भारतीय दंड संहिता धारा 119 से 124 तक का विस्तृत अध्ययन

जैसा कि आप सभी को ज्ञात होगा इससे पहले की पोस्ट मे भारतीय दंड संहिता धारा 118  तक का विस्तृत अध्ययन करा चुके है यदि आपने यह धराये नही पढ़ी है तो पहले आप उनको पढ़ ली जिये जिससे आपको आगे की धराये समझने मे आसानी होगी।

धारा 119

धारा 119 के अनुसार यह बताया गया है की जो कोई लोक सेवक होते हुए कोई ऐसा अपराध जिसका निवारण हो सकता है उसको छुपाते है तो उस अपराध का किया जाना, जिसका निवारण करना ऐसे लोक सेवक के नाते उसका कर्तव्य है। ऐसे अपराध के किए जाने की परिकल्पना के अस्तित्व को किसी कार्य या अवैध लोप द्वारा स्वेच्छया छिपाएगा या ऐसी परिकल्पना के बारे में ऐसा निरूपण करेगा जिसका झूठा होना वह जानता है

यदि फिर भी यदि अपराध कर दिया जाए वह उस अपराध के लिए उपबंधित किसी प्रकार के कारावास से जिसकी अवधि ऐसे कारावास की दीर्घतम अवधि के आधी तक होगी या उस अपराध के लिए जो भी आर्थिक दण्ड से या दोनों मे से कोई भी दिया जा सकता है।


यदि अपराध मृत्यु आदि से दण्डनीय रहा हो तो या  यदि वह अपराध मृत्यु या आजीवन कारावास से दण्डनीय हो तो ऐसे अपराध मे उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा दी जा सकती है। जिसे दस वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है


यदि अपराध नहीं किया जाए अथवा यदि वह अपराध नहीं किया गया  तो उसे उस अपराध के लिए उससे संबन्धित किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा, जिसकी अवधि ऐसे कारावास की दीर्घतम अवधि की एक चौथाई तक की होगी या उस अपराध के लिए संबन्धित  आर्थिक दण्ड या दोनों से कोई भी से  दण्डित किया जाएग

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धारा 120
भारतीय दंड संहिता की धारा 120 के अनुसार जो भी कोई उस अपराध का किया गया हो जो कारावास से दण्डनीय है। जिसको सुगम बनाने के आशय से या संभाव्यता तद्द्वारा सुगम बनाएगा यह जानते हुए किऐसे अपराध के किए जाने की परिकल्पना के अस्तित्व को किसी कार्य या अवैध लोप द्वारा स्वेच्छा पूर्वक छिपाएगा या ऐसी परिकल्पना के बारे में ऐसा वर्णन करेगा, जिसका निर्धारण होना वह जानता है।

यदि अपराध हो रहा हो तो ऐसे दशा मे यदि ऐसा अपराध हो जाता है।  तो उसे उस अपराध के लिए उपबंधित किसी एक अवधि के लिए कारावास, जिसकी अवधि ऐसे कारावास की दीर्घतम अवधि की एक चौथाई तक बढ़ायी जा सकती है।  या आर्थिक दंड या दोनों से दण्डित किया जाएगा।
और यदि अपराध नहीं होता तब वह यदि वह अपराध नहीं किया जाए तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास, जिसकी अवधि ऐसे कारावास की दीर्घतम अवधि के आठवें भाग तक बढ़ायी जा सकती है।  या उस अपराध के लिए उपबंधित आर्थिक दण्ड से या फिर  दोनों से दण्डित किया जाएगा।

लागू अपराध
कारावास से दण्डनीय अपराध करने की परिकल्पना को छिपाना यदि अपराध होता है। इसमे अपराध के लिए दीर्घतम अवधि की एक चौथाई अवधि के लिए कारावास या आर्थिक दंड या दोनों दिया जाएगा ।जिसमे जमानत, संज्ञान और अदालती कार्रवाई, किए गये अपराध अनुसार ही होगी।

 यदि अपराध नहीं होता है। तो ऐसे दशा मे दीर्घतम अवधि के आठवें भाग के लिए कारावास या आर्थिक दण्ड या दोनों दिया जाएगा। तथा जमानत, संज्ञान और अदालती कार्रवाई, किए गये अपराध अनुसार होगी।

यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है।

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धारा 121
सरकार के विरुद्ध युद्ध करना या युद्ध का प्रयास करना या युद्ध करने का दुष्प्रेरण करेगा या फिर प्रयास करेगा। तो उसको मृत्युदंड या आजीवन कारावास दिया जा सकता है। और उसको आर्थिक दंड भी दिया जा सकता है। यह एक गैर-जमानती, संज्ञेय अपराध है और सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है।

धारा 121 क
धारा 121 के अपराध को करने का षड्यंत्र करता है। या केंद्र या राज्य सरकार के विरुद्ध आपराधिक बल का प्रयोग करेगा या कानूनी रूप से किसी को कार्य करने के लिए विवस करता है या किसी को धमकाएगा तो उसको 10  वर्ष तक की सजा और जुर्माना लगाया जा सकता है। या आजीवन कारावास हो सकता है। इसमे कोई भी व्यक्ति आ सकता है चाहे भारत के बाहर हो या भारत के अंदर ये कार्य करता है।

धारा 122
यह धारा बताती है की भारत सरकार के खिलाफ युद्ध करने के लिए आयुध  का संग्रह करना यदि कोई व्यक्ति ऐसा करता है जिससे वह भारत सरकार के खिलाफ युद्ध कर सकता या प्रयास करेगा ऐसे व्यक्ति को आजीवन कारावास या 10 वर्ष की सजा और जुर्माना से दंडित किया जा सकता है।


धारा 123
जब कोई व्यक्ति भारत सरकार से युद्ध करने की तैयारी करने वाले व्यक्ति को सहायता प्रदान करता है। जैसे किसी जानकारी को छिपना या हथियार को देना या किसी कार्य के द्वारा या किसी अन्य प्रकार से ऐसे व्यक्ति को आजीवन कारावास या 10 वर्ष की सजा और जुर्माना से दंडित किया जा सकता है।
इसमे किसी कार्य को करना या किसी लोप को करना सामील है।

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धारा 124
यह धारा बताती है की किसी विधि पूर्ण कार्य करने के लिए राज्यपाल ,राष्ट्रपति आदि पर हमला करता है , जो विधिपूर्ण किसी कार्य को करने के लिए विवश करने के लिए ,या फिर किसी कार्य को अवरोध करने के लिए विवश करे और उस पर हमला करना शामिल है। तो ऐसे व्यक्ति को  आजीवन कारावास या 7 वर्ष की सजा और जुर्माना से दंडित किया जा सकता है।

भारतीय दंड  संहिता की कई धराये अब तक बता चुके है यदि आपने यह धराये नही पढ़ी है तो पहले आप उनको पढ़ लीजिये जिससे आपको आगे की धराये समझने मे आसानी होगी।
यदि आपको इन धाराओ को समझने मे कोई परेशानी आ रही है। या फिर यदि आप इससे संबन्धित कोई सुझाव या जानकारी देना चाहते है।या आप इसमे कुछ जोड़ना चाहते है।या फिर आपको इन धाराओ मे कोई त्रुटि दिख रही है तो उसके सुधार हेतु भी आप अपने सुझाव भी भेज सकते है।

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