दण्ड प्रक्रिया संहिता धारा 71 से 75 का विस्तृत अध्ययन

जैसा कि आप सभी को ज्ञात होगा इससे पहले की पोस्ट मे दंड प्रक्रिया संहिता धारा 71 से 75 का विस्तृत अध्ययन करा चुके है यदि आपने यह धराये नही पढ़ी है तो पहले आप उनको पढ़ ली जिये जिससे आपको आगे की धराये समझने मे आसानी होगी।

धारा 71

इस धारा मे प्रतिभूति लिए जाने की शक्ति को निर्देशित करना बताया गया है। जिसमे यह बताया गया है कि किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी करने वाला कोई न्यायालय वारंट पर पृष्ठांकन द्वारा स्वविवेकानुसार यह निदेश दे सकता है कि यदि वह व्यक्ति न्यायालय के समक्ष निर्धारित समय पर और तत्पश्चात् जब तक न्यायालय द्वारा अन्यथा निदेश नहीं दिया जाता है तब तक अपनी हाजिरी के लिए पर्याप्त साक्ष्य सहित बंधपत्र निष्पादित करता है तो वह अधिकार जिसे वारंट निर्दिष्ट किया गया है। ऐसे व्यक्ति से ऐसी प्रतिभूति लेगा और उस व्यक्ति को अभिरक्षा से छोड़ देगा।

पृष्ठांकन में निम्नलिखित बातें लिखी होनी चाहिए।

प्रतिभुओं की संख्या स्पस्ट रूप

ऐसी रकम जिसके लिए प्रतिभूति और वह व्यक्ति दोनों जिसकी गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी किया गया है।

वह समय जब न्यायालय के समक्ष उसे उपस्थित होना है।बंध पत्र को न्यायालय को भेजना होता है।

धारा 72

इस धारा मे यह बताया गया है की न्यायालय के द्वारा यदि वारंट जारी किया जाता है तो कौन से पुलिस अधिकारी को वारंट निर्दिस्ट होगा। यानि की कौन से पुलिस अधिकारी के नाम से वारंट जारी किया जाएगा जो एक या एक से अधिक हो सकता है यह तुरंत निर्दिस्ट किया जाएगा और यह आदेश लिखित रूप से पुलिस अधिकारी को दिया जाता है । पर यदि पुलिस अधिकारी उपलभ्ध न हो तो वारंट जारी करने वाला न्याययालय किसी अन्य व्यक्ति को वारंट जारी कर सकता है। तो ऐसे व्यक्ति वारंट का निष्पादन करेगा और व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकता है। जब वारंट एक या एक से अधिक व्यक्ति के नाम निर्दिस्ट है तो उसका निष्पादन सबके या उनमे से किसी एक के द्वारा किया जा सकता है।

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धारा 73

इस धारा मे यह बताया गया है की वारंट किसी भी व्यक्ति को निर्दिस्ट हो सकता है। किसी भी व्यक्ति को लिखित वारंट दे कर यह कहा जा सकता है की आप उस व्यक्ति को गिरफ्तार कर लीजिये ।

जैसे कोई निकाल भागा अपराधी ,या कोई अभियुक्त जो अजामानतीय अपराध के लिए घोसीत किया गया हो या उद्घोसित अपराधी के लिए मैजिस्ट्रेट वारंट दे सकता है। यदि वह व्यक्ति गिरफ्तार होने से बचना चाह रहा है तो धारा 73 मे यह बताया गया की ऐसे अपराधी को किसी भी व्यक्ति के द्वारा गिरफ्तार किया जा सकता है जो स्थानीय अधिकारिता के अंदर होना चाहिए।

ऐसा व्यक्ति वारंट को लिखित रूप से प्राप्त करेगा। और जिस भारसाधक अधिकारी के अंदर है उस व्यक्ति को गिरफ्तार करेगा।

जब वह व्यक्ति जिसके वीरुध यह वारंट जारी किया गया है उसको गिरफ्तार कर लिया गया है तब वह वारंट सहित निकटतम पुलिस अधिकारी के हवाले कर दिया जाएगा। यदि वह व्यक्ति जमानत लेने के लिए तत्पर है या नही पुलिस अधिकारी के सामने प्रस्तुत कर दिया जाता है मैजिस्ट्रेट के सामने 24 घंटे के अंदर उस अभियुक्त को प्रस्तुत कर दिया जाएगा।

धारा 74

इस धारा मे यह बताया गया है की पुलिस अधिकारी को निर्दिस्ट वारंट यानि जिस पुलिस अधिकारी के नाम से वारंट बनाया गया है क्या वह किसी और को दिया जा सकता है या नही यह बताया गया है । पुलिस अधिकारी को निर्दिस्ट वारंट यानि जिस पुलिस अधिकारी के नाम से वारंट बनाया गया है वह किसी अन्य पुलिस अधिकारी के नाम से भी प्रस्ठांतरित किया जा सकता है। जब पुलिस अधिकारी खुद वारंट का निष्पादन नही कर सकता ही तो दूसरे पुलिस अधिकारी का नामऔर पदनाम उस वारंट पर लिख सकता है और उसको भेज सकता है। यदि ऐसा नही कर सकता है तो ऐसा वारंट का निष्पादन अवैध माना जाएगा। यदि पुलिस अधिकारी का नाम लिखा हो और पद नाम नही लिखा गया तो भी न्यायालय इसको मान्य लेगी।

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धारा 75

इस धारा मे वारंट के सार की सूचना के बारे मे बताया गया है। पुलिस अधिकारी या अन्य व्यक्ति जो गिरफ्तारी वारंट का निष्पादन कर रहा है उस व्यक्ति को जिसको गिरफ्तार करना है उसको सार सूचित करता है । और यदि वह व्यक्ति जो वारंट की माग कर रहा है उसको वारंट दिखा सकता है और यदि वह जमानत के बारे मे जानना चाहता है तो पुलिस अधिकारी उसके बारे मे विस्तार से बताएगा।

दंड प्रक्रिया संहिता की कई धराये अब तक बता चुके है यदि आपने यह धराये नही पढ़ी है तो पहले आप उनको पढ़ लीजिये जिससे आपको आगे की धराये समझने मे आसानी होगी।

यदि आपको इन धाराओ को समझने मे कोई परेशानी आ रही है। या फिर यदि आप इससे संबन्धित कोई सुझाव या जानकारी देना चाहते है।या आप इसमे कुछ जोड़ना चाहते है।या फिर आपको इन धाराओ मे कोई त्रुटि दिख रही है तो उसके सुधार हेतु भी आप अपने सुझाव भी भेज सकते है।

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