भारतीय साक्ष्य अधिनियम के अनुसार धारा 96 से 101 तक का अध्ययन

evidence section 96 to 101- Hindi Law Notes

जैसा कि आप सभी को ज्ञात होगा इससे पहले की पोस्ट मे हमने भारतीय साक्ष्य अधिनियम के अनुसार धारा  95  तक का अध्ययन  किया था अगर आप इन धाराओं का अध्ययन कर चुके है।  तो यह आप के लिए लाभकारी होगा ।  यदि आपने यह धाराएं  नहीं पढ़ी है तो पहले आप उनको पढ़ लीजिये जिससे आपको आगे की धाराएं समझने मे आसानी होगी।

धारा 96

इस धारा के अनुसार  उस भाषा के लागू होने के बारे में साक्ष्य जो कई व्यक्तियों में से केवल एक को लागू हो सकती है इसके बारे मे बताया गया है। जबकि तथ्य ऐसे हैं कि प्रयुक्त किसी भाषा कई व्यक्तियों या चीजों में से किसी एक को लागू होने के लिए अभिप्रेत हो सकती थी। या फिर एक से अधिक या  अधिक को लागू होने के लिए अभिप्रेत नहीं हो सकती थी और  तब उन तथ्यों का साक्ष्य दिया जा सकेगा जो यह दर्शित करते हैं।  कि उन व्यक्तियों या चीजों में से किसको लागू होने के लिए यह आशयित थी।

उदाहरण —

1,000 रुपये में जय ने सफेद घोड़ा’ वीरू को बेचने का करार करता है। जय  के पास वीरू सफेद घोड़े है। उन तथ्यों का साक्ष्य दिया जा सकेगा जो यह दर्शित करते हों कि उनमें से कौन-सा घोड़ा अभिप्रेत था।वीरू के साथ क हैदराबात जाने के लिए फरार करता है। यह दर्शित करने वाले तथ्यों का साक्ष्य दिया जा सकेगा कि दक्षिण का हैदराबाद अभिप्रेत था।

धारा 97

इस धारा के अनुसार तथ्यों के दो संवर्गों में से जिनमें से किसी एक भी संवर्गों  को भी वह भाषा पूरी की पूरी ठीक-ठीक लागू नहीं होतीतो  उसमें से एक को भाषा के लागू होने के बारे में साक्ष्य के बारे मे बताया गया है।  इसके जो भी भाषा का प्रयोग हो रहा वह भाषा भागतः विद्यमान तथ्यों के एक संवर्ग को और भागतः विद्यमान तथ्यों के अन्य संवर्ग को लागू होती है।  किन्तु वह पूरी की पूरी दोनों में से किसी एक को भी ठीक-ठीक लागू नहीं होती तब यह दर्शित करने के लिए साक्ष्य दिया जा सकेगा कि वह दोनों में से किसको लागू होने के लिए अभिप्रेत थी।

See Also  भारतीय साक्ष्य अधिनियम के अनुसार धारा 46 से 50 तक का अध्ययन

दृष्टांत

जन  को “स्वामी की  ल्कों  में स्थित जय  के अधिभोग में भूमि” बेचने का क करार करता है। जन  के पास लको में स्थित भूमि है।  किन्तु वह लको के कब्जे में नहीं है तथा उसके पास लको  के कब्जे वाली भूमि है।  किन्तु वह लको  में स्थित नहीं है। यह दर्शित करने वाले तथ्यों का साक्ष्य दिया जा सकेगा कि उसका अभिप्राय कौन-सी भूमि बेचने का था।

धारा 98

इस धारा के अनुसार  ऐसे लिपि जो न पढ़ी जा सकने वाली लिपि हो आदि के अर्थ के बारे में साक्ष्य दिया जा सकता है या नही यह धारा यह बताती है। ऐसी लिपि का, जो पढी  जा सके या सामान्यतः समझी न जाती हो या फिर  विदेशी, अप्रचलित, पारिभाषिक, स्थानिक और प्रान्तीय शब्द-प्रयोगों का संक्षेपाक्षरों का और विशिष्ट भाव में प्रयुक्त शब्दों का अर्थ दर्शित करने के लिए साक्ष्य दिया जा सकेगा।

उदाहरण —

 एक मूर्तिकार शिव जी की  “मेरी सभी प्रतिमाएं” एक कंपनी को बेचने का करार करता है। जय  के पास प्रतिमान और प्रतिमा बनाने के औजार भी हैं। यह दर्शित कराने के लिए कि वह किसे बेचने का अभिप्राय रखता था, साक्ष्य दिया जा सकेगा।

धारा 99

इस धारा के अनुसार दस्तावेज के निबन्धनों में फेरफार करने वाले करार का साक्ष्य कौन दे सकेगा यह बताया गया है।

ऐसा कोई  व्यक्ति जो किसी दस्तावेज के पक्षकार या उनके हित प्रतिनिधि नहीं है। और  ऐसे किन्हीं भी तथ्यों का साक्ष्य दे सकेंगे।  जो की दस्तावेज के निवन्धनों में फेरफार करने वाले किसी समकालीन करार को दर्शित करने की प्रवृत्ति रखते हों।

See Also  सिविल प्रक्रिया संहिता के अनुसार सेक्शन 1 एवं 2 का विस्तृत अध्ययन

दृष्टांत

राम औरजय  लिखित संविदा करते हैं कि क को कुछ राम पास जय  बेचेगा जिसके लिए संदाय राम के पास के परिदान किए जाने पर किया जाएगा। उसी समय वे एक मौखिक करार करते हैं कि राम  को तीन मास का प्रत्यय दिया जाएगा। राम  और जय के बीच यह तथ्य दर्शित नहीं किया जा सकता था किन्तु यदि यह स्वामी  के हित पर प्रभाव डालता है, तो यह स्वामी  द्वारा दर्शित किया जा सकेगा।

धारा 100

इस धारा के अनुसार भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम के विल सम्बन्धी उपबन्धों की व्यावृत्ति को बताता है।

इस धारा के अनुसार इस अध्याय की कोई भी बात बिल का अर्थ लगाने के बारे में भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम (1865 का 10) के किन्हीं भी उपबन्धों पर प्रभाव डालने वाली नहीं समझी जाएगी।

धारा 101

इस धारा के अनुसार  सबूत का भारके बारे मे बताया गया है।  यदि  कोई न्यायालय से ये माग करता है कि वह ऐसे किसी विधिक अधिकार या दयित्व के बारे में निर्णय दे। जो की उन तथ्यों के अस्तित्व पर निर्भर है। या फिर  जिन्हें वह प्राक्ष्यात करता है। या फिर  उसे साबित करना होगा कि उन तथ्यों का अस्तित्व है।जब कोई व्यक्ति किसी तथ्य का अस्तित्व साबित करने के लिए आबद्ध है।  तब यह कहा जाता है कि उस व्यक्ति पर सबूत का भार है।

दृष्टान्त-

राम  न्यायालय से चाहता है कि वह जय  को उस अपराध के लिए दण्डित करने का निर्णय दे जिसके बारे में राम  कहता है कि वह जय  ने किया है।राम  को यह साबित करना होगा कि जय ने वह अपराध किया है।

See Also  दण्ड प्रक्रिया संहिता धारा 103 से 106 तक का विस्तृत अध्ययन

राम न्यायालय से चाहता है कि न्यायालय उन तथ्यों के कारण, जिनके सत्य होने का वह प्राक्ष्यान और जय प्रत्याख्यान करता हैं यह निर्णय दे कि वह जय  के कब्जे में की भूमि का हकदार है।राम  को उन तथ्यों का अस्तित्व साबित करना होगा।

उम्मीद करती  हूँ । आपको  यह समझ में आया होगा।  अगर आपको  ये आपको पसंद आया तो इसे social media पर  अपने friends, relative, family मे ज़रूर share करें।  जिससे सभी को  इसकी जानकारी मिल सके।और कई लोग इसका लाभ उठा सके।

यदि आप इससे संबंधित कोई सुझाव या जानकारी देना चाहते है।या आप इसमें कुछ जोड़ना चाहते है। या इससे संबन्धित कोई और सुझाव आप हमे देना चाहते है।  तो कृपया हमें कमेंट बॉक्स में जाकर अपने सुझाव दे सकते है।

कृपया हमे कमेंट बॉक्स मे जाकर अपने सुझाव दे सकते है।और अगर आपको किसी अन्य पोस्ट के बारे मे जानकारी चाहिए तो उसके लिए भी आप उससे संबंधित जानकारी भी ले सकते है।तथा लॉं  से संबंधित सुझाव के लिए आप hindilawnotes.com पर भी सुझाव ले सकते है।अगर आपको ऐसी जानकारी पढ़ना अच्छा लगता है और आप लगातार ऐसे जानकारी चाहते है तो हमारे youtube chanel को सब्सक्राइब कर लीजिए।

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published.