भारतीय दंड संहिता धारा 139 से 145 तक का विस्तृत अध्ययन

जैसा कि आप सभी को ज्ञात होगा इससे पहले की पोस्ट मे भारतीय दंड संहिता तक का विस्तृत अध्ययन करा चुके है यदि आपने यह धराये नही पढ़ी है तो पहले आप उनको पढ़ लीजिये जिससे आपको आगे की धाराएं समझने मे आसानी होगी।

धारा 139

इस धारा के अनुसार कोई भी व्यक्ति जो आर्मी एक्ट, सेना अधिनियम, 1950, (1950 का 46), नेवल डिसिप्लिन एक्ट, इंडियन नेवी (अनुशासन) अधिनियम, 1934 (1934 का 34), एअर फोर्स एक्ट या वायुसेना
अधिनियम, 1950 (1950 का 45) के अध्यधीन है। इस अध्याय में परिभाषित अपराधों में से किसी के लिए इस संहिता के अधीन दंडनीय नहीं है।कुछ अधिनियम के अधीन व्यक्ति के अंतर्गत आते है। उस पर यह धारा लागू नही होता है।

धारा 140

इस धारा के अनुसार कोई व्यक्ति भारत सरकार की सेना, नौसेना या वायु सेना का सैनिक, नौसैनिक या वायु सैनिक न होते हुए, इस आशय से कि यह विश्वास किया जाए कि वह ऐसा सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक है। ऐसी कोई पोशाक पहनेगा या ऐसा प्रतीक चिह्न धारण करेगा जो ऐसे सैनिक, नौसैनिक या वायु सेना द्वारा उपयोग में लाई जाने वाली पोशाक या प्रतीक चिह्न से सदृश हो, तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा जिसे तीन महीने तक बढ़ाया जा सकता है।और उसको पाँच सौ रुपए तक का आर्थिक दंड या दोनों से दण्डित किया जाएगा।

धारा 141

इस धारा के अनुसार भारतीय दंड संहिता की धारा 141 के अनुसार पांच या अधिक व्यक्तियों का जनसमूह विधिविरुद्ध जनसमूह कहा जाता है। यदि उन व्यक्तियों का जिनसे वह जनसमूह स्थापित हुआ है। जिसका उद्देश्य निम्न रहा हो।

जो केंद्रीय सरकार को या फिर किसी राज्य सरकार को, या संसद को, या किसी राज्य के विधान-मंडल को, या किसी लोक सेवक को, जब कि वह ऐसे लोक सेवक की विधिपूर्ण शक्ति का प्रयोग कर रहा हो। जो आपराधिक बल या आपराधिक बल के प्रदर्शन द्वारा अंकित करना हो।

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जो किसी क़ानून के, या किसी कानूनी प्रक्रिया के, निष्पादन का प्रतिरोध करता हो।
जिसमे किसी कुचेष्टा या आपराधिक अतिचार या अन्य अपराध का करना

किसी व्यक्ति पर आपराधिक बल या आपराधिक बल के प्रदर्शन द्वारा, किसी संपत्ति का कब्जा लेना या प्राप्त करना या किसी व्यक्ति को किसी मार्ग या जल के अधिकार के उपभोग से, या अन्य निराकार अधिकार जिसका उसे अधिकार हो या जिसका वह उपभोग करता हो, से वंचित करना या किसी अधिकारी या अनुमित अधिकार को लागू करना आदि आता है।

जो आपराधिक बल या आपराधिक बल के प्रदर्शन द्वारा किसी व्यक्ति को वह करने के लिए, जिसके लिए वह कानूनी रूप से आबद्ध न हो या किसी कार्य का लोप करने के लिए जिसे करने का वह क़ानूनी रूप से हकदार हो। उसको विवश करना आता है।

धारा 142

भारतीय दंड संहिता की धारा 142 के अनुसार जो कोई उन तथ्यों से परिचित होते हुए भी जो किसी जनसमूह को विधिविरुद्ध जनसमूह बनाते हैं। और उस जनसमूह में साशय सम्मिलित होता है या उसमें बना रहता है। तो उसे विधिविरुद्ध जनसमूह का सदस्य कहा जाता है।

धारा 143

भारतीय दंड संहिता की धारा 143 के अनुसार यदि जो भी कोई गैरकानूनी जनसमूह का सदस्य होता है। तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा जिसे छह महीने तक बढ़ाया जा सकता है। या आर्थिक दंड या दोनों से दण्डित किया जाएगा।

इसके निम्न तत्व है।
वह समूह गैरकानूनी हो और जनसमूह का सदस्य होना आवश्यक होता है।
इसमे सजा के रूप मे छह महीने कारावास या आर्थिक दंड या दोनों दिया जा सकता है।
यह एक जमानती संज्ञेय अपराध है। और यह किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौता करने योग्य होता है।जिसका निपटारा मजिस्ट्रेट के द्वारा किया जा सकता है।

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धारा 144

इस धारा के अनुसार भारतीय दंड संहिता धारा 144 जो की भारतीय दंड संहिता की धारा 143 का उग्र रूप है। इस खंड में स्पष्ट रूप से बल प्रयोग करने के इरादे से हथियार या घातक हथियार जैसे पिस्तौल, बंदूकें, भाले, तलवारें से लेकर खंजर, किरपान, और कांटा आदि से सार्वजनिक शांति को भंग करने वाले व्यक्ति के लिए सजा का प्रावधान है।

यह धारा किसी ऐसे व्यक्ति के लिए सजा का प्रावधान करती है। जो व्यक्ति किसी गैरकानूनी असेंबली में घातक हथियार से लैस हो। या फिर जो कोई भी गैरकानूनी असेंबली का सदस्य है। और घातक हथियार से लैस है। या ऐसा कुछ जो अपराध के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। और जिससे मौत की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे व्यक्ति को दंड देने का प्रावधान है जो दो साल तक सजा या जुर्माना या दोनों हो सकता है। इसके लिए भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ख) में भी यह निर्धारित किया गया है। कि सभी नागरिकों को शांति पूर्वक इकट्ठा होने का अधिकार है।

भारत के नागरिकों को अपनी इच्छा से सार्वजनिक सभा या यहां तक कि जुलूसों को इकट्ठा करने और व्यवस्थित करने की स्वतंत्रता दी गई है। लेकिन इकट्ठा करने का यह अधिकार भारत की संप्रभुता और अखंडता के हित में राज्य द्वारा उचित प्रतिबंध के अधीन है। इसलिए, एक उपयुक्त प्राधिकारी सार्वजनिक बैठक के आयोजन पर रोक लगा सकता है। अगर न्यायालय को लगता है कि ऐसे मामले में वे इस विचार के होते हैं कि सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए ऐसा करना आवश्यक है।

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धारा 145

इस धारा के अनुसार किसी व्यक्ति को किसी ऐसी गैरकानूनी जनसभा में शामिल होने के लिए अपराधी घोषित कर देती है। जिसे किसी आदेश द्वारा खत्म कर देने का आदेश दिया जा चुका होता है।या फिर यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर ऐसा अपराध करता है। तो ऐसे व्यक्ति के लिए कड़े दंड का प्रावधान किया गया है।इसके अनुसार जो भी कोई किसी विधिविरुद्ध जनसमूह जिसे बिखर जाने का समादेश विधि द्वारा निर्धारित ढंग से दिया गया है, में जानबूझकर सम्मिलित हो रहा हो या बना रहे तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा जिसे दो वर्ष तक सजा दिया जा सकता है या आर्थिक दण्ड दिया जा सकता है। या दोनों से दण्डित किया जाएगा।

यदि आपको इन धारा को समझने मे कोई परेशानी आ रही है। या फिर यदि आप इससे संबन्धित कोई सुझाव या जानकारी देना चाहते है।या आप इसमे कुछ जोड़ना चाहते है।या फिर आपको इन धारा मे कोई त्रुटि दिख रही है तो उसके सुधार हेतु भी आप अपने सुझाव भी भेज सकते है।

हमारी Hindi law notes classes के नाम से video भी अप लोड हो चुकी है तो आप वहा से भी जानकारी ले सकते है। कृपया हमे कमेंट बॉक्स मे जाकर अपने सुझाव दे सकते है।

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