Buy back of shares and security-

आज हम आपको शेयर और सेक्यूरिटी को कंपनी द्वारा वापस कैसे लिया जायेगा उसके बारे मे बतायेंगे। 

इसके लिए हमे सबसे पहले buy back क्या होता है उसको जानना आवश्यक है।

वैसे तो सामान्य भाषा मे आप सभी को पता होगा buy back मतलब दिये हुए सामान को वापस लेना होता है परंतु अब हम इसको लॉं की भाषा मे जानने का प्रयास करेंगे।

Buy back की मीनिंग-

Buy back ऑफ शेयर कंपनी द्वारा अपने शेयर कैपिटल मे कमी करना है। 

यह जयदा कुछ नही है इसमे कंपनी खुद अपने शेयर होल्डर के पास जाती है और उससे उसकी कंपनी के शेयर खरीदने का ऑफर देती है। कि मै खुद अपनी कंपनी के शेयर आपसे खरीदना चाहती हूँ। 

अब हम जानेंगे कि कंपनी द्वारा buy back करने का मकसद क्या होता है। 

कंपनी द्वारा buy back का ऑब्जेक्ट यानि की मकसद-

1 जब भी कोई कंपनी अपने शेयर को वापस लेना चाहती है तो उसका मकसद प्रमोटर की होल्डिंग को बढ़ाना होता है। 

2 जब कंपनी खुद के शेयर को लेती है तो वह चाहती है कि उसका प्रति शेयर अर्निंग बढ़ जाए। 

3 कंपनी का एक मकसद शेयर होल्डर की शेयर की वेल्यू को बढ़ाना होता है। 

4 कंपनी अपने डेप्ट और इक्विटी मिक्स को रिस्ट्रॅक्टर करना चाहती है तब भी वह buy back करती है। 

5 कंपनी पर जब कोई ज़बरदस्ती अपना कब्ज़ा करना चाहता है। तो उसके बचाव में भी कंपनी buy back करती है। 

6 कंपनी को जब पैसे की आवश्यकता नही होती तब भी वह कंपनी की वेल्यू बढ़ाने के लिए टेक ओवर करती है। 

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अब हम आपको बतायेंगे की कंपनी एक्ट के अनुसार buy back कैसे कर सकते हैं। 

सेक्शन 68 कंपनी एक्ट के सभी प्रोविजन को ओवरराइड कर देती है।

अब हम लोग पढ़ेंगे कि कैसे buy back का legal फ्रेम वर्क होता है। 

लिस्टेड कंपनी मे – लिस्टेड कंपनी वह कंपनी होती है जो स्टॉक एक्सचेंज मे लिस्टेड होती है। 

इसमे कंपनी एक्ट 2013 और सेबी बाय बैक ऑफ सेक्यूरिटी रेगुलेशन 2018 लागू होता है। 

अनलिस्टेड कंपनी और प्राइवेट कंपनी-

इसमे कंपनी एक्ट 2013 और रूल 17 शेयर कैपिटल और डिबेंचर रूल 2014 लगता है। 

अब हम लोग जानेंगे की सेक्शन 68 के महत्वपूर्ण प्रोविजन कौन कौन से है। 

1 source of buy back-

कंपनी अपने शेयर और अन्य सेक्यूरिटी केवल इनसे ही खरीद सकती है। 

फ्री रिज़र्व

सेक्यूरिटी प्रीमियम एकाउंट

इससे पहले इस्सू शेयर और अन्य सेक्यूरिटी से

2 pre conditions for buy back-

Buy back के लिए यह condition पूरा करना आवश्यक है। 

Buy back को कंपनी के अर्टिकल ऑफ एसोशिएशन द्वारा नियमित होना आवश्यक है। 

कंपनी को 10 ℅ पेड अप कैपिटल और फ़्री रिज़र्व के लिए बोर्ड द्वारा रिज़ॉल्यूशन पास कराना आवश्यक है। यह बोर्ड मीटिंग में पास होना आवश्यक है। सिर्कुलेशन ऑफ रिज़ॉल्यूशन मान्य नहीं होगा। 

अगर कंपनी 10℅ से जयदा और 25 ℅ तक पेड अप कैपिटल और फ्री रिज़र्व का buy back चाहती है तो उसके लिए उसको स्पेशल रिज़ॉल्यूशन पास करना होगा। जो कि जनरल मीटिंग के द्वारा पास किया जायेगा। 

सेंट्रल गोवर्नमेंट ने यह आदेश दिया है कि buy back के बाद देबट् और इक्विटी रेसिओ 2:1 या फिर 2 का होना चाहिए इससे ज्यादा का डेबट् नही होना चाहिए। 

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Buy back करने वाले सभी शेयर और सेक्यूरिटी फूली पेड अप होने चाहिए। 

अगर कंपनी लिस्टेड है तो उसको सेबी के रेगुलेशन फॉलो करना होगा और अगर अन लिस्टेड है तो शेयर कैपिटल डिबेंचर रूल 2014 फॉलो करना होगा। 

3 Explanatory statement –

Buy back की मीटिंग के लिए स्पेशल रेसोल्यूशन के लिए नोटिस के साथ explanatory स्टेटमेंट भेजा जाता है।

Explanatory स्टेटमेंट मे निम्न बाते होनी चाहिए।

सभी मैटरियल फ़ैक्ट को पब्लिक मे दिस्क्लोज करना आवश्यक है।

Buy back की आवश्यकता क्यो है यह बताना पड़ेगा।

इसमे buy back मे एक ही प्रकार के securities को खरीदना पड़ता है।

Buy back मे कितना पैसा लगाना पड़ेगा।

Buy back को पूरा होने मे कितना समय लगता है।

Completion of buy back –

सभी buy back को स्पेशल रेसोल्यूशन पास होने के 1 साल के अन्दर पूरा करना होता है।  

buy back कैसे किया जा सकता है।

Buy back पुराने शेयर होल्डेर्स से proportionate बेसिस पर लिया जा सकता है।

Buy back को ओपेन मार्केट से खरीदा जा सकता है।

अपने employee से जिसको sweat equity  शेयर दिया गया हो उससे लिया जा सकता है।

4 Declaration of solvency-

बोर्ड रेसोल्यूशन या स्पेशल रेसोल्यूशन के बाद और buy back करने से पहले कंपनी को declaration of solvency फ़ाइल करना होता है जो की कंपनी फॉर्म नंबर एसएच9 के माध्यम से आरओसी और सेबी को भेजती है। जिसको कंपनी के 2 डायरेक्टर के द्वारा साइन किया हुआ होना चाहिए। जिसमे से एक मैनिजिंग डायरेक्टर होना चाहिए।

5 वापस की गयी सेकुरिटी को खत्म करना-

कंपनी को buy back खत्म हो जाने के 7 दिन के अन्दर ही वापस ली गयी शेयर को खत्म करना होगा।

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6 Restriction on further issue-

कंपनी buy back हो जाने के 6 माह तक उसी प्रकार की कोई भी सेकुरिटी इशू नही कर सकती है। वह आवश्यकता पड़ने पर राइट इशू कर सकती है। इसके कुछ अपवाद इस प्रकार है।

बोनस इशू

वॉरेंट को कन्वर्ट करना

स्टॉक ऑप्शन स्कीम

स्वेयट इक्विटि

डिबैंचर और प्रेफ़्रेंस शेयर को इक्विटि मे बदलना

7 Register of buy back-

कंपनी को buy back करने के लिए एक रजिस्टर बनाना पड़ता है जिसमे वह निम्न डीटेल लिख सकता है।

कितना पैसा buy back के लिए दिया गया

Cancellation की डेट क्या है

किस दिन शेयर को खत्म किया गया

और भी कुछ जो इससे संबन्धित हो

8 Return of buy back-

कंपनी buy back पूरे होने के 30 दिन के अन्दर आरओसी और यदि कंपनी लिस्टेड है तो सेबी को भी रिटर्न ऑफ buy back भेजना होता है। यह 2 डाइरेक्टर के द्वारा साइन किया हुआ होना चाहिए जिसमे से एक मैनिजिंग डायरेक्टर होगा।

9 पेनाल्टी –

यदि कंपनी सेबी रुल्स और रेग्युलेशन को नही मानती है और उसमे कोई गलती करती है तो उसको सेक्शन 2f के अनुसार 1 से 3 लाख तक का जुर्माना देना पड सकता है। और उससे संबन्धित सभी ऑफिसर को 1 से 3 साल तक की सजा हो सकती है और 1 से 3 लाख तक का जुर्माना देना पड सकता है। 

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