तिरंगा फहराने के क्या है भारतीय कानून में नियम

law related to tri colour in India- Hindi Law Notes

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि इस साल भी 15 अगस्त के मौके पर पूरा देश आजादी 75 वीं वर्षगांठ मना रहा है ऐसे मौके पर सरकार जहां पर एक तरफ से आजादी की अमृत महोत्सव मनाए रही है वहीं पर दूसरी तरफ इस को खास बनाने के लिए प्रधानमंत्री खुद देशवासियों से अपील कर रहे हैं यहां तक कि पीएम ने हर घर में तिरंगा अभियान शुरू कर दी है लेकिन इस अभियान को सही और सफल बनाने के लिए आपको यह जानना बहुत ही आवश्यक है कि झंडा फहराने को लेकर के भारतीय कानून में क्या नियम हैं और क्या हम नियम अनुसार ही झंडा फहराते हैं!

भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को फहराने को लेकर के कुछ अपने नियम और कानून बनाए गए हैं इसके अलावा झंडा फहराने के बाद तिरंगे को पूरे सम्मान के साथ फोल्ड करने और रखने के लिए भी नियम बनाए गए हैं हालांकि हर किसी के लिए राष्ट्रीय ध्वज से जुड़े इन नियमों का पालन करना जरूरी होता है अगर आप भी इस आजादी के अमृत महोत्सव में हर घर तिरंगा अभियान के तहत झंडा फहरा रहे हैं आपको भी इन नियमों के बारे में पता होना चाहिए!

अक्सर यह देखा गया है कि स्कूल कॉलेज में बच्चे और लोग घरों में झंडा तो फहराया देते हैं परंतु जैसे ही 15 अगस्त 26 जनवरी बिकता है वे झंडे को कभी जमीन के नीचे आपको झंडे पड़े मिलेंगे तो सभी बाहर सड़क पर झंडे दिखाई देंगे भारतीय संविधान में बताए गए मूल कर्तव्य में से भारतीय ध्वज का सम्मान भी शामिल है!

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अनुच्छेद 51 के अनुसार भारत में प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह संविधान का पालन करें और उसके आदर्श एवं संस्थानों राष्ट्रीय ध्वज राष्ट्रगान का सम्मान करें इसके अलावा हाल ही में भारत सरकार ने यह भी घोषणा की है कि राष्ट्रीय ध्वज जहां खुले में प्रदर्शित किया जा रहा है या फिर किसी नागरिक के घर प्रदर्शित किया जा रहा है तो इसे दिन-रात फहराया जा सकता है हालांकि सरकार ने कुछ नियमों में संशोधन भी किया है जो कि पहले मशीन से बने और पॉलिस्टर के झंडे के उपयोग की अनुमति देने के लिए ध्वज संहिता में संशोधन किया गया है!

गृह मंत्रालय ने भारतीय ध्वज संहिता 2002 में संशोधन कर यह नियम बनाया है ताकि रात में भी राष्ट्रीय ध्वज को फहराया जा सके !

भारतीय ध्वज संहिता 2002 नियम क्या है!

भारतीय ध्वज संगीता 2002 के नियम जो कि तिरंगे से जुड़ा हुआ नियम और कानून है इस कानून को बनाने से पहले तिरंगा केवल सरकारी बिल्डिंग पर कुछ खास लोगों के द्वारा ही ठहराया जा सकता था परंतु इस नियम को लागू होने के साथ ही इसे केवल सूर्योदय से लेकर के सूर्यास्त तक ही कराया जा सकता था परंतु अब तिरंगे को रात में भी कराया जा सकता है इसके साथ ही साथ किसी भी दिन झंडे को हराया जा सकता है इससे पहले राष्ट्रीय उत्सव 15 अगस्त 26 जनवरी झंडा फहराने को मंजूरी दी गई थी

तिरंगे को किसी भी तरह की सजावट के लिए इस्तेमाल में नहीं लाया जा सकता है इसके अलावा इसका प्रयोग किसी भी ड्रेस या यूनिफार्म के लिए नहीं होना चाहिए तिरंगे को किसी भी सीट की तरफ नहीं ठहराया जा सकता है और किसी और झंडे को तिरंगे से ऊंचा फहराने की मनाई होती है!

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जब तक सरकारी आदेश ना हो तब तक किसी भी तिरंगे को किसी भी हाल में झुका हुआ नहीं ठहराया जा सकता है इसके अलावा किसी मंच पर तिरंगा फहराते समय जय बोलने वालों के मुंह छोटा ओं की तरफ हो जब तिरंगा हमेशा उसके दाहिनी तरफ ही होना चाहिए झंडे को कभी भी पानी में नहीं धोया जा सकता है और इसको कभी भी फिजिकल डैमेज नहीं पहुंचाया जा सकता है अगर झंडा फट जाए या फिर मेला हो जाए तो उसे कहीं एकांत में मर्यादित तरीके से उसका डिस्पोजल करना चाहिए!

झंडे का आकार भी ध्यान में रखने की आवश्यकता होती है झंडा फहराते समय इसके आकार का भी खास ध्यान रखना जरूरी होता है हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि जो भी झंडा हम सर आ रहे हैं उसका आकार 3 अनुपात 2 का ही होना चाहिए इसके साथ ही साथ केसरिया रंग को नीचे की तरफ करके झंडे को लगाया या फहराया नहीं जा सकता है!

तिरंगे को लपेटने को लेकर के भी नियम बनाए गए हैं इसके अनुसार झंडे को फहराने के साथ ही साथ उसे फोन करने को लेकर कुछ नियम है झंडे को फोल्ड करते समय उसे पटिया की अवस्था में रखना चाहिए और फिर पहले इस तरह मैंने की केसरिया और हरे पट्टी के बीच जो सफेद पट्टी हो उसके बाद उसको खोल को इस तरह करें कि दोनों पार्टियों के बीच में केवल अशोक चक्र ही दिखाई दे इसके बाद झंडे को दोनों हथेलियों को रखते हुए सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए!

अगर आप इन नियमों का पालन नहीं करते हैं या फिर भारतीय ध्वज से जुड़े इन नियमों का पालन नहीं करने पर इसके लिए सजा का प्रावधान भी है राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 राष्ट्रीय ध्वज संविधान राष्ट्रगान और भारतीय मानचित्र सहित देश के सभी जो भी राष्ट्रीय प्रतीक है उसके अपमान को प्रतिबंधित करता है उनके अनुसार यदि कोई भी व्यक्ति अधिनियम के तहत या फिर से जुड़े हुए अपराधों के अनुसार दोषी माना जाता है तो वह 6 वर्ष की अवधि के लिए संसद एवं राज्य विधान मंडल के चुनाव लड़ने हेतु अयोग्य हो जाएगा!

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