दंड प्रक्रिया संहिता धारा 60 से 64 तक का विस्तृत अध्ययन

जैसा कि आप सभी को ज्ञात होगा इससे पहले की पोस्ट मे हमने दंड प्रक्रिया संहिता धारा 59 तक का विस्तृत अध्ययन करा चुके है यदि आपने यह धाराएं नही पढ़ी है तो पहले आप उनको पढ़ लीजिये जिससे आपको आगे की धाराएं समझने मे आसानी होगी।


धारा 60 –
इस धारा मे यह बताया गया है की पुलिस को क्या अधिकार प्राप्त है। इसमे बताया गया है की यदि कोई अपराधी पुलिस कस्टडी से भाग जाता है और भारत के किसी भी कोने मे हो पुलिस उसको पकड़ कर ला सकती है। पुलिस उसको बिना वारंट के भी गिरफ्तार कर सकता है। भले वह व्यक्ति पुलिस अधिकारी न हो। पुलिस अपराधी का पीछा करने और पकड़ने के लिए स्वतंत्र है।


धारा 61 –
इस धारा मे समन को बताया गया है। इसमे समन का प्रारूप बताया गया है समन का अर्थ होता है बुलावा , इसमे यह लिखा होता है की इस व्यक्ति को यह इस समय हाजिर होना है यदि कोई उस समय उपस्थित नहीं होता है तो उसको न्यायालय का अमान्य माना जाएगा और दंड दिया जाएगा। उस पर न्यायालय की मोहर लगी होता है । यह 2 कॉपी मे होगा । यह न्यायालय के पीठासीन अधिकारी द्वारा हस्ताक्षर किया गया होगा।


समन कब दिया जा सकता है।
न्यायालय के द्वारा दस्तावेज पेश करने के लिए
धारा 107 से धारा 109 बांध पत्र के निष्पादन के लिए
धारा 113 मे हाजिरी के लिए
धारा 204 न्यायालय मे हाजिर होने के लिए
धारा 230 धारा 233 सेशन न्यायालय मे गवाह के लिए उपस्थित होना ।
धारा 242(2) गवाह के लिए वारंट जारी करने के लिए
धारा 254 समन मामलों के विचारण
छोटे मामलों के विचारण के लिए भी समन जारी किया जा सकता है।
समन के अंतर्गत न्यायालय का नाम ,व्यक्ति का नाम जिसको हाजिर होना है। हाजिर होने की तारीख लिखा होगा , हाजिर होने का समय ,हाजिर होने का स्थान उस पर लिखा होगा। ऐसा व्यक्ति बिना न्यायालय के अनुमति के बिना न्यायालय को नहीं छोड़ेगा यह लिखा होता है। और न्यायालय की मोहर लगी होगी।
जिस व्यक्ति को समन जारी किया गया यदि वह अवैध है तो व्यक्ति यदि न्यायालय मे नहीं पहुचता है तो यह अवमानना नहीं है। यदि वैध समन के बाद नहीं पहुंचता है तो भारतीय दंड प्रक्रिया धारा 174 के अनुसार 1 माह का साधारण कारावास दिया जा सकता है। और 500 तक का जुर्माना या दोनों हो सकता है। यदि न्यायालय की अवमानना पर 6 माह की सजा और 1000 जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है।

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धारा 62-
यह धारा यह बताती है की समन की तामील कैसे की जाए इसका मतलब है न्यायालय मे किसी व्यक्ति को बुलाने के लिए पत्र देना प्रत्येक समन की तामील पुलिस अधिकारी द्वारा या ऐसे नियमों के अधीन जो राज्य सरकार इस निमित्त बनाए या फिर उस न्यायालय के अधिकार मे जिसने वह समन जारी किया है। किसी अधिकारी द्वारा या अन्य लोक सेवक द्वारा की जाएगी ।

यदि संभव हो तो समन किए गए व्यक्ति पर समन की तामील उसे उस समन की दो प्रतियों में से एक का परिदान या निविदान करके वैयक्तिक रूप से की जाएगी जिसका अर्थ है एक प्रति समन जारी व्यक्ति को दी जाएगी और दूसरे पर उसके हस्ताक्षर करा कर न्यायालय को दिया जाएगा।

 प्रत्येक व्यक्ति वह  जिस पर समन की ऐसे तामील की गई है। यदि तामील करने वाले अधिकारी द्वारा ऐसी अपेक्षा की जाती है तो दूसरी प्रति के पृष्ठ भाग पर उसके लिए रसीद पर हस्ताक्षरित करेगा ।
किसी भी अधिवक्ता पर तामील नहीं मानी जाती है। व्यक्तिगत रूप से तामील करना आवश्यक है।
समन की तामील यदि कोई व्यक्ति नहीं लेता है तो ऐसे व्यक्ति को दंड नहीं दिया जा सकता है। कुछ मामलों मे न्यायालय की अवमानना मान कर दंड दिया जा सकता है।


धारा 63 –
 यह धारा यह बताती है की समन की तामील कैसे की जाए इसका मतलब है न्यायालय मे किसी व्यक्ति को बुलाने के लिए पत्र देना निगमित निकायों और सोसाइटियों पर समन की तामील इसमे सम्मिलित है। यह किसी निगम पर समन की तामील निगम के सचिव, स्थानीय प्रबंधक या अन्य प्रधान अधिकारी पर तामील करके की जा सकती है । यहा पर  निगम से मतलब कोई निगमित कंपनी या अन्य निगमित निकाय से  है और इसके अंतर्गत सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) के अधीन रजिस्ट्रीकृत सोसाइटी भी सम्मिलित  है ।यह भारत में निगम के मुख्य अधिकारी के पते पर चाहे रजिस्ट्रीकृत डाक द्वारा भेजे गए पत्र द्वारा की जा सकती है।  तामील तब पूरी हुई समझी जाएगी जब डाक से साधारण रूप से वह पत्र व्यक्ति तक  पहुंच जाता है जिसको समन देना है ।

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धारा 64 –
इस धारा मे यह बताया गया है की जब समन किए गए व्यक्ति न मिल सकें तब तामील कैसे की जा सकती है। जिस स्थान पर  समन किया गया व्यक्ति खोजने पर और तत्परता  बरतने पर भी न मिल सके वहां समन की तामील दो प्रतियों में से एक को उसके घर परिवार के उसके साथ रहने वाले किसी वयस्क पुरुष सदस्य के पास उस व्यक्ति के लिए छोड़कर की जा सकती है।  और यदि तामील करने वाले अधिकारी द्वारा ऐसी अपेक्षा की जाती है तोजिस व्यक्ति के पास समन ऐसे छोड़ा जाता है वह दूसरी प्रति के पृष्ठ भाग पर उसके लिए रसीद हस्ताक्षरित करेगा ।और यह सिद्ध करेगा की उस व्यक्ति के घर मे समन पहुचा दिया गया है जो उस तक समय से पहुच जाएगा ।


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