इस संहिता के द्वारा यह इसके अधिक क्रमसा प्रदत और अधि रोपित किए गए हैं। जिससे कि कारबार इस प्रकार अंतरित किया गया है।

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