भारतीय संविधान के अनुसार (अनुच्छेद 73 से 78) तक का वर्णन

जैसा कि आप सभी को ज्ञात होगा इससे पहले की पोस्ट मे हमने भारतीय संविधान के अनुसार  (अनुच्छेद 72 )तक का वर्णन किया था अगर आप इन धाराओ का अध्ययन कर चुके है तो यह आप के लिए लाभकारी होगा ।  यदि आपने यह धराये नही पढ़ी है तो पहले आप उनको पढ़ लीजिये जिससे आपको आगे की धराये समझने मे आसानी होगी।


अनुच्छेद 73


इस धारा मे यह बताया गया है की इसमे संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार कैसे होगा । इसमे बताया गया है की संघ की कार्यपालिका शक्ति मे कहा गया है की जिन विषय मे शक्ति संसद को दिया गया है। अर्थात लोक सभा और राज्य सभा और राष्टपति मिलकर विधि बना सकते है । बिल लोकसभा से राज्य सभा और राज्यसभा से राष्ट पति तक जाती है और यदि राष्ट पति के द्वारा हस्ताक्षरित हो गया है तो वह माना जाएगा की यह कार्यपालिका के द्वारा मान्य है । भारत की संसद जो शक्ति विधि बनाने की है भारत सरकार उसको लागू करा सकते है।

किसी संधि या करार के अनुसार इसके आधार पर भारत सरकार द्वारा किया गया संधि और करार वहा तक कर सकती है जहा तक अधिकार दिया गया है।


संसद द्वारा बनाई गयी शक्ति का विस्तार राज्य सूची मे दी गयी है। यह समान्यता नही होता है। भारत सरकार यूनियन लिस्ट मे कानून बना सकती है परंतु यदि कोई संधि की बात आ जाए तो यह अधिकार केंद्र की होगी और कार्यपालिका की शक्ति का प्रयोग किया जा सकता है।


अनुच्छेद 74

इस अनुच्छेद मे यह बताया गया है की राष्टपति को सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद का गठन किया जाता है। इसमे अनुच्छेद 74 (1) के अनुसार राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रि-परिषद् होगी जिसका मुखिया प्रधान मंत्री होता है।  और राष्ट्रपति अपने कृत्यों का प्रयोग करने में ऐसी सलाह के अनुसार कार्य करेगा और रष्टपति उस सलाह के लिए एक बार फिर से विचार के लिए कह सकता है।
74(2) के अनुसार यदि कोई मंत्री सलाह दे रहा है तो यह जानने का अधिकार नही है की कोई मंत्री क्या सलाह दे रहा है।

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अनुच्छेद 75


अनुच्छेद 75 में मंत्रियो से सम्बंधित वेतन भत्ते आदि की जानकारी दी गयी हैं|इसमे राष्टपति बहुमत दल के नेता को प्रधानमंत्री नियुक्त करते है।
केंद्र सरकार और राज्य सरकार मिलकर प्रशासन और कार्य के अनुसार मंत्री चुनती हैं| यदि कोई मंत्री अपने कार्य को नही कर सकता तो उसके स्थान पर दूसरे मंत्री का चयन तथा  मंत्रियों की संख्या में वृद्धि करने का अधिकार मंत्रिपरिषद का होता हैं |
मंत्री परिषद देश की कार्यपालिका होती है जिसको अनेक शक्तिया प्राप्त हैं|

अनुच्छेद 75 के अंतर्गत राष्ट्रपति सर्वप्रथम मंत्री परिषद में प्रधानमंत्री की नियुक्ति करता है|
प्रधानमंत्री राष्ट्रपति की सहमति  से अपने मंत्रियो की  नियुक्त करता है |
नियुक्त मंत्री राष्ट्रपति के अनुमोदन पर पद ग्रहण करते हैं |
मंत्रिपरिषद लोकसभा के लिए उत्तरदाई होती है |
संसद के सहमती के बिना कोई 6 माह तक मंत्री रह सकता हैं |


91वे संविधान संशोधन 2003 के अनुसार- संसद के किसी भी सदन में जो दसवी अनुसूची में अयोग्य घोषित हुआ हैं मंत्री नही बन सकता हैं |
प्रधानमंत्री पद के लिए राष्ट्रपति अपने विचार रख सकता हैं तथा प्रधानमंत्री का चुनाव कर सकता हैं | यह निम्न कारणों पर कर सकता हैं |
जब लोकसभा में कोई बहुमत न हो |
जब बहुमत दल अपना एक नेता न रखे   या प्रधानमंत्री पद के दावेदार एक से अधिक हो|
राष्ट्रीय आपात की परिस्थिति में राष्ट्रपति लोकसभा को भंग कर सकता हैं तथा अपने मंत्रियो का चुनाव कर सरकार चला सकता हैं|
मंत्रिपरिषद के 3 मुख्य तत्त्व हैं|कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री एवं उपमंत्री |


मंत्रिपरिषद का कोई सामूहिक कार्य नही होता और न ही ये एक साथ बैठक में भाग लेती हैं |
मंत्रिपरिषद को सभी प्रकार की शक्तियां पप्राप्त  है | मंत्रिमंडल ,मंत्रिपरिषद की सभी शक्तियों का प्रयोग करती है और सरकारी कार्य की रूप रेखा मंत्रिमंडल ही तैयार करती हैं |

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मंत्रिपरिषद के कार्यों को  मंत्रिमंडल के द्वारा निर्धारित  किया जाता है |
मंत्रिपरिषद का  उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 74 तथा 75 में किया गया है| मंत्रिपरिषद की संख्या  प्रधान मंत्री अथवा मुख्यमंत्री पर निर्भर करता है |
मंत्रिपरिषद 60 से 70 मंत्री होते हैं |


अनुच्छेद 76 –


इसमे न्याय वादी को बताया गया है इसके अंतर्गत भारत मे महान्यायवादी है। जिसमे राष्ट्रपति जो कि उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए अर्हित पात्र  किसी भी  व्यक्ति को भारत का महान्यायवादी नियुक्त कर सकते है।


 महान्यायवादी का यह कर्तव्य होगा कि वह भारत सरकार को विधि संबंधी ऐसे विषयों पर सलाह दे सकता है।  और विधिक स्वरूप के ऐसे अन्य कर्तव्यों का पालन करना होता है। जो राष्ट्रपति उसको समय-समय पर निर्देशित करना होता है।  या सौंपे और उन कृत्यों का निर्वहन करना होता है  जो उसको इस संविधान अथवा तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि द्वारा या उसके अधीन प्रदान किए गए हों।

 इसके अंतर्गत महान्यायवादी को अपने कर्तव्यों के पालन में भारत के राज्यक्षेत्र में सभी न्यायालयों में सुनवाई करने का अधिकार होगा।
 महान्यायवादी  राष्ट्रपति केअनुसार  पद धारण करेगा और ऐसा पारिश्रमिक के रूप मे वेतन भत्ता आदि प्राप्त करेगा जो राष्ट्रपति के द्वारा अनुमोदित होगा।

अनुच्छेद 77


इसमे भारत सरकार द्वारा किये गए कार्यो का संचालन के बारे मे बताया गया है। इसके अनुसार –
भारत सरकार की समस्त कार्यपालिका कार्रवायी  राष्ट्रपति के नाम से कि जाती है।

वह कार्यवाही  जो राष्ट्रपति के नाम से किए गये होते है। निष्पादित आदेशों और अन्य लिखतों को ऐसी रीति से अधिप्रमाणित किया जा रहा होता है। जो राष्ट्रपति द्वारा बनाएं जाने वाले नियम के अनुसार विनिर्दिष्ट की जाएं और इस प्रकार अधिप्रमाणित आदेश या लिखत की विधिमान्यता इस आधार पर प्रश्नगत नहीं की जाएगी कि वह राष्ट्रपति द्वारा किया गया या निष्पादित आदेश है या फिर नहीं  है ।
 राष्ट्रपति जो कि  भारत सरकार का कार्य अधिक सुविधापूर्वक और शासक्त रूप से चलाने के लिए मंत्रियो के अनुसार उनके लिए नियम बनयेगा।

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अनुच्छेद 78


भारतीय संविधान के अनुच्छेद 78 के अनुसार, प्रधानमंत्री द्वारा निम्नलिखित कार्य अनुच्छेद 78 मे आते है जैसे कि-

प्रधानमंत्री जो कि  केंद्र की प्रशासनिक कार्यवाहियों और विधान से जुड़े प्रस्तावों से संबन्धित मंत्रिपरिषद द्वारा लिये गए निर्णयों से राष्ट्रपति को अवगत कराता है।
प्रधानमंत्री जो कि राष्ट्रपति द्वारा माँगे जाने पर केंद्र की कार्यवाहियों और विधान से जुड़े प्रस्तावों से संबंधित सूचना राष्ट्रपति को उपलब्ध करवाता है।
प्रधानमंत्री जो कि राष्ट्रपति द्वारा मांगे जाने पर किसी भी विषय विशेष को मंत्रिपरिषद के विचार हेतु प्रस्तुत करता है। जिससे संबंधित निर्णय किसी मंत्री द्वारा लिया गया हो किंतु मंत्रिपरिषद ने उस पर विचार नही किया हो।

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