(सीआरपीसी) दंड प्रक्रिया संहिता धारा 271 से 275 तक का विस्तृत अध्ययन

जैसा कि आप सभी को ज्ञात होगा इससे पहले की पोस्ट में दंड प्रक्रिया संहिता धारा 265  तक का विस्तृत अध्ययन करा चुके है यदि आपने यह धाराएं
नहीं पढ़ी है तो पहले आप उनको पढ़ लीजिये जिससे आपको आगे की धाराएं समझने में आसानी होगी।

धारा 271

इस धारा के अनुसार कारागार में साक्षी की परीक्षा के लिए कमीशन जारी करने की शक्ति को बताया गया है।

इसके अनुसार कारागार में परिरुद्ध या निरुद्ध किसी व्यक्ति को साक्षी के रूप में परीक्षा के लिए धारा 284 के अधीन कमीशन जारी करने की न्यायालय की शक्ति पर इस अध्याय के उपबंधों का कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।  और अध्याय 23 के भाग ख के उपबन्ध कारागार में ऐसे किसी व्यक्ति की कमीशन पर परीक्षा के सम्बन्ध में वैसे ही लागू होंगे।  जैसे वे किसी अन्य व्यक्ति की कमीशन पर परीक्षा के सम्बन्ध में लागू होते हैं।

धारा  272

इस धारा के अनुसार न्यायालय की भाषा को बताया गया है।

इसके   अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा न्यायालय की भाषा के तौर पर घोषित किया जाता है। यह निर्णय जो धारा 353 के अंतर्गत दिया जाता है या आरंभिक अधिकारिकता के न्यायालय में होने वाले प्रत्येक विचारण में दिया जाता है। इस निर्णय से आशय आरंभिक न्यायालय के निर्णय से है, न कि किसी अपील के निर्णय या उच्चतम न्यायालय के निर्णय से है ।

धारा 273

इस धारा के अनुसार साक्ष्य का अभियुक्त की उपस्थिति में लिया जाना बताया गया है।

इसके अनुसार अभिव्यक्त रूप से जैसा उपबंधित है । उसके सिवाय, विचारण या अन्य कार्यवाही के अनुक्रम में लिया गया सब साक्ष्य अभियुक्त की उपस्थिति में या जब उसे वैयक्तिक हाजिरी से अभिमुक्त कर दिया गया है। और  तब उसके प्लीडर की उपस्थिति में लिया जाएगा।
परन्तु जहाँ अट्ठारह वर्ष से कम आयु की स्त्री का जिससे बलात्संग या किसी अन्य लैंगिक अपराध के किये जाने का अभिकथन किया गया है, साक्ष्य अभिलिखित किया जाना है, वहाँ न्यायालय यह सुनिश्चित करने के लिये कि ऐसी स्त्री का सामना अभियुक्त से न हो, जबकि अभियुक्त की प्रतिपरीक्षा के अधिकार को भी उसी समय सुनिश्चित करते हुए, समुचित उपाय कर सकेगा।

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धारा 274

इस धारा के अनुसार समन-मामलों और जांचों में अभिलेख को बताया गया है।

(1) मजिस्ट्रेट के समक्ष विचारित सब समन-मामलों में, धारा 145 से धारा 148 तक की धाराओं के अधीन (जिनके अन्तर्गत ये दोनों धाराएं भी हैं) सब जांचों में, और विचारण के अनुक्रम की कार्यवाहियों से भिन्न धारा 446 के अधीन सब कार्यवाहियों में, मजिस्ट्रेट जैसे-जैसे प्रत्येक साक्षी की परीक्षा होती जाती है, वैसे-वैसे उसके साक्ष्य के सारांश का ज्ञापन न्यायालय की भाषा में तैयार करेगा ;

परन्तु यदि मजिस्ट्रेट ऐसा ज्ञापन स्वयं तैयार करने में असमर्थ है तो वह अपनी असमर्थता के कारणों को अभिलिखित करने के पश्चात् ऐसे ज्ञापन को खुले न्यायालय में स्वयं बोल कर लिखित रूप में तैयार कराएगा।

(2) ऐसे ज्ञापन पर मजिस्ट्रेट हस्ताक्षर करेगा और वह अभिलेख का भाग होगा।

धारा 275

इस धारा के अनुसार विचारण का संचालन लोक अभियोजक द्वारा किया जाना बताया गया है।
सेशन न्यायालय के समक्ष प्रत्येक विचारण में, अभियोजन का संचालन लोक अभियोजक द्वारा किया जाएगा

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