तीन नये कानून कौन कौन से है ।तीन नये कानून कब से लागू होंगे ,भारत मे कानून कौन बनाता है ।

 तीन नए कानून भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य कानून औपनिवेशिक काल के तीन कानूनों जो की भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और 1872 के भारतीय साक्ष्य अधिनियम का अब स्थान लेंगे.

फिलहाल तो सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में इस नए कानून पर भी रोक लगाने की मांग की गई है। क्योकि जब यह कानून संसद में पेश किया गया तो उस समय संसद में व्यापक चर्चा इस कानून पर नहीं हुई, क्योंकि उस समय अधिकतर सांसदों को निलंबित कर दिया गया था.

संसद द्वारा पारित किए गए तीन नए आपराधिक न्याय विधेयकों को 25 द‍िसंबर को स्वीकृति प्रदान की गयी थी ।

इस कानून के अंतर्गत भारतीय न्याय संहिता जो की अलगाववाद के कृत्यों, सशस्त्र विद्रोह, विध्वंसक गतिविधियां, अलगाववादी गतिविधियां या संप्रभुता या एकता को खतरे में डालने जैसे अपराधों को देशद्रोह कानून के नए अवतार में सूचीबद्ध किया गया है.

यदि कोई भी व्यक्ति यदि शब्दों या संकेतों या दृश्य प्रतिनिधित्व या इलेक्ट्रॉनिक संचार या वित्तीय या अन्य माध्यम से जानबूझकर अलगाववाद या सशस्त्र विद्रोह या विध्वंसक गतिविधियां भड़काता है या फिर भड़काने की कोशिश करता है या अलगाववादी गतिविधियों की भावना या संप्रभुत्ता व एकता और भारत की अखंडता को खतरे में डालने के लिए उकसाता है, तो ऐसे कृत्य के लिए उम्रकैद की सजा हो सकती है या सात साल तक की सजा हो सकती है, साथ ही उस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

नए कानूनों के अनुसार, ‘राजद्रोह’ के स्थान पर ‘देशद्रोह’ शब्द लाया गया है. तथा पहली बार भारतीय न्याय संहिता में आतंकवाद शब्द की व्याख्या की गई है.

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तीन नये कानून कब से लागू होंगे :

तीन नए कानून- भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) यह 26 जनवरी तक अधिसूचित किए जाएंगे और देशभर में एक वर्ष के भीतर लागू कर दिए जाएंगे

ऐसा माना जा रहा है की तीन कानूनों के अधिसूचित होने के बाद, गृह मंत्रालय पुलिस अधिकारियों, जांचकर्ताओं और फॉरेंसिक क्षेत्रों से जुड़े लोगों के लिए एक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करेगा.इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में अगले नौ महीनों से 3 वर्ष के भीतर प्रशिक्षित किए जाने वाले लगभग 90 प्रतिशत लोगों को शामिल किया जाएगा. तथा ”तीनों कानूनों को 26 जनवरी से पहले अधिसूचित किया जाएगा.अधिसूचित हो जाने पर नए कानूनों के तहत आपराधिक मामले दर्ज कराये जा सकते हैं. नए कानूनों के तहत पहला फैसला कानूनों के अधिसूचित होने के तीन साल के भीतर आने की उम्मीद है.


भारत के नए कानून कौन बनाता है?

भारत में कानून बनाने के लिए संसद का अंतिम अधिकार प्रदान किया गया है।

संसद द्वारा पारित कानून प्रस्तावों को राष्ट्रपति द्वारा स्वीकृत किया जाना चाहिए। तथा राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित कानून प्रस्तावों को राज्यपाल द्वारा स्वीकृत प्रदान किया जाना चाहिए। संसद के पास भारत में कानूनों में संशोधन करने की भी शक्ति है।

नए कानून की धाराओं में किया गया बदलाव?

IPC में अभी 511 धाराएं हैं. और भारतीय न्यायिक संहिता जब लागू होगा तो इसमें 356 धाराएं रह जाएंगी. पुराने कानून से नए कानून में 175 धाराएं बदल जाएंगी. भारतीय न्यायिक संहिता में 8 नई धाराएं जोड़ी जाएंगी और 22 धाराएं हटाई जाएंगी. 

इसी तरह सीआरपीसी में 533 धाराएं हो जाएंगी और 160 धाराएं बदल जाएंगी. नए कानून में 9 नई धाराएं जोड़ी गई है और 9 खत्म का गई है.

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मॉब लिंचिंग और नफरती अपराधों संबन्धित धराए जुड़ी

अभी तक जब पांच या उससे अधिक लोगों का समूह किसी व्यक्ति के जाति या समुदाय के आधार पर उसकी हत्या के मामले में दोषी पाया जाता है. तो उस समूह के सभी सदस्यों को न्यूनतम सात साल की कैद की सजा दी जाती है । लेकिन नए कानून के मामलों में यदि कोई दोषी पाया गया तो उसको आजीवन कारावास की सजा मिलेगी ।

आतंकवादी गतिविधि को किया गया परिभाषित

इसमे आतंकवादी गतिविधि को भारतीय न्याय संहिता के तहत परिभाषित किया गया नए विधेयक में इसके कानून में कुछ बदलाव किए गए है. नया विधेयक के तहत अब आर्थिक सुरक्षा को खतरा भी आतंकवादी गतिविधि के अंतर्गत आएगा.

इसके अलावायदि तस्करी या नकली नोटों का उत्पादन करके देश की वित्तीय स्थिरता को नुकसान पाहुचाया गया तो वह भी आतंकवादी अधिनियम के अंतर्गत आएगा. भारत में रक्षा या किसी सरकारी उद्देश्य के लिए गए संपत्ति को विदेश में नष्ट करना भी आतंकवादी गतिविधि का ही हिस्सा होगा.

नये कानून के अनुसार जो कोई भी रेप के मामलों के अदालती कार्यवाही की खबर बिना कोर्ट के अनुमति के प्रकाशित करेगा तो ऐसी स्थिति में उसे 2 साल तक की जेल हो सकती है और उस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

भारतीय न्याय संहिता में इस “मानसिक बीमारी” शब्द का नाम बदल दिया गया था. अब ऐसे अपराधी को ‘विक्षिप्त दिमाग’ वाला अपराधी कहा जाएगा.

इसमे छोटे-मोटे अपराध जैसे चोरी, नशे में धुत होकर परेशान करना, जैसे अपराधों के लिए सजा के तौर पर सामुदायिक सेवा की शुरुआत की जाएगी जो निशुल्क होगी ।

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