व्यवसाय, पेशा और रोजगार क्या होता है। रोजगार के प्रकार क्या क्या है।

व्यवसाय-

ऐसा कार्य जो लाभ कमाने के उद्देश्य से किया जाता है व्यावसायिक कार्य कहा जाता है। किसी वस्तु का उत्पादन जो सेवाओ और अवश्यकताओ को पूरा करे वह भी व्यवसाय के अंतर्गत आता है।

इसको हम इस प्रकार भी कह सकते है कोई वस्तुओ का उत्पादन और विपडन जो आवश्यकताओ की पूर्ति करते हुए लाभ कमाये व्यवसाय होता है। जो ब्यक्ति व्यवसाय करता है वह व्यवसायी कहलाता है।

ऐसे कोई फर्म या उधम जो व्यवसाय को करती है व्यवसायिक फर्म कहलाती है।

पेशा –

पेशा ज्ञान और शिक्षण से संबन्धित सेवा होती है जिसके माध्यम से प्रशिक्षण दिया जाता है। पेशा को हम यह भी कह सकते है की ज्ञान के माध्यम से धन कमाना ही पेशा कहलाता है। इसके कई उदाहरण है जैसे वकील, सीए ,सीएस, सीएमए आदि प्रमुख है। ये सभी अपने ज्ञान के माध्यम से धन कमाते है और अपनी सेवाओ के रूप मे फीस लेते है, इनकी संस्थाए होती है और यह उनके मेम्बर्स होते है।

इनको हर साल मेम्बर्स की डीटेल देनी होती है की वह उस संस्था के मेम्बर है जैसे बार काउंसिल ऑफ इंडिया के मेम्बर्स वकील होते है। उसी प्रकार चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया के मेम्बर्स सीए होते है और कंपनी सेक्रेटरी ऑफ इंडिया के मेम्बर सीएस होते है और कॉस्ट अकाउंटेंट ऑफ इंडिया के मेम्बर सीएमए होते है। ये संस्थाए इंका निगमन करती है तथा सभी पेशेवर को संस्था का सदस्य होना आवश्यक है और इनके बनाए गए नियमो का पालन करना होता है।

रोजगार-

रोजगार को नौकरी भी कहते है। यह यह 2 पक्षो के बीच होने वाला सम्झौता है जिसमे नियोक्ता और कर्मचारी होते है जो एक कार्य देने और दूसरा कार्य करने का वचन लेता है।

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नियोक्ता वह व्यक्ति होता है जो कार्य देता है यानि जो कार्य करता है यह सरकारी संस्था ,कंपनी फ़र्म या प्राइवेट संस्था आदि हो सकती है।

कर्मचारी वह होता है जो नियोक्ता के बताए अनुसार कार्य को कर्ता है। वह व्यक्ति जो कार्य का दायित्व अपने हाथ मे लेता है कर्मचारी कहलाता है यह सरकारी अथवा प्राइवेट व्यक्ति हो सकता है जैसे होटल मे कार्य करने वाला, फ़ैक्टरि मे कार्य करने वाला ,अस्पतालो मे कार्य करने वाला आदि सभी कर्मचारी कहलाते है । इनको नियोक्ता से मजदूरी ,वेतन भत्ता ,लाभांश आदि प्राप्त होता है।

यह रोजगार कानून या विनिमय कानून द्वारा साशित होता है इसके अंतर्गत वेतन वार्षिक ,मासिक ,हो सकता है। या फिर अनुबंध के अनुसार वेतन दिया जा सकता है। या फिर एकमुस्त भी दिया जा सकता है। यह कर्मचारी और नियोक्ता के बीच हुए अनुबंध पर निर्भर करता है।

रोजगार के प्रकार-

 कई प्रकार के रोजगार होते है यह नियोक्ता द्वारा निकाले गए रोजगार समाचार या रोजगार पत्र मे स्पस्ट रूप से वर्णित होता है।  तो अब हम देखते है की रोजगार कितने प्रकार का होता है।

पूर्णकालीन रोजगार –

पूर्ण कालीन यानि की पूरे समय यह नियोक्ता द्वारा बताए गए अनुबंध के अनुसार उतने घंटे कार्य करता है। इसमे लाभ की मात्रा जादा होती है।

अंशकालीन रोजगार-

इसके अनुसार कर्मचारी को प्रति घंटे के अनुसार कार्य करना होता है यह नियोक्ता द्वारा बताया गया होता है। इसमे नियोक्ता पूर्ण कालीन लाभों की तुलना मे कम लाभ देता है तथा यह साप्ताहिक रूप मे इसका पेमेंट होता है।

अनुबंध रोजगार- आजकल इस प्रकार के रोजगार बहुत ही प्रसिद्ध है। क्योकि इसमे कम वेतन देना पड़ता है और कम समय मे कार्य भी पूरा हो जाता है इसमे कर्मचारियो के बीच यह अनुबंध होता है की या तो इतने समय के लिए आपको रखा जा रहा है या इस निश्चित कार्य को करने हेतु आपको रखा जा रहा है। इसमे नियोक्ता और कर्मचारी के बीच वेतन फ़िक्स्ड होता है। और कार्य करने का समय भी नियमित होता है।

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आकस्मिक रोजगार-

यह अनियमतता के आधार पर रोजगार प्रदान किया जाता है जब अचानक से कोई कार्य आ जाता है तो जादा कर्मचारियो की अवश्यकता होती है तो कर्मचारियो की जादा भर्ती करना उस निश्चित कार्य के लिए ही आकस्मिक रोजगार कहलाता है।

जैसे कोई नया प्रोजेक्ट कंपनी मे आ गया उसको 10 दिन मे पूरा करना है तो कंपनी के पास केवल 6 कर्मचारी है तो उसके लिए30 कर्मचारियो की भर्ती करना आकस्मिक रोजगार के अंतर्गत आएगा।

प्रशिक्षण रोजगार –

ऐसा रोजगार पेशेवर व्यक्तियों के लिए आवश्यक होती है उनको पढ़ाई के साथ साथ काम करने का नुभाव होना भी आवश्यक होता है इसलिए कंपनी या फ़र्म या किसी व्यक्ति के अधीन रहकर वह कार्य का अनुभव ले सके बदले मे उनको कुछ लाभ भी मिलता है यह प्रशिक्षण रोजगार भी कहा जाता है। जैसे सीए इंस्टीट्यूट अपने बच्चो को कंपनी या फ़र्म या फिर सीए के अधीन रहकर 15 महीने का कार्य करने का अनुभव प्राप्त कराती है जिसके बदले मे उनको कुछ धन दिया जाता है। और साथ मे उनकी पढ़ाई भी चलती रहती है। इसी प्रकार डॉक्टर को पढ़ाई के साथ साथ किसी हॉस्पिटल या डॉक्टर के अधीन रहकर कार्य का अनुभव लेना होता है वह प्रशिक्षण रोजगार के अंतर्गत आता है।

मौसमी रोजगार –

यह रोजगार मौसम के अनुसार घटता बढ़ता जाता है। और इस अनुसार ही कर्मचारियो का चयन होता है जैसे गर्मी मे आइस क्रीम का रोजगार गर्मी मे यह बहुत चलता है क्योकि इस व्यवशाय मे गर्मी का मौसम होता है और लोग ठंडी चीजे खाना पसंद करते है इसलिए गर्मी मे यह व्यवशाय अधिक चलता है और गर्मी मे इसमे रोजगार की संभावना अधिक होती है उसी प्रकार ठंडी के मौसम मे साल और स्वेटर का व्यवशाय अधिक चलता है और उसमे रोजगार की संभावना अधिक होती है यह मौसमी व्योवसाय कहलाता है।

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व्यवसाय ,पेशा और रोजगार मे तुलना –

व्यवसाय मे व्यवसाय करने वाले का निर्णय महत्वपूर्ण होता है।

पेशे मे संस्था की सदस्यता और प्रमाण होना आवश्यक होता है।

रोजगार मे नियुक्ति पत्र का होना आवश्यक होता है।

व्यवसाय लोंगों को वस्तु और सेवा प्रदान करते है।

पेशे मे विशेषज्ञ सेवा को प्रदान करते है।

रोजगार मे अनुबंध के अनुसार कार्य करते है।

व्यवसाय मे कोई न्यून्तम योग्यता नही होती है।

पेशे मे विशेषज्ञ सेवा को प्रदान करने के लिए विशेस योग्यता होनी चाहिए।  

रोजगार मे अनुबंध के अनुसार योग्यता होना चाहिए।इस प्रकार हमने आपको इस पोस्ट के माध्यम से व्यवसाय ,पेशा और रोजगार को समझाने का प्रयास किया है यदि कोई गलती हुई हो या आप इसमे और कुछ जोड़ना चाहते है या इससे संबंधित आपका कोई सुझाव हो तो आप हमे अवश्य सूचित करे।

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