भारतीय दंड संहिता धारा 125 से 131 तक का विस्तृत अध्ययन

जैसा कि आप सभी को ज्ञात होगा इससे पहले की पोस्ट मे भारतीय दंड संहिता धारा 124   तक का विस्तृत अध्ययन करा चुके है यदि आपने यह धराये नही पढ़ी है तो पहले आप उनको पढ़ ली जिये जिससे आपको आगे की धराये समझने मे आसानी होगी।

धारा 125

यह धारा बताती है की यदि कोई व्यक्ति एशियाई शक्ति से युद्ध करेगा जो की भारत से मैत्री पूर्ण संबंध रखता है। इसमे शामिल होता है।
इस धारा का उद्देश्य भारत  सरकार के साथ किसी अन्य देश की सरकार के मैत्री संबंधों को और अधिक गहरा बनाने के लिए ऐसे अपराधियों को उचित कारावास का दंड देने के साथ – साथ आर्थिक दंड का भी प्रावधान करना है। यदि कोई व्यक्ति किसी ऐसे देश के खिलाफ युद्ध करने का प्रयत्न करता  या युद्ध करने का दुष्प्रेरण करता  या युद्ध कर रहा है।  जो एशिया में आता है और उसके भारत देश की सरकार के साथ मैत्री सम्बन्ध हैं। उस व्यक्ति को जिसने भारतीय दंड संहिता की धारा 125 के तहत अपराध किया है। उसे इस धारा  के अंतर्गत कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है।  जिसकी समय सीमा को 7 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। और इस अपराध में आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है।  यह भारत के पंचशील सिधान्त से संबन्धित है।

धारा 126


भारतीय दंड संहिता की इस धारा 126 के अनुसार जो भी कोई भारत सरकार से मैत्री या शांति का संबंध रखने वाली किसी शक्ति के राज्यक्षेत्र में लूटपाट करेगा या लूटपाट करने की तैयारी करेगा तो उसे एक निश्चित अवधि  के लिए कारावास की सजा जिसे सात वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।  यदि कोई व्यक्ति ऐसा हो जो एशियाई देश मे लुटपाट करता है और उस देश का भारत सरकार से मातृ संबंध हो यह इसमे शामिल है। और उसको आर्थिक दंड से दण्डित किया जाएगा और साथ ही वह दांडिक और आर्थिक दण्ड के लिए भी उत्तरदायी होगा और ऐसी लूटपाट करने के लिए उपयोग में लाई गयी  या उपयोग में लाई जाने के लिए  या ऐसी लूटपाट द्वारा अर्जित संपत्ति के अपहरण  से भी दण्डित किया जाएगा। उसे इस धारा  के अंतर्गत कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है।  जिसकी समय सीमा को 7 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। और इस अपराध में आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है।  और संपत्ति भी जब्त कर ली जाएगी।

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धारा 127


भारतीय दंड संहिता की इस धारा के अनुसार जो कोई किसी सम्पत्ति को यह जानते हुए भी  प्राप्त करेगा कि वह धारा 125 और 126 में बताए गए अपराधों में से किसी एक मे से की जाती है। ऐसे व्यक्तियों पर यह धारा लागू होती है। भारतीय दंड संहिता की धारा 125 और 126 में बताए गए युद्ध या लूटपाट द्वारा संपति प्राप्त करता है तो ऐसे व्यक्ति पर धारा 127 लागू होती है और इसके अनुसार उसे दण्डित किया जाता है। यह काफ़ी गम्भीर अपराध माना जाता है और समझौता करने योग्य नहीं है। किसी भी उच्च मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है। भारतीय दंड संहिता की धारा 127 के अनुसार यदि कोई धारा 125 और 126 में बताए गए युद्ध या लूटपाट द्वारा संपति प्राप्त करता है तो ऐसे व्यक्ति को 7 वर्ष का कारावास और आर्थिक जुर्माना लगा कर दण्डित किया जाता है।


धारा 128


भारतीय दंड संहिता की धारा 128 के अनुसार जो कोई लोक सेवक होते हुए अपनी अभिरक्षा में रखे हुए किसी राजकैदी या युद्धकैदी को या  ऐसे स्थान से जिसमें ऐसा कैदी परिरुद्ध है। स्वेच्छया निकल भागने देगा  तो उसे आजीवन कारावास या किसी एक अवधि के लिए कारावास जिसे दस वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, और साथ ही आर्थिक दण्ड से दण्डित किया जाएगा। वह लोक सेवक का स्वेच्छया राजकैदी या युद्धकैदी को निकल भागने देने पर इस दंड का प्रावधान है। इसमे आजीवन कारावास या दस वर्ष कारावास और आर्थिक दण्ड का प्रावधान है। यह एक गैर-जमानती, संज्ञेय अपराध है और सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय है।

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धारा 129


भारतीय दंड  संहिता की कई धराये अब तक बता चुके है यदि आपने यह धराये नही पढ़ी है तो पहले आप उनको पढ़ लीजिये जिससे आपको आगे की धराये समझने मे आसानी होगी।
यदि आपको इन धाराओ को समझने मे कोई परेशानी आ रही है। या फिर यदि आप इससे संबन्धित कोई सुझाव या जानकारी देना चाहते है।या आप इसमे कुछ जोड़ना चाहते है।या फिर आपको इन धाराओ मे कोई त्रुटि दिख रही है तो उसके सुधार हेतु भी आप अपने सुझाव भी भेज सकते है।


धारा 130


भारतीय दंड संहिता की धारा 130 के अनुसार जो कोई जानते हुए किसी राजकैदी या युद्धकैदी को विधिपूर्ण अभिरक्षा से निकल भागने में मदद या सहायता देगा या किसी ऐसे कैदी को छुड़ाएगा या छुड़ाने का प्रयत्न करता है  या किसी ऐसे कैदी को  जो विधिपूर्ण अभिरक्षा से निकल भागा है। संश्रय देगा या छिपाएगा या ऐसे कैदी के फिर से पकड़े जाने का प्रतिरोध करेगा या करने का प्रयत्न करेगा, वह व्यक्ति आजीवन कारावास से या दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी दंडित किया जाएगा और वह जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।
कोई राजकैदी या युद्धकैदी, जिसे भारत के अंदर या बाहर विधिपूर्ण अभिरक्षा से निकल भाग गया है।  यह तब कहा जाता है, जब वह उन सीमाओं से परे चला जाता है, जिनके भीतर उसे यथेच्छ विचरण की अनुज्ञा है ।

धारा 131

भारतीय दंड संहिता की धारा 131 के अनुसार जो कोई व्यक्ति भारत की सेना या भारत की नौ सेना या फिर किसी आफिसर, सैनिक के द्वारा विद्रोह किए जाने का दुष्प्रेरण करेगा, या किसी ऐसे आफिसर, सैनिक नौ सेना को उसकी राजनिष्ठा या उसके कर्तव्य से विचलित करने का प्रयत्न करेगा, वह दंड से याकारावास या  दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा

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