इंडियन कंपनी लॉ (Indian company law) क्या हैं । भारत मे इसका विकास कैसे हुआ। कंपनी एक्ट 2013 (companies act 2013) क्या हैं।

आज के समय मे कंपनी एक्ट 2013 कंपनी पर लागू हो रहा हैं परंतु कंपनी एक्ट 2013 पढ़ने से पहले हमे कंपनी के बारे मे कुछ बेसिक ज्ञान ले लेना चाहिए। जैसे की कंपनी की उत्पत्ति कैसे हुई। कहाँ कहाँ  कंपनी एक्ट मे संसोधन हुआ आइये जानते हैं उसके बारे मे-

Development of Indian company law (भारतीय कंपनी का विकास) –

कंपनी एक्ट की शुरुआत 1850 मे हुई थी। जो कि ब्रिटिश कंपनी एक्ट को संसोधित करके हुई थी जो की 1844 की थी। 1850 से लेकर 1882 तक कंपनी एक्ट मे कई बार संशोधन हुआ। उन सब संशोधनों के बाद 1912 मे कंपनी एक्ट को लागू किया गया। इंडियन कंपनी एक्ट 1913 ब्रिटिश कंपनी एक्ट 1908 से लिया गया हैं। आपको बता दे कि 1912 के बाद भी कंपनी एक्ट मे कई बार संशोधन हुआ। जो क्रमशः 1914,1915,1920,1926,1930,1932.1936 मे संशोधित हुआ। आजादी के बाद हमे लगा कि कंपनी एक्ट मे अभी संशोधन की जरूरत हैं। अब आजाद भारत को ऐसा एक्ट चाहिए था जो हमारे देश कि दशा मे सुधार कर सके। इसके लिए सेंट्रल गवर्नमेंट ने 12 लोंगों की एक कमिटी बनाई जिसके चेयरमेन C. H. Bhabha थे। उन्होने अपनी रिपोर्ट 1952 मे पेश की और सेंट्रल गवर्नमेंट ने 1953 मे संसद मे बिल पारित किया। पार्लियामेंट ने बिल के संशोधन के लिए एक कमिटी का गठन किया। कमिटी के सुझाव पर वह बिल 1955 मे पास हो गया। और प्रेसिडेंट के सहमति  के बाद 1956 मे  कंपनी एक्ट पारित किया गया। जो कि 1 अप्रैल 1956 से लागू हुआ। जिसमे 658 सेक्शन और 14 schedules थे।

Companies act 2013 (कंपनी एक्ट 2013) –

कंपनी एक्ट 2013, कंपनी एक्ट 1956 को संशोधित करके बनाया गया हैं। जो कि कंपनी बिल 2012  लोकसभा मे 18 दिसम्बर 2012 को और राज्य सभा मे 8 अगस्त 2013 मे पारित हुआ। और 29 अगस्त 2013 मे राष्टपति जी के सहमति  के बाद 30 अगस्त 2013 को यह विधेयक मे लिखा गया। NCLT ने भी 1 जून 2016 से इसको लागू कर दिया। इसमे 29 चैप्टर 470 सेक्शन और 7 शैड्यूल हैं।

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Companies amendment act 2017-

यह बिल लोकसभा मे 27 जुलाई 2107 को पारित हुआ और राज्य सभा मे अभी प्रस्तावित हैं। इस एक्ट मे 93 सेक्शन हैं जिसमे 92 सेक्शन कंपनी एक्ट 2013 को संशोधित करके बनाया गया हैं। जिसका पूर्ण विवरण इस प्रकार हैं।

कंपनी एक्ट 2013 के वह सेक्शन जिसको संशोधित किया गया हैं-

सेक्शन 2, 4, 7, 12, 21, 26, 35, 47, 53, 54, 62, 73, 74, 76a, 77, 78, 82, 89, 92, 94, 96, 100, 101, 110, 121, 123, 129, 130, 132, 134, 135, 136, 137, 139, 140, 141, 143, 147, 148, 149, 151, 152, 153, 157, 160, 161, 164, 165, 167, 168, 173, 177, 178, 180, 184, 186, 188, 196, 197, 198, 200, 201, 216, 223, 236, 247, 366, 374, 379, 384, 391, 403, 409, 410, 411, 412, 435, 438, 439, 441, 447, 458,

इसके अलावा कंपनी एक्ट के सेक्शन 3a, 446a, 446b, 42, 90, 185, 406 को संशोधित करके नया सेक्शन बना दिया गया हैं।तथा सेक्शन 93,194,195 को हटा दिया गया हैं।

 Company act 2013 के कुछ प्रमुख बिन्दु इस प्रकार हैं।

One person company – जैसा की नाम से ही स्पस्ट हैं इसमे एक व्यक्ति से ही कंपनी सुरू की जा सकती हैं इसमे मिनिमम1 और मैक्सिमम 15 लोग हो सकते हैं। यह भी अक प्राइवेट कंपनी की त्राह ही होता हैं । इसमे अधिकार 1 के हाथ होता हैं और वही कंपनी का shareholder तथा वही कंपनी का director होता हैं वह अपना उत्तराधिकारी चुन सकता हैं तथा उसको बदल भी सकता हैं। वन पर्सन कंपनी मे स्वामित्व एक के हाथ होता हैं इसलिए कंपनी का भार वही समहालता हैं कंपनी पर यदि कोई वाद होता हैं तो वह इसका जिम्मेदार हैं। वन पर्सन कंपनी मे अकाउंटिंग वर्क ,paperwork बहुत कम होता हैं साल मे 2 बार इसका विवरड़ roc को देना होता हैं।

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Dormant company- dormant कंपनी वो कंपनी हैं जो कंपनी एक्ट मे registered हैं जिसने पिछले 2 साल से काम नही कर रही हो  या फिर निष्क्रिय हो गयी हैं।जिसके पास अपनी संपत्ति हैं पर उसने कोई acconting transaction नही किया हैं ऐसे कंपनी dormant company के लिए रजिस्ट्रार के पास एप्लिकेशन भेज सकते हैं।

रजिस्ट्रार कंपनी के डॉकयुमेंट चेक करके उसको dormant कंपनी मे रजिस्टर कर सकते हैं।

जो कंपनी 2 साल से annual return फ़ाइल नही कर रहे हैं या फिर उनका अकाउंटिंग ट्रीटमंट नही हो प रहा हैं ऐसी कंपनियो को रजिस्ट्रार नोटिस भेज सकता हैं।

ऐसी dormant कंपनी जिसमे मिनिमम नंबर डाइरेक्टर उपलब्ध हो वह annual fee और डॉकयुमेंट देकर फिर से कंपनी को एक्टिव कर सकते हैं।

यदि जो कंपनी ऐसा नही कर पाती हैं रजिस्ट्रार उसका नाम अपने रजिस्टर से हटा सकता हैं।

Women director- सेक्शन149(1)कंपनी एक्ट 2013 मे यह प्रावधान हैं की कुछ विशेस प्रकार की कंपनी को एक वुमेन डाइरेक्टर रखना आवश्यक हैं। आईए देखते हैं वो कंपनिया कौन कौन सी हैं।

प्रत्येक ऐसे कंपनी जो स्टॉक एक्स्चेंज मे listed हैं।

प्रत्येक ऐसी पब्लिक कंपनी जिसका टर्नओवर 300 करोड़ रुपये या उससे अधिक हैं या जिसका paid up capital 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक हैं उसको एक women director रखना जरूरी हैं।

इनका tenure अगले annual general meeting तक होता हैं।

Independent director- सेक्शन 149(4) के अनुसार प्रत्येक लिसटेड कंपनी के 1/3 director independent director होने चाहिए।

Appointment and qualification of director rules 2014 के अनुसार निम्न प्रकार की कंपनियो को कम से कम 2 independent director रखना होगा।

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वह पब्लिक कंपनी जिसका paid up capital 10 करोड़ या उससे अधिक हो।

वह पब्लिक कंपनी जिसका टर्नओवर 100 करोड़ या उससे अधिक हो।

वह कंपनी जिसका लोन,deposites,debenture 50 करोड़ से जादा हो।

सेक्शन 149(10)(11)एक independent director लगातार 5 वर्षो तक बोर्ड ऑफ कंपनी मे director रह सकता हैं।5 साल बाद वह फिर से reappoint हो सकता हैं उसके लिए special resolution पास करना होता हैं।

Key managerial person-

सभी कंपनियो को कंपनी के decision लेने के लिए top managerial person की आवश्यकता होती हैं। यह key managerial person होते हैं। जो की कंपनी के ग्रोथ के लिए जिम्मेदार होते हैं। और कंपनी की सभी प्रमुख जिम्मेदारिया उनपर निर्भर होती हैं। बोर्ड ऑफ डाइरेक्टर इनका appointment इनकी योग्यता के अनुसार करते हैं।

आईये जानते हैं key managerial person मे कौन कौन आता हैं।

Chief executive officer

Manager

Managing director

Company secretary

Chief financial officer

कंपनी एक्ट 2013 के अनुसार ये ऐसे ऑफिसर होते हैं जो कंपनी के डाइरेक्टर हो भी सकते हैं और नही भी परंतु ये टॉप managerial person होते हैं जो कंपनी की responsibility लेते हैं। यदि कंपनी कुछ गलत करती हैं तो ये उसके उत्तरदायी होते हैं।

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