गिरफ्तारी की प्रक्रिया और उससे बचाव सम्बन्धित जानकारी

गिरफ्तारी की प्रक्रिया पुलिस द्वारा छू कर या उसको साथ ले जाकर की जा सकती हैं यदि वह खुद उसके साथ नहीं जा रहा हैं तो पुलिस उसको जबरजस्ती ले जा सकता हैं । अगर वह बाल का प्रयोग करता हैं तो पुलिस भी उसके साथ बल का प्रयोग कर सकती हैं। जिसको गिरफ्तार किया जा रहा अगर वह महिला हैं तो उसके लिए महिला पुलिस ही आवश्यक हैं। किसी व्याक्ति को गिरफ्तार करने के लिए बल का प्रयोग नहीं करना चाहिए । जिसको गिरफ्तार करना हैं उसके ऊपर किसी भी तरह से गोली नहीं चलाई जा सकती। किसी महिला को रात के अंधेरे में गिरफ्तार नहीं किया जा सकता जरूरी हो तो मजिस्ट्रेट के ऑर्डर पर 2 कॉन्स्टेबल के साथ महिला को गिरफ्तार कर सकता बिना वारंट पुलिस अधिकारी जरूरत होने पर किसी के घर में उसकी परमिशन से तलाशी कर सकता हैं।

वह व्यक्ति जो तलाशी के लिए मना कर रहा हैं तो वह जबरजस्ती तलाशी कर सकता हैं । यह महिला पर लागू नहीं होता। पुलिस अपराधी का पीछा करते हुए दूसरे पुलिस के छेत्रा अधिकार में भी जा सकता हैं । गिरफ्तार व्यक्ति को जहा रखा गया हैं उसको सूचना उसके परिवार वाले व्यक्ति को दिया जायेगा। और उसकी रिपोर्ट बनायेगा। मजिस्ट्रेट के पास पेश करते समय मजिस्ट्रेट को भी यह चेक कर लेना होगा। गिरफ्तार व्याक्ति की तलाशी के समय मिलने वाले चीजों की रशीद बनायेगा और उसके सामान को सुरक्षित रखेगा।

धारा 52 के अनुसार यदि अपराधिक चीज जैसे चाकू आदि मिलता हैं तो उसको भी सुरक्षित रखा जायेगा। मेडिकल जांच के लिए पुलिस अधीक्षक मांग कर सकता हैं । मेडिकल जांच धारा 53 में की जाति हैं । मेडिकल जांच महिला का महिला चिकत्सक करेगी। रेप आदि केस में यदि अभियुक्त का मेडिकल जांच कराने हैं और वह राजकीय चिकित्सा व्यवस्था नहीं हैं तो मेडिकल हेल्थ सेंटर से करा सकते हैं। धारा 54 के अनुसार गिरफ्तार व्याक्ति का मेडिकल करना आवश्यक हैं और इसको रिपोर्ट उसके परिवार वाले को दिया जायेगा। यदि किसी की आइडेंटिफिकेशन करानी हैं तो मजिस्ट्रेट उसका ऑर्डर देगा ।

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यदि किसी गिरफ्तार व्याक्ति की मानसिक स्थिति ठीक नहीं हैं तो मजिस्ट्रेट के सामने उसका मेडिकल होगा और इसकी रिपोर्टिंग की जायेगी । यदि कोई कॉन्स्टेबल किसी को गिरफ्तार कर रहा यौन तो उसको जल्द से जल्द थाना ले जाना होगा ।कोई भी व्यक्ति को 24 घंटे से ज्यादा नहीं रखा जा सकता । मजिस्ट्रेट के अनुमति के बिना किसी को 24 घंटे के बाद नहीं रख सकते ।

पुलिस अधिकारी यदि किसी को गिरफ्तार कर लिया हैं तो उसको छोड़ने के लिए या तो बंद पत्र लिया जायेगा या मजिस्ट्रेट अनुमति पत्र देना होगा । यदि कोई व्यक्ति भाग जाता हैं तो पुलिस उसको पकड़ सकती हैं । किसी व्याक्ति को विधि द्वारा ही गिरफ्तार किया जायेगा वरना नहीं किया जा सकता हैं ।अब हम आपको बताने जा रहे हैं कि व्यक्ति को गिरफ्तारी से कैसे बचा जा सकता हैं ।

अनुच्छेद 22 के अनुसार निरंकुश गिरफ्तारी नहीं होना चाहिए । जैसे पहले होता था बिना वकील बिना दलील आप नहीं रह सकते हैं आज हम इसके बिना आर्टिकल 20 और 21 को स्वतंत्रता से सम्बन्धित हैं । रिट के अनुसार पुलिस किसी व्यक्ति को गिरफ्तारी करके ले जाती हैं कोर्ट देखती हैं कि उसका क्या करना हैं सबूत के अनुसार उसको सजा या उसको छोड़ देती हैं । 2 प्रकार से होता हैं जनरल और प्रोविजनल अरेस्ट 2 प्रकार से हैं दंडीय विधि से अरेस्ट और निरोधक अरेस्ट किसी भी व्यक्ति को जब गिरफ्तार किया जायेगा तो उसको उसका कारण जाने का अधिकार होता है। जब वह अपने को डिफेंस करायेगा तो वकील से सलाह ले सकता हैं ।

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गिरफ्तार के 24 घंटे के अंदर मजिस्ट्रेट के पास ले जाएगा जिसके ट्रैवलिंग टाइम नहीं गिनी जाती हैं ।यह जनरल पीनल के विरुद्ध हैं ।2 लोगों को यह अधिकार नहीं मिलेगा । कोई व्यक्ति यदि शत्रु देश का हैं । आदि किसी व्यक्ति को निवारक निरोध के तहत गिरफ्तार किया गया हैं । निवारक निरोध का मतलब घटना के पहले ही व्यक्ति को गिरफ्तार करना जिससे वह अपराध n कर सकते उसके पास यह सबूत होना चाहिए यह सबूत पुर्ण नहीं हैं पर संभावना हैं । घटना घटित होने से पहले ही रोकना प्रिवेंटिव अरेस्ट हैं । लेजिस्लेशन ने प्रिवेंटिव एक्ट बनाया और समय समय पर इसका संशोधन किया ।

3 महीने से ज्यादा किसी को कस्टडी में रखा गया हैं तो कॉमेंट के पास उसको बेजना होगा और व्यक्ति को गिरफ्तार करने का कारण बनायेगा। कोई भी स्टेट अगर कोई नियम बनाती हैं तो वह आर्टिकल 22 का उलंघन नहीं कर सकती यदि करती हैं तो यह शून्य होगी ।आपने देखा कि अनुच्छेद 22 राज्य के विरुद्ध व्यक्ति को प्रोटेक्ट करता हैं । हम अपराधी को संरक्षण नहीं देते परन्तु सबको एक अधिकार मिलता हैं यही अधिकार इसमें लिखित हैं ।

अगर आपको कोई अरेस्ट कर रही हैं या कैद कर रहा तो क्या करे यह जानना आवश्यक हैं गिरफ्तारी और कैद में अंतर हैं अगर सरकार को यह लगता हैं कि यह व्यक्ति जुर्म कर सकता हैं या अराजकता फैला सकते हैं तो उससे पहले ही आपको अरेस्ट कर लिया जाए ।यह कैद के अंतर्गत आता हैं और इसमें दोनो शामिल हैं । इसमें कुछ दंडात्मक तथा कुछ प्रिवेंटिव हैं । यह हमने आपको दोनो के बारे में बताया हैं अगर आपको इसमें कोई सन्देह हैं या आपका कोई क्वेश्चन हैं तो आप जरूर पूंछे आप है आप हमें कमेंट कर सकते हैं ।आप और जानकारी हमारे आने वाले लेखों के जरिये प्राप्त करते रहेंगे।

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