विवाह कानून मे हुआ बड़ा बदलाव ,सभी धर्मो के लिए मान्य

किसी भी धार्मिक मान्यताओं, परम्पराओ और प्रथाओंतथा संस्कारों, अनुष्ठानों से किया विवाह मान्य होगा. हालांकि, लड़का और लड़की दोनों की उम्र में किसी तरह की कोई तब्दीली नहीं की गई है. जहा पर लड़की की न्यूनतम उम्र 18 साल और लड़के की न्यूनतम उम्र 21 साल शादी के लिए पहले से ही अनिवार्य है ।

लेकिन शादी का रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य होगा. अब बिना रजिस्ट्रेशन वाली शादी पूरी तरह से अमान्य होगी. और पंजीकरण के बाद ही सरकारी योजनाओं का लाभ उठाया जा सकेगा.

विवाह पंजीकरण के लिए महानिबंधक, और निबंधक, तथा उपनिबंधक और अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी. यहा पर महिला या पुरुष की पहली शादी अमान्य नहीं हो जाती तब तक कोई भी दूसरी शादी नहीं कर सकता है.

अगर पति या पत्नी में से किसी की मृत्यु हो जाती है । तो ऐसे दशा मे माता-पिता की देखभाल भी जीवित को चाहे वह पति हो या पत्नी उसको करनी होगी.

सिविल कोड के तहत लड़कियों की शादी की कानूनी उम्र 21 साल तय की जा सकती है.


राज्य में विवाह पंजीकरण नहीं कराने पर जुर्माना सजा और किसी भी सरकारी सुविधा से वंचित होना पड़ सकता है.

गोद लेने की प्रक्रिया सरल बनाया जायेगा उसके साथ ही मुस्लिम महिलाओं को भी गोद लेने का अधिकार होगा.

पति और पत्नी दोनों को तलाक के लिए समान अधिकार मिलेंगे. जहा पर पति-पत्नी के विवाद के मामलों में बच्चों की कस्टडी दादा-दादी को दी जा सकती है.


सभी समुदाय की युवतियों के विवाह की उम्र एक सामान रखी जाएगी.

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नौकरीपेशा बेटे की मृत्यु की स्थिति में बुजुर्ग माता-पिता के भरण-पोषण की जिम्मेदारी पत्नी की होगी.


अगर कोई बच्चा अनाथ हो जाता है तो बच्चों के लिए भी बड़ा कदम उठाया गया है. उनके संरक्षकता की प्रक्रिया को आसान बनाया जाएगा.


समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के तहत, राज्य में बहुविवाह प्रथा पर पूरी तरह से रोक लगा देने का प्राविधान पेश किया गया है.


समान नागरिक संहिता में गोद लिए हुए बच्चों,तथा सरोगेसी द्वारा जन्मे बच्चों और असिस्टेड रीप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी द्वारा पैदा हुए बच्चों में कोई भेद नहीं होगा. सभी समान होंगे इन्हे भी जैविक संतान का दर्जा मिलेगा.

बहुविवाह पर लगेगी रोक:

यूनिफॉर्म सिविल कोड में कई तरह के प्रावधान दिए गए हैं. इसमें तलाक,तथा शादी और बच्चों के उत्तराधिकार को लेकर कई सीमाएं तय की गई हैं। जो की बिना तलाक के किसी तरह की कोई शादी, महिला या पुरुष में से कोई भी नहीं कर सकेगा. इससे बहुविवाह पर रोक लग जाएगी. हालांकि, फिलहाल इन सभी कानून से जनजातियों को बाहर रखा गया है.

शादी के 1 साल बाद तक किसी भी तरह की तलाक की याचिका कोई भी न्यायालय में दायर नहीं कर पाएगा. कानून में यह साफ कहा गया है कि शादी के 1 साल तक किसी भी तरह की कोई भी याचिका स्वीकार नहीं होगी.

अगर दोनों में से किसी एक को कोई असाधारण कष्ट या अन्य कोई दिक्कत होती है तो वह 1 साल से पहले भी याचिका दायर कर सकता है।

अगर जांच के दौरान 1 साल से पहले दायर किए गए व्यक्ति के बारे में जानकारी झूठी या षड्यंत्र या छिपाकर कोई भी बात न्यायालय में पेश की जाती है तो कोर्ट उस व्यक्ति के ऊपर अपने मुताबिक कार्रवाई कर सकता है. इतना ही नहीं, 1 साल बाद अगर वह व्यक्ति कोर्ट में दोबारा से याचिका दायर करता है तो कोर्ट उसको निरस्त भी कर सकती है।

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अगर 1 साल के भीतर कोई बच्चा पति-पत्नी से होता है तो कोर्ट बच्चे को ध्यान में रखकर भी अपना पक्ष या फैसला सुनाएगी.

अगर शादी निर्धारित आयु का मानक पूरा किए बिना या प्रतिबंधित रिश्तों में की जाती है तो ऐसे दशा मे छह माह की जेल का प्रावधान रखा गया है. इसके साथ 50 हजार का जुर्माना भी लगाया जा सकता है । सजा के तौर पर दोनों भी दिए जा सकते हैं. जेल की सजा एक महीने तक बढ़ाई जा सकती है. इसके साथ ही तलाक के मामलों में अगर यूसीसी प्रावधानों के अलावा किसी प्रथा, रूढ़ि या परंपरा के तहत तलाक दिया गया तो तीन साल की जेल और जुर्माने का प्रावधान है.

अगर पत्नी होने के बावजूद फिर से शादी कोई करता है तो ऐसा करने वाले व्यक्ति को तीन साल जेल, एक लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है. जेल की सजा छह महीने तक बढ़ाई जा सकती है.।

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