भारतीय दंड संहिता धारा 173 से 178 तक का विस्तृत अध्ययन

जैसा कि आप सभी को ज्ञात होगा इससे पहले की पोस्ट मे भारतीय दंड संहिता तक का विस्तृत अध्ययन करा चुके है यदि आपने यह धाराये नही पढ़ी है तो पहले आप उनको पढ़ लीजिये जिससे आपको आगे की धाराएं समझने मे आसानी होगी।

धारा 173

इस धारा मे बताया गया है की समन की तामील न लेने पर क्या प्रावधान हो सकता है। और उसका निवारण खो सकता है। जब कोई व्यक्ति समान लेने के लिए नही मिलता है तो तामील उसके घर पर चिपका दिया जाता है। यदि कोई व्यक्ति सूचना नही चिपकाने देना चाहता या फाड़ देता है ।

यदि लोकसेवक होने के कारण किसी कर्मचारी कोई समान सूचना आदेश आदि निकलता है। और वह उसके लिए वैध है। ऐसे सूचना निकलता है और यह अपने या किसी और पर होने का आशय निकलता है और उसका निवारण करता है। अथवा कोई सूचना आदेश जिस स्थानपर चिपकाना है उसको नही चिपकाने नही देता तो उसको 1 माह तक की सजा और 500 रुपये तक जुर्माना दोनों हो सकता है।

यदि न्याय्यलय के द्वारा जारी कोई समन सूचना आदेश उद्घोसना आदि निकलता है और उससे बचने के लिए यदि ई उसको चिपकाने नही देता है तो उसको 6 माह तक की सजा और 1000 रुपये तक जुर्माना दोनों हो सकता है।

धारा 174

इस धारा मे बताया गया है की लोकसेवक का आदेश न मान कर गायब रहना
जब कोई व्यक्ति किसी लोक सेवक द्वारा निकाले गए उस समन, सूचना, आदेश या उद्घोषणा के पालन करने मे जिसे ऐसे लोक सेवक के द्वारा निकालने के लिए वह वैध रूप से सक्षम हो किसी निश्चित स्थान और समय पर स्वयं या अभिकर्ता द्वारा हाजिर होने के लिए वैध रूप से प्रस्तुत होने के लिए

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उस स्थान या समय पर हाजिर होने का साशय लोप करेगा या उस स्थान से जहां हाजिर होने के लिए वह कहा गया है। , उस समय से पूर्व चला जाएगा जिस समय चला जाना उसके लिए विधिपूर्ण होता तो उसको 1 माह तक की सजा और 500 रुपये तक जुर्माना दोनों हो सकता है।

अथवा. यदि समन, सूचना, आदेश या उदघोषणा किसी न्यायालय में स्वयं या किसी अभिकर्ता द्वारा हाजिर होने के लिए है । तो उसको 6 माह तक की सजा और 1000 रुपये तक जुर्माना दोनों हो सकता है।

उदाहरण

ज कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा निकाले गए श्याम के पालन में उस न्यायालय के समक्ष उपसंजात होने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए, उपसंजात होने में साशय लोप करता है। ज ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।

धारा 175

इस धारा मे बताया गया है की दस्तावेज़ य एलेक्ट्रोनिक अभिलेख को लोकसेवक को पेश करना
यदि कोई व्यक्ति जिसका यह दायित्व है की वह लोक सेवक के सामने किसी दस्तावेज़ को प्रस्तुत करे और वह नही करता है तो इस धारा मे आता है।

जो कोई ऐसे लोक सेवक के नाते किसी 1[दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख] को पेश करने या परिदत्त करने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए, उसको इस प्रकार पेश करने या परिदत्त करने का साशय लोप करेगा, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों हो सकता है ।

और यदि वह न्याय्यलय के सामने किसी दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख को पेश करने या परिदत्त करने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए, उसको इस प्रकार पेश करने या परिदत्त करने का साशय लोप करेगा, वह 6 माह कठिन कारावास से या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा या दोनों हो सकता है ।

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धारा 176

इस धारा मे यह बताया गया है की सूचना देने के लिए वैध रूप से . सूचना या इत्तिला देने के लिए कानूनी तौर पर आबद्ध व्यक्ति द्वारा लोक सेवक को सूचना या इत्तिला देने का साशय लोप।

जो भी कोई किसी लोक सेवक को जो ऐसे लोक सेवक के नाते किसी विषय पर कोई सूचना देने या इत्तिला देने के लिए कानूनी तौर पर आबद्ध होते हुए विधि द्वारा अपेक्षित प्रकार से और समय पर ऐसी सूचना या इत्तिला देने का साशय लोप करेगा तो उसको 1 माह तक की सजा और 500 रुपये तक जुर्माना या दोनों हो सकता है।

अथवा, यदि दी जाने वाली अपेक्षित सूचना या इत्तिला किसी अपराध के किए जाने के विषय में हो, या किसी अपराध के किए जाने का निवारण करने के प्रयोजन से या किसी अपराधी को पकड़ने के लिए अपेक्षित हो उसको 6 माह तक की सजा और 1000 रुपये तक जुर्माना या दोनों हो सकता है।

अथवा, यदि दी जाने के लिए अपेक्षित सूचना या इत्तिला आपराधिक दण्ड संहिता, 1898 (1898 का 5) की धारा 565 की उपधारा (1) के अधीन दिए गए आदेश द्वारा अपेक्षित है, तो उसको छह महीने तक कारावास दिया जा सकता है। या एक हजार रुपए तक का आर्थिक दण्ड या दोनों से दण्डित किया जाएगा।

धारा 177

इस धारा मे बताया गया है की यदि कोई झूठी सूचना देता है तो क्या प्रावधान होगा। यदि कोई व्यक्ति किसी लोक सेवक को ऐसे लोक सेवक के नाते किसी विषय पर सूचना देने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए उस विषय पर सच्ची सूचना के रूप में ऐसी सूचना देगा जिसका असत्य होना वह जानता है या जिसके निराधार होने का विश्वास करने का कारण उसके पास है, तो उसको 6 माह तक का कारावास या एक हजार रुपए तक का आर्थिक दण्ड से या दोनों से दण्डित किया जाएगा।

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अथवा, यदि वह सूचना, जिसे देने के लिए वह वैध रूप से आबद्ध हो कोई अपराध किए जाने के विषय में हो, या किसी अपराध के किए जाने का निवारण करने के प्रयोजन से, या किसी अपराधी को पकड़ने के लिए अपेक्षित हो, तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास से जिसे दो वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, या आर्थिक दण्ड से या दोनों से दण्डित किया जाएगा। यदि कोई जानबूझ कर एक लोक सेवक तो झूठी सूचना देनाहै तो उसको सजा के तौर पर छह महीने सादा कारावास या आर्थिक दण्ड या दोनों दिया जा सकता है। यह एक जमानती, गैर-संज्ञेय अपराध है और किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है। यदि सूचना कोई अपराध किए जाने आदि के विषय में हो।तो उसको सजा के तौर पर दो वर्ष कारावास या आर्थिक दण्ड या दोनों दिया जा सकता

धारा 178

इस धारा मे बताया गया है की जब कोई सत्य कथन करने के लिए शपद द्वारा अपने आप को आबद्ध करने से इंकार कर देता है जबकि उससे अपने को इस प्रकार आबद्ध करने की अपेक्षा ऐसे लोक सेवक द्वारा की जाए जो यह अपेक्षा करने के लिए वैध रूप से सक्षम हो कि वह व्यक्ति इस प्रकार अपने को आबद्ध करे वह सादा कारावास से जो 6 माह तक की हो सकती है और 1000 रुपये जुर्माना का हकदार हो सकता है या उसको दोनों से दंडित किया जा सकता है।

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