भारतीय साक्ष्य अधिनियम के अनुसार धारा 10 से 14 तक का अध्ययन

जैसा कि आप सभी को ज्ञात होगा इससे पहले की पोस्ट मे हमने भारतीय साक्ष्य अधिनियम के अनुसार धारा 1 से 9 तक का अध्ययन करा चुके है यदि आपने यह धाराये नहीं पढ़ी है तो पहले आप उनको पढ़ ली जिये जिससे आपको आगे की धाराएं समझने मे आसानी होगी।


भारतीय साक्ष्य अधिनियम के अनुसार धारा 10-

भारतीय साक्ष्य अधिनियम के अनुसार जब यह निश्चित होता है कि दो या अधिक व्यक्तियों ने अपराध या अनुयोज्य दोष करने के लिये मिलकर षड्यंत्र किया है। तो वहीं उनके सामान्य आशय  के बारे में उनमें से किसी एक व्यक्ति द्वारा उस समय के बाद जब ऐसा आशय उनमें से किसी एक ने प्रथम बार मन में धारण किया हो या फिर किसी से कहीं हो , या लिखी गई कोई बात उन व्यक्तियों में से हर एक व्यक्ति के विरुद्ध, जिनके बारे में विश्वास किया जाता हैं कि उन्होंने इस प्रकार षड्यंत्र किया है, उस दशा मे षड्यंत्र का अस्तित्व साबित करने के लिए  उसी प्रकार सुसंगत तथ्य है जिस प्रकार यह दर्शित करने के प्रयोजनार्थ कि ऐसा  व्यक्ति उसका पक्षकार करने के प्रयोजनार्थ कि ऐसा व्यक्ति उसका पक्षकार था।

यह बताया गया है की  यह विश्वास करने का युक्तियुक्त आधार है कि क भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध करने के षड्यंत्र में सम्मिलित हुआ है। ख ने उस षड्यन्त्र से प्रयोजनार्थ अमेरिका  में आयुध प्राप्त किये, ग ने वैसे ही उद्देश्य से कलकत्ते में धन संग्रह किया, घ ने कानपुर  में लोगों को उस षड्यन्त्र में सम्मिलित होने के लिये प्ररित किया, ङ ने आगरे में उस उद्देश्य के पक्षपोषण में प्रशिक्षण  किये और ग द्वारा कोलकाता में संग्रहित धन को च ने दिल्ली से छ के पास काबुल भेजा।

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इन तथ्यों और उस षड्यंत्र का अस्तित्व साबित करने के लिए भी सुसंगत है, चाहे उन्हें वह उन सभी के बारे में अनभिज्ञ रहा हो और और चाहे वे उनके षड्यंत्र से अलग हो जाने के पश्चात् घटित हुए हो।


भारतीय साक्ष्य अधिनियम के अनुसार धारा 11 –


ऐसे तथ्य जो अन्यथा सुसंगत नही होते है आते है। भारतीय साक्ष्य अधिनियम के अनुसार यह उपबंध कराता है की ये तथ्य जो सुसंगत नही माना गया है कब सुसंगत माना जाएगा ।
जिन तथ्यो के बीच मे विवाद है वे तथ्य सुसंगत तथ्य से असंगत है।

ऐसे तथ्य जो खुद और सुसंगत तथ्य जो उनके होने या न होने के संबंध मे बताया है। यह धारा आशंगत तथ्य मे साक्ष के नियम को बताता है।
प्रश्न यह है कि क्या क ने किसी अमुक दिन कलकत्ते में अपराध किया।यह तथ्य बताता है  उस दिन लाहौर में था, सुसंगत है।यह तथ्य कि जब अपराध किया गया था, उस समय के लगभग क उस स्थान से, जहां की वह  अपराध किया गया था, कितनी दूरी पर था कि क द्वारा उस अपराध का किया जाना यदि असम्भव नहीं, तो अत्यन्त अधिसम्भाव्य था, सुसंगत है।और यदि अपराध का किया जाना संभव है तो यह असंगत है।


भारतीय साक्ष्य अधिनियम के अनुसार धारा 12-


इस धारा मे यह बताया गया है की नुकसानी के लिए किए गये वादों में रकम अवधारित करने के लिए न्यायालय को समर्थन करने की प्रवृत्ति रखने वाले तथ्य सुसंगत हैं । तथा  ऐसे किए गये वादे जिनमें नुकसानी का दावा किया गया है और उसमे कोई भी ऐसा  तथ्य सुसंगत है जिससे द्वारा न्यायालय नुकसानी की रकम अवधारित करने के लिए समर्थ हो जाए ऐसा  जो अधिनिर्णीत की जानी चाहिए।

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भारतीय साक्ष्य अधिनियम के अनुसार धारा 13


इसमे यह बताया गया है की रूढ़िया कब साक्ष्य के रूप मे न्याय्यलय के द्वारा कब मान्य किया जाता है। भारत मे प्राचीन और युक्ति युक्ति पूर्ण है। जब से वह रूढ़ि आई है तब से चल रही है इसका कोई भी विकल्प नही है। रूढ़िया किसी भी कानून का उलंघन करने वाली नही होना चाहिए। और न ही मौलिक अधिकारो का हनन करती है। यह लोक नीति का विरोध करते हुए रूढ़िया नही होना चाहिए। रूढ़ि का सबूत उस व्यक्ति या समुदाय जैस्पर यह रूढ़ि लागू होती है उसको न्यायालय को बताना होगा की उस पर यह रूढ़ि लागू होता है। नकारात्मक रूढ़ि अब लगभग खत्म  सी हो गयी या कानून लाकर खत्म कर दिया गया है। न्याय्यलय यदि एक बार रूढ़ि पर फैशला दे देता है वह साक्ष्य के रूप मे लागू हो जाता है।
रूढ़ि यदि मौलिक अधिकार का हनन करने लगती है तो वह शून्य मानी जाएगी।


भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 14


इस धारा मे यह बताया गया है कि . मन या शरीर की दशा या शारीरिक  संवेदना  ना को प्रदर्शित  करने वाला तथ्य जो मन या शरीर की कोई भी दशा या आशय, ज्ञान, सद्भाव  , उपेक्षा, उतावलापन किसी विशेष के परिध वैमनस्य या सदिच्छा दिशत करने वाले अथवा शरीर की या संवेदना की दशा का अिस् तत्व दिशत करने वाले तथ् य तब सुसंगत ह,ᱹ जब कि ऐसी मन की या शरीर की या शारीरिक  संवेदन की किसी ऐसी दशा का अष्टिती मे या सुसंगत होगा

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कुछ जो इस नाते  सुसंगत है क्योकि मन की दशा के अिस् तत् व को दिशत करता है। यह दिशत होना ही चाहिए कि मन की वह दशा सुधार: नही है यह एक विशिष्ट विषय मे है।


परंतु जब अपराध के अभियुक्त का विचार के आधार पर अभियुक्त द्वारा अपराध का कभी पहले किया जाना सुसंगत हो, तब दशा मे यह सुसंगत होगा।

जैसे क कि चुराई हुई चीज जो वह जानता था कि यह चुराई हुई है उसको ले लेता है तो यह विशिस्ट चुराई हुई कि दशा मे सुसंगत है।
इसमे कई धराये अब तक बता चुके है यदि आपने यह धराये नही पढ़ी है तो पहले आप उनको पढ़ लीजिये जिससे आपको आगे की धराये समझने मे आसानी होगी।

यदि आपको इन धाराओ को समझने मे कोई परेशानी आ रही है। या फिर यदि आप इससे संबन्धित कोई सुझाव या जानकारी देना चाहते है।या आप इसमे कुछ जोड़ना चाहते है।या फिर आपको इन धाराओ मे कोई त्रुटि दिख रही है तो उसके सुधार हेतु भी आप अपने सुझाव भी भेज सकते है।

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