FIR क्या होता है यह कैसे फाइल कराते हैं और इसको कैसे रद्द किया जा सकता है ?

FIR क्या होता है यह कैसे फाइल कराते हैं और इसको कैसे रद्द किया जा सकता है ? FIR का फुल फॉर्म first information report होता है। यह किसी भी केस की प्राथमिक प्रक्रिया होती हैं। भारत में कोई भी प्राथमिक अपराध दर्ज करा सकता है। एफआईआर दर्ज कराने का यह मतलब जरूरी नहीं की उसने घटना देखी हो। घटना स्थल पर अगर आप एफआईआर की कॉपी नहीं ली है तो थाना आपको पोस्ट द्वारा भेजेंगी। एफआईआर नहीं लिखने पर आप magistrate के पास जा सकते हैं।

एफआईआर की कॉपी शिकायत कर्ता को दी जाती हैं ।उसमे पुलिस की मोहर लगी होती है । अगर शिकायत में कोई अपराध संघेय हैं तो उसको निश्चित समय में एफआईआर दर्ज़ कर ली जाती हैं। एफआईआर दर्ज करते समय पुलिस अधिकारी अपनी कोई बात एफआईआर में नहीं दर्ज कर सकता हैं। कोई भी अधिकारी एफआईआर में फेर बदल करने का दबाव नहीं डाल सकता है । एफआईआर कराने वाले व्यक्ति को सम्पूर्ण जानकारी ही हो ऐसा जरूरी नहीं है । यदि शिकायत कर्ता को घटना स्थल का अनुमान नहीं है तो पुलिस अधिकारी पूंछ ताछ कर सकते हैं ।

एफआईआर कोई भी व्यक्ति किसी भी व्यक्ति के लिए करा सकता है । पुलिस कभी कभी घटना होने पर जांच में लग जाती हैं पर एफआईआर नहीं लिखती हैं ऐसे केस में पहले एफआईआर लिख कर फिर जांच सुरू करना चाहिए। एफआईआर लिखने के बाद उसपर कार्यवाही की सभी डिटेल पोस्ट द्वारा शिकायत कर्ता को दी जाती है। एफआईआर एक से अधिक व्यक्ति के खिलाफ भी लिखा सकते हैं। एफआईआर लिखने के २४ घंटे के अन्दर कार्यवाही होना आवश्यक होता है ।

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एफआईआर लिखने के बाद पुलिस घटनास्थल पर जाकर उसका पता लगाती हैं। इसमें शिकायतकर्ता का पूरा नाम पता एड्रेस और शिकायत की तिथि तथा उसके सिग्नेचर आदि होना चाहिए। यह भारतीय दण्ड संहिता के धारा 154 में वर्णित हैं। यदि अपराध संघीय है तो पुलिस रिपोर्ट को लिखती हैं और जिसके साथ अपराध हुआ था या शिकायत कर्ता को पढ़कर सुनाता हैं ।और उसके हस्ताक्षर कराते हैं । तथा उसको पूरी जानकारी देते हैं। कोई सामान चोरी हो जाती हैं तो उसके लिए भी एफआईआर बहुत जरूरी होता है । क्योंकि बिना एफआईआर चोरी वस्तु का दुरुपयोग हो सकता है और कोई संघेय अपराध होने पर आप पकड़े जा सकते हैं। एफआईआर zero एफआईआर भी हो सकती है जो अपराध अपने jurisdiction में ना होकर दूसरे स्थान पर हो वह zero एफआईआर होती है ।

वैसे तो कोई व्यक्ति अपने ही थाना में एफआईआर दर्ज करा सकता है पर यदि कोई संघेय अपराध से जुड़ा शिकायत हैं तो उसको कहीं भी दर्ज करवाया जा सकता है ।उसके लिए पुलिस मना नहीं कर सकती हैं । और पुलिस को ना केवल एफआईआर दर्ज़ करना होगा बल्कि उसका investigation भी करना होगा । जो पुलिस स्टेशन नजदीक होगा व्हा की पुलिस जा कर घटना का पता करेगी। और उसपर कार्यवाही करेगी।मामला अगर संगेय अपराध का हैं तो देश के किसी भी कोने से केस दर्ज हो सकता है ।

अगर कोई शिकायतकर्ता देरी करता हैं एफआईआर दर्ज कराने में तो कोर्ट उससे इसका कारण पूछ सकती हैं ।क्योंकि इससे केस उल्टा हो सकता है। अब आप घर बैठे भी ऑनलाइन एफआईआर दर्ज करा सकते हैं उसके लिए अब आपको पुलिस स्टेशन जाने की जरूरत नहीं है। अब एफआईआर की पूरी जानकारी आपको ऑनलाइन मिल जाएगी हालांकि अभी सभी राज्य में यह लागू नहीं हुआ है पर ज्यदतर इससे जुड़ गए हैं । अगर कोई पुलिस एफआईआर लिखने में आनाकानी करती हैं य एफआईआर लिखने के लिए रिश्वत मांगती हैं तो आप उसकी शिकायत कर सकते हैं उसके खिलाफ कार्यवाही होगी।

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अगर कोई व्यक्ति किसी के प्रति झूठी एफआईआर दर्ज करा देता है तो उसकी पुष्टि होने पर शिकायतकर्ता को सजा हो सकती है तथा व्यक्ति को यह साबित करना होगा कि एफआईआर झूठी है। Zero एफआईआर का कॉन्सेप्ट निर्भया कांड के बाद लागू हुआ । कुछ अमेंडमेंट के बाद नया कानून बना जिसके तहत connizable offence करने वालो को जल्दी से जल्दी सजा मिल सके और कोई साक्ष्य मिटा ना सके इसलिए zero एफआईआर लागू किया गया इसके तहत कोई भी व्यक्ति किसी भी स्थान पर घटना की रिपोर्ट लिखा सकता है ।और यदि घटना रेप य मर्डर की हैं तो पुलिस खुद वाहा जाकर एफआईआर दर्ज़ करेगी और जो पुलिस स्टेशन पास होगा वहीं उस पर कार्यवाही करेगा तथा प्राथमिक जांच कर रिपोर्ट सौंपेगा। कोई भी पुलिस रिपोर्ट लिखने से मना करे तो सीधे अधिकारी से उसकी शिकायत करे।

आप अपनी शिकायत फोन के माध्यम से भी कर सकते हैं लेकिन उसके बाद आपको उसको थाने जाकर रजिस्टर करना होता है यदि आप रजिस्टर नहीं कराते तो वह एफआईआर मान्य नहीं होगा । यदि एफआईआर लिखते समय थाना अध्यक्ष नहीं है तो आप उसको किसी भी उससे बड़े अधिकारी के पास दर्ज करा सकते हैं। एफआईआर की कॉपी लेना आपका अधिकार होता है ।कोई भी इसके लिए आपको मना नहीं कर सकता है। एफआईआर लिखित शिकायत होती है।इसका मतलब ये नहीं कि आप का केस सॉल्व हो गया है।

एफआईआर लिखते समय एफआईआर लिखने का समय आने का समय जाने का समय सब लिखा होता है। एफआईआर सरल भाषा में लिखा जाना चाहिए। एफआईआर सबको समझ में आना चाहिए।एफआईआर के 4 शीट होनी चाहिए। ऑनलाइन एफआईआर के लिए ईमेल एड्रेस और फोन नंबर आवश्यक हैं । ऑनलाइन एफआईआर लिखने के २४ घंटे के भीतर आपको पुलिस ऑफिसर द्वारा कॉल किया जाएगा और घटना का जायजा लिया जाएगा । कि घटना कब कैसे हुई थी और 7 दिन के भीतर आपको इसकी अपडेट मिल जाएगी।

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