प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 (Competition Act, 2002) क्या है।

प्रतिस्पर्धा अथवा प्रतियोगिता एक ऐसी प्रक्रिया है।  जिसमे सीमित साधन, वस्तु अथवा पद को पाने के लिए दो या दो से अधिक व्यक्ति एक साथ प्रयास करते है।यह अधिनियम संसद के  द्वारा  वर्ष 2002 में पारित किया गया था ।  जिस पर राष्ट्रपति महोदय ने जनवरी, 2003 में अपनी सहमति प्रदान की थी।उसके बाद  प्रतिस्पर्धा (संशोधन) अधिनियम, 2007 द्वारा इसे संशोधित  भी किया गया।

प्रतिस्पर्धा अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग और प्रतिस्पर्धा अपीलीय अधिकरण की स्थापना की गई है। यह वह कानून है जिसके द्वारा  कंपनियों की प्रतिस्पर्धा विरोधी गतिविधियों पर नजर रखते हुए बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देता है।

प्रतिस्पर्धा अधिनियम का मुख्य उद्देश्य प्रतिस्पर्धा पर प्रतिकूल असर डालने वाले व्यवहार को रोकने के लिए आयोग की स्थापना करना है तथा यह  बाजारों में प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करता है और  उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करता है।  और कंपनियों द्वारा किए जा रहे व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित भी करता है।

इस अधिनियम से पहले भी हमारे देश में प्रतिस्पर्धा कानून कार्य करता था । उस समय उसका नाम एकाधिकार और अपराध व्यापार व्यवहार (एमआरटीपी) अधिनियम था। यह देश का पहला प्रतिस्पर्धा कानून था जो 1969 में लागू हुआ था  लेकिन  बाद मे 1990 के दशक में जब अर्थव्यवस्था को उदार बनाया गया और मुक्त व्यापार के दरवाजे खोले गए तो यह कानून निष्क्रिय  साबित हुआ।और यही वजह थी कि  2002 में एमआरटीपी को निरस्त कर प्रतिस्पर्धा अधिनियम पारित किया गया । यह  2003 से लागू  हुआ।

इस अधिनियम में  कई बार संशोधन किया गया जो कि 2007 और 2009 में संशोधन मुख्य था। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) का गठन भी इसी अधिनियम के तहत किया गया है।

See Also  अंकेक्षण (auditing) का क्या उद्देश्य है? कंपनी अंकेक्षण (company audit) से क्या आशय है। इनके दायित्व और कर्तव्य बताए ?

इसकी देखरेख के लिए भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (Competition Commission of India- CCI) जो कि  भारत सरकार का एक सांविधिक निकाय है जो प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 (Competition Act, 2002) के प्रवर्तन के लिये उत्तरदायी है।और इसका गठन  मार्च 2009  मे हुआ था।

 केंद्र सरकार ने पूर्व आईएएस अधिकारी अशोक कुमार गुप्ता को भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (Competition Commission of India : CCI) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है । उन्होंने 9 नवंबर, 2018 को पदभार संभाला था । उनका कार्यकाल 25 अक्टूबर, 2022 तक या 65 वर्ष की आयु तक जो भी पहले हो तक रहेगा।

प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 (Competition Act, 2002) एक झलक मे-

प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 ,राघवन समिति की अनुशंसा पर एकाधिकार तथा अवरोधक व्यापार व्यवहार. अधिनियम, 1969 (Monopolies and Restrictive Trade Practices Act- MRTP Act) को निरस्त करके  इसके स्थान पर प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 को  लाया गया।

भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग का उद्देश्य निम्नलिखित के माध्यम से देश में एक सुदृढ़ प्रतिस्पर्द्धी वातावरण तैयार करना है।
उपभोक्ता, उद्योग, सरकार और अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्राधिकारों सहित सभी हितधारकों के साथ सक्रिय संलग्नता के माध्यम से देश में एक सुदृढ़ प्रतिस्पर्द्धी वातावरण तैयार करना है।
उच्च क्षमता स्तर के साथ एक ज्ञान प्रधान  था संगठन के रूप में देश में एक सुदृढ़ प्रतिस्पर्द्धी वातावरण तैयार करना है।
प्रवर्तन में पेशेवर कुशलता, पारदर्शिता, संकल्प और ज्ञान के माध्यम से देश में एक सुदृढ़ प्रतिस्पर्द्धी वातावरण तैयार करना है।      

प्रतिस्पर्धा (संशोधन) अधिनियम, 2007 द्वारा इसे संशोधित किया गया। यह आधुनिक प्रतिस्पर्धा विधानों के दर्शन का अनुसरण करता है।

यह अधिनियम प्रतिस्पर्द्धा-विरोधी करारों और उद्यमों द्वारा अपनी प्रधान स्थिति के दुरुपयोग का प्रतिषेध करता है।  तथा समुच्चयों [अर्जन, नियंत्रण की प्राप्ति और ‘विलय एवं अधिग्रहण’ (M&A)] का विनियमन करता है।  क्योंकि इनसे भारत में प्रतिस्पर्द्धा पर व्यापक प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है या इसकी संभावना बनती है।

See Also  व्यावसायिक सन्नियम (Business Law ) क्या होता है।व्यवसायिक सन्नियम का अर्थ एवं परिभाषा (Meaning and definitions of Business Law)

संशोधन अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग और प्रतिस्पर्धा अपीलीय न्यायाधिकरण (Competition Appellate Tribunal- COMPAT) की स्थापना की गई।

 सरकार ने प्रतिस्पर्धा अपीलीय न्यायाधिकरण (COMPAT) को राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (National Company Law Appellate Tribunal- NCLAT)वर्ष 2017 में  प्रतिस्थापित कर दिया।

इसके अंतर्गत निम्न कार्यालय शामिल है।

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग
भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड
भारतीय चार्टर्ड एकाउंटेंट्स संस्थान
भारतीय लागत लेखाकारों  संस्थान
भारतीय कम्पनी सचिव संस्थान
विनिधान कर्त्ता शिक्षा और सुरक्षा निधि प्राधिकरण
भारतीय कारपोरेट कार्य संस्थान
 राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय अधिकरण
राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण
राष्ट्रीय कॉर्पोरेट गवर्नेंस फाउंडेशन
राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण
राष्ट्रीय कॉर्पोरेट सामाजिक  उत्तरदायित्व  फाउंडेशन
गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय

इसके मुख्य उदेश्य इस प्रकार है।

प्रतिस्पर्धा पर विपरित प्रभाव डालने वाले व्यवहारों को रोकना-

बाज़ार विफलताओं एवं विकृतियों का शिकार हो रहा था । और विभिन्न अभिकर्त्ता कार्टेलाइज़ेशन, अपनी प्रधान स्थिति के दुरुपयोग जैसे प्रतिस्पर्द्धा विरोधी गतिविधियों का सहारा ले रहे थे जो आर्थिक दक्षता और उपभोक्ता कल्याण पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।इसको रोकने के लिए इसका विकास हुआ ।

 बाजारों में प्रतिस्पर्धा का संवर्धन और उसे बनाए रखना-

 भारत मे जहा अर्थव्यवस्था वहां के बाजार पर निर्भर करता है। जहाँ अर्थव्यवस्थाएँ बंद अर्थव्यवस्थाओं से खुली अर्थव्यवस्थाओं में परिणत हो रही हैं।  घरेलू उद्योगों की निरंतर व्यवहार्यता सुनिश्चित करने के लिये एक प्रभावी प्रतिस्पर्धा आयोग का होना आवश्यक है।  जो  बाजार मे संतुलन को बनाए रखते हुए उद्योग को प्रतिस्पर्धा के लाभों का अवसर प्रदान करती है।

बाजार मे प्रतिस्पर्धा कानूनों को मुक्त उद्यम के मैग्नाकार्टा के रूप में वर्णित किया गया है। जिसका मुख्य उद्देश्य आर्थिक स्वतंत्रता और हमारे मुक्त उद्यम प्रणाली के संरक्षण के लिये प्रतिस्पर्धा करना है।

See Also  Winding up of a company (कंपनी के समापन) से आप क्या समझते हैं। इसकी प्रक्रिया क्या है?

 उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा –

इसका उद्देश्य स्वच्छ प्रतिस्पर्धा को बढावा देना है।  ताकि बाजार उपभोक्ताओं के हित का साधन बनाया जा सके। और उन्हे जादा से जादा लाभ मिल सके।

 व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना-

इसका कार्य  प्रतिस्पर्धा पर प्रतिकूल असर डालने वाले व्यवहार को रोकने के लिए आयोग की स्थापना करना बाजारों में प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करना और  उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना और कंपनियों द्वारा किए जा रहे व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना है।

इसके अलावा भी यह निम्न मे सहयोग देता है।

 उपभोक्ताओं के लाभ और कल्याण के लिये बाज़ारों को कार्यसक्षम बनाना।

अर्थव्यवस्था के तीव्र तथा समावेशी विकास एवं वृद्धि के लिये देश की आर्थिक गतिविधियों में निष्पक्ष और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करता है।

आर्थिक संसाधनों के कुशलतम उपयोग को कार्यान्वित करने के उद्देश्य से प्रतिस्पर्धा नीतियों को लागू करता है।

क्षेत्रीय नियामकों के साथ प्रभावी संबंधों व अंतःक्रियाओं का विकास व संपोषण ताकि प्रतिस्पर्धा कानून के साथ क्षेत्रीय नियम कानूनों का बेहतर संरेखण और तालमेल सुनिश्चित करता है।

यह प्रतिस्पर्धा के समर्थन को प्रभावी रूप से आगे बढ़ाता है।  और सभी हितधारकों के बीच प्रतिस्पर्द्धा के लाभों पर सूचना का प्रसार करता है।  ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्द्धा की संस्कृति का विकास तथा संपोषण किया जा सके।

Leave a Comment