(सीआरपीसी) दण्ड प्रक्रिया संहिता धारा 168 से 171 तक का विस्तृत अध्ययन

जैसा कि आप सभी को ज्ञात होगा इससे पहले की पोस्ट में दंड प्रक्रिया संहिता धारा 167  तक का विस्तृत अध्ययन करा चुके है यदि आपने यह धाराएं नहीं पढ़ी है तो पहले आप उनको पढ़ लीजिये जिससे आपको आगे की धाराएं समझने में आसानी होगी।

धारा 168

इस धारा के अनुसार अधनीस्थ पुलिस अधिकारी द्वारा अन्वेषण की रिपोर्ट के बारे मे बताया गया है।
जब कोई अधीनस्थ पुलिस अधिकारी इस अध्याय के अधीन दी ज्ञी धारा के अनुसार कोई अन्वेषण करता है तब वह उस अन्वेषण के परिणाम की रिपोर्ट पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को करेगा।

धारा 169

इस धारा के अनुसार जब साध्य अपर्याप्त हो तब उस दशा मे अभियुक्त का छोड़ा जाना बताया गया है।
इस  अध्याय के अधीन अन्वेषण के आधार पर  पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को यह प्रतीत होता है कि ऐसा पर्याप्त साक्ष्य या संदेह का उचित आधार नहीं है।  जिससे अभियुक्त को मजिस्ट्रेट के पास भेजना न्यायानुमत है।  तो ऐसे दशा मे ऐसा अधिकारी उस दशा में जिसमें वह व्यक्ति अभिरक्षा में है उसके द्वारा प्रतिभुओं के सहित या रहित  जैसा ऐसा अधिकारी निर्दिष्ट करे या फिर  यह बंधपत्र निष्पादित करने पर उसे छोड़ देगा कि यदि और जब अपेक्षा की जाए तो ऐसे दशा मे   वह ऐसे मजिस्ट्रेट के समक्ष हाजिर होगा जो पुलिस रिपोर्ट पर ऐसे अपराध का संज्ञान करने के लिए और अभियुक्त का विचारण करने या उसे विचारणार्थ सुपुर्द करने के लिए सशक्त है।

धारा 170

इस धारा मे यह बताया गया है की जब साक्ष्य पर्याप्त है तब मामलों का मजिस्ट्रेट के पास भेज दिया जाना चाहिए।
(1) यदि इस अध्याय के अधीन अन्वेषण करने पर पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को जब यह प्रतीत होता है कि यथापूर्वोक्त पर्याप्त साक्ष्य या उचित आधार है।  तो वह अधिकारी पुलिस रिपोर्ट पर उस अपराध का संज्ञान करने के लिए और अभियुक्त का विचारण करने या उसे विचारणार्थ सुपुर्द करने के लिए सशक्त मजिस्ट्रेट के पास अभियुक्त को अभिरक्षा में भेजेगा अथवा यदि अपराध जमानतीय है । और अभियुक्त प्रतिभूति देने के लिए समर्थ है । तो ऐसे मजिस्ट्रेट के समक्ष नियत दिन उसके हाजिर होने के लिए और ऐसे मजिस्ट्रेट के समक्ष जब तक अन्यथा निदेश न दिया जाए तब तक, दिन-प्रतिदिन उसकी हाजिरी के लिए प्रतिभूति लेगा।

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(2) जब पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी अभियुक्त के इस धारा के अधीन मजिस्ट्रेट के पास  भेजा जाता है या ऐसे मजिस्ट्रेट के समक्ष उसके हाजिर होने के लिए प्रतिभूति लेता है।  तब उस मजिस्ट्रेट के पास वह ऐसा कोई आयुध या अन्य वस्तु जो उसके समक्ष पेश करना आवश्यक हो तो उसको  भेजेगा और यदि कोई परिवादी हो तो ऐसे स्थित मे  उससे और ऐसे अधिकारी को मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से परिचित प्रतीत होने वाले उतने व्यक्तियों से जितने वह आवश्यक समझे मजिस्ट्रेट के समक्ष निर्दिष्ट प्रकार से हाजिर होने के लिए और (यथास्थिति) अभियोजन करने के लिए या अभियुक्त के विरुद्ध आरोप के विषय में साक्ष्य देने के लिए बंधपत्र निष्पादित करने की अपेक्षा करेगा।

(3) यदि बंधपत्र में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का न्यायालय उल्लिखित है।  तो उस दशा मे उस न्यायालय के अंतर्गत कोई ऐसा न्यायालय भी समझा जाएगा जिसे ऐसा मजिस्ट्रेट मामले की जांच या विचारण के लिए निर्देशित करता है।  परंतु यह तब जब ऐसे निर्देश की उचित सूचना उस परिवादी या उन व्यक्तियों को दे दी गई है।

(4) वह अधिकारी, जिसकी उपस्थिति में बंधपत्र निष्पादित किया जाता है। और उस बंधपत्र की एक प्रतिलिपि उन व्यक्तियों में से एक को परिदत्त करेगा जो उसे निष्पादित करता है । और तब मूल बंधपत्र को अपनी रिपोर्ट के साथ मजिस्ट्रेट के पास भेजेगा।

धारा 171

इस धारा मे परिवादी और साक्षियों से पुलिस अधिकारी के साथ जाने की अपेक्षा न किया जाना और उनका अबरुद्ध न किया जाना बताया गया है।
किसी परिवादी या साक्षी से  जो किसी न्यायालय में जा रहा है। या फिर जो  पुलिस अधिकारी के साथ जाने की अपेक्षा न की जाएगीऔर न तो उसे अनावश्यक रूप से अवरुद्ध किया जाएगा या असुविधा पहुंचाई जाएगी और न उससे अपनी हाजिरी के लिए उसके अपने बंधपत्र से भिन्न कोई प्रतिभूति देने की अपेक्षा की जाएगी।

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परंतु यदि कोई परिवादी या साक्षी हाजिर होने से या धारा 170 में निर्दिष्ट प्रकार का बंधपत्र निष्पादित करने से इनकार करता है।  तो पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी उसे मजिस्ट्रेट के पास अभिरक्षा में भेज सकता है। तथा  जो उसे तब तक अभिरक्षा में निरुद्ध रख सकता है । जब तक वह ऐसा बंधपत्र निष्पादित नहीं कर देता है या जब तक मामले की सुनवाई समाप्त नहीं हो जाती है।

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