इंकम टैक्स एक्ट 1962 के अनुसार आमदनी के पाँच स्रोत FIVE HEAD OF INCOME AS PER INCOME TAX ACT 1962

इंकम टैक्स एक्ट 1962 के अनुसार आमदनी के पाँच स्रोत FIVE HEAD OF INCOME AS PER INCOME TAX ACT 1962

इंकम टैक्स एक्ट के अनुसार हम इंकम को 5 हेयड्स मे बाँट सकते हैं |आइये जानते हैं ये 5 हेयड्स कौन कौन से हैं |

सैलरी ( सेक्शन 15 से 17)

इंकम फ़्रोम हाउस प्रॉपर्टि ( सेक्शन 22 से 27)

प्रॉफ़िट अँड गेन्स अँड बिज़नस प्रॉफ़ेशन ( सेक्शन 28 से 44)

कैपिटल गेन्स  ( सेक्शन 45 से 55)

इंकम फ़्रोम अदर सोर्स ( सेक्शन 56 से 58)

सैलरी ( Salary )-

जब कोई व्यक्ति कही नौकरी करता हैं किसी के अंदर कार्य करता हैं तो उसके लिए उसको सैलरी मिलती हैं जिसको इंकम टैक्स के पहले हेयड्स मे रखते हैं | उसकी यह इंकम इसके अंतर्गत आती हैं | इसमे employer और employee relationship होना बहुत जरूरी होता हैं |इसको आर्म लेंथ relationship कहलाता हैं | कांट्रैक्ट ऑफ सर्विस हैं तो यह इंकम फ़्रोम अदर सोर्से होता हैं |foregoing सैलरी भी चार्ज होती हैं | चारजिंग सेक्शन 15 के अनुसार होता हैं सैलरी तब taxable होगी जो यह तो मिल चुकी हो या ड्यू हो चुकी हो जो पहले आएगा उस अनुसार taxable होगा |

बेसिक सैलरी – fully taxable

Dearness allowance  -fully taxable

Commission – fully taxable यदि commission टर्नओवर के अनुसार हैं तो इसको लेते हैं |

बोनस- fully taxable

स्टैंडर्ड deduction 40000 रुपये का मिलेगा or सैलरी जो की कम होगा

Allowances कुछ fully taxable होते हैं तथा कुछ partly taxable होंगे |

इंकम फ़्रोम हाउस प्रॉपर्टि –

जिसके पास मकान है और वह किराए पर देकर पैसा कमाता हैं तो वह प्राप्त इंकम पर टैक्स देता हैं और यह इंकम फ़्रोम हाउस प्रॉपर्टि के अंदर आता हैं |इसका चारजिंग सेक्शन 22 हैं |लैंड की इंकम इसके अंतर्गत नही आती हैं | ownership होना बहुत जरूरी होता हैं | बिज़नस के लिए ली गयी कोई प्रॉपर्टि की खरीद और सले PGBP के अंतर्गत आती हैं न की हाउस प्रॉपर्टि के अंतर्गत आएगी | सेक्शन 23 (4) के अनुसार कोई स्टॉक के लिए इंकम अगले साल से taxable होगा | seperable अससेस्ट्स हाउस प्रॉपर्टि मे और inseparable अससेस्ट्स अगले हेयड्स मे आता हैं |

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प्रॉपर्टि की annual वैल्यू निकालने का तरीका –

GAV = MV OR FR  जो दोनों मे से जादा होता हैं उसको compare करेंगे SR से जो की कम होगा और फिर उसको compare करेंगे AR से जो की जादा होगा |

अब हम देखते है यहा पर

MV = MUNICIPAL VALUE

FR = FARE VALUE

SR = STANDARD VALUE

AR = ACTUAL VALUE

ER EQUAL RATE

 अब हम er को ar से compare करेंगे और जो जादा होगा उसको लेते हैं | वही हमारी ग्रोस्स अननुयल वैल्यू होगी |

ER हमेशा 12 महीने की लेते हैं |

अगर मकान बीच मे खरीदा हैं तो उसको अलग से कन्सिडर करते हैं |

अगर 2 मकान होगा तो एक taxable होगा |

आपको किराया कम मिल रहा है तब आपको जो राशि बतौर किराया मिल रही है, उसी के आधार पर टैक्स चुकाना होगा municipalvalue और fair वैल्यू म जो जादा होता हैं उसको लेते हैं। अगर आपके पास एक से जादा मकान हैं तो एक को छोरकर बाकी सब घर taxable होगा।

 कारोबार एवं सेवा व्यवसाय से आय (income from business profession)- बिज़नस कर हिंदू अविभाजित परिवार या व्यक्तिगत तौर पर जो किसी फर्म में पार्टनर हैं और उनकी आमदनी व्यवसायया पेशे से हुई आय या लाभ कर योग्य हो।अगर कोई व्यक्ति बिज़नस करता हैं चाहे वह जिस भी प्रकार का बिज़नस हो उससे प्राप्त इंकम इसके अंतर्गत आती हैं इसके अतिरिक्त कोई पेशेवर व्यक्ति जैसे वकील ,डॉक्टर ,आदि का इंकम भी इस हैड मे आता हैं |

कैपिटल गेन्स –

पूंजी से प्राप्त लाभ पूंजी गत लाभ कहलाता हैं जैसे ट्रेड मार्क ,पटेंट ,कॉपीराइट आदि से प्राप्त लाभ इसके अलावा जब कोई व्यक्ति कोई पुरानी  जमीन की खरीद बेचने या कोई भी अससेस्ट को बेच कर फायदा कमाते हैं तो वह इसके अंतर्गत आता हैं |  इस लाभ को आय के रूप में माना जाता है और इस प्रकार यह वर्षमें कुछ करों को आकर्षित करता है जो कि पूंजीगत संपत्ति का हस्तांतरण होता है। इसे कैपिटल गेन टैक्स कहा जाता है। जब कोई परिसंपत्ति विरासत में मिली हो तोपूंजीगत लाभ लागू नहीं होता है। क्योंकि कोई बिक्री नहीं होती है जो कि हो रही है, यह केवल एक हस्तांतरण है। लेकिन, जिस व्यक्ति को संपत्ति विरासत में मिली हैं अगर वह व्यक्ति इसको बेचता हैं तो यह पूंजीगत लाभ मे नही आता हैं | कपड़े सामान या उपभोग का सामान इसके अंतर्गत नही आता  हैं | कैपिटल गईं समय पर निरभर करता हैं यह 2 प्रकार का होता हैं शॉर्ट टर्म कैपिटल और लॉन्ग टर्म शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन अधिग्रहण के तीन साल से कम समय के भीतर बेची जाने वाली किसी भी संपत्ति को अल्पकालिक संपत्ति माना जाता है, इसलिए इसको बेचकर अर्जितलाभ को अल्पकालिक पूंजीगत लाभ कहा जाता है |वही शेयर के केस मे यह 1 साल होता हैं | लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन वह होता हैं जो तीन साल के बाद संपत्ति या संपत्ति बेचकर अर्जित लाभ को दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कहा जाता है

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इंकम फ़्रोम अदर सोर्स-

इसके अंतर्गत जुए मे जीते गए पैसे ,बैंक मे जमा राशि पर व्याज ,लॉटरी ,टिकिट आदि की कमाई आती हैं | इसके उदाहरण इस प्रकार हैं |

डिपॉजिट(बैंक/पोस्ट ऑफिस/को-ऑपरेटिव सोसायटी) पर इंट्रेस्ट

इनकम टैक्स रिफंड पर इंट्रेस्ट

फैमिली पेंशन

 lottery, टिकिट ,race कोर्स  बिज़नस ,अन्य

डिपॉजिट(बैंक/पोस्ट ऑफिस/को-ऑपरेटिव सोसायटी) पर इंट्रेस्ट के अंतर्गत 1 साल के अंदर सभी बैंक और पोस्ट ऑफिस पर मिले ब्याज को इसमे शामिल किया जाता हैं |

यदि कोई व्यक्ति जायदा टैक्स दे देता हैं और बाद मे उसका रिफ़ंड आता हैं तो उतने दिन जमा टैक्स की राशि पर ब्याज मिलता हैं जो इसके अंतर्गत आता हैं |

सरकारी कर्मचारी की म्रत के बाद जो पेन्सन उसके परिवार वालों या पत्नी को मिलती हैं वह फ़ैमिली पेन्सन होती हैं और वह इंकम फ़्रोम अदर सौर्से मे taxable होती हैं |

अन्य इंकम

इसके अलावा कोई और टैक्स जो कि टैक्स के दायरे में आती है, तो आपको उसकी जानकारी भी देनी होती है। कई अन्य तरह की आय income from other sourses ‘इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज’ के अंतर्गत टैक्स के दायरे में आती है। इनमें कंपनी से मिलने वाली एफडी, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स और अन्य शामिल हैं। गिफ्ट ,लॉटरी टिकिट ,रेस आदि भी इससे संबन्धित हैं।

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