भारतीय संविधान के अनुसार अनुच्छेद 104 से 108 तक का वर्णन

जैसा कि आप सभी को ज्ञात होगा इससे पहले की पोस्ट मे हमने भारतीय संविधान के अनुसार अनुच्छेद 103  तक का वर्णन किया था अगर आप इन धाराओ का अध्ययन कर चुके है। तो यह आप के लिए लाभकारी होगा । यदि आपने यह धाराये नही पढ़ी है तो पहले आप उनको पढ़ लीजिये जिससे आपको आगे की धाराये समझने मे आसानी होगी।

अनुच्छेद 104

इस अनुच्छेद मे अनुच्छेद 99 के अधीन शपथ लेने या प्रतिज्ञान करने से पहले या अर्हित न होते हुए या निर्हित किए जाने पर  बैठने और मत देने के लिए शास्ति को बताया गया है।

यदि संसद  के किसी सदन में कोई व्यक्ति अनुच्छेद 99 की अपेक्षाओं का अनुपालन करने से पहले या फिर यह  जानते हुए कि वह उसकी सदस्यता के लिए अर्हित नहीं है। या निर्हित कर दिया गया है। या संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों द्वारा ऐसा करने से प्रतिषिद्ध कर दिया गया है। ऐसे  सदस्य के रूप  में बैठता है या मत देता है । तो वह प्रत्येक दिन के लिए  जब वह इस प्रकार बैठता है या मत देता है। उसको पांच सौ रुपए की शास्ति का भागी होगा जो संघ को देय ऋण के रूप में वसूल की जाएगी   ।

अनुच्छेद 105

इस अनुच्छेद के अनुसार संसद‌ के सदनों की तथा उनके सदस्यों और समितियों की शक्तियाँ, विशेषाधिकार आदि को बताया गया है।

(1) इस संविधान के उपबंधों और संसद‌ की प्रक्रिया का विनियमन करने वाले नियमों तथा  स्थायी आदेशों के अधीन रहते हुए संसद‌ में वाक्‌‌-स्वातंत्र्य होगा।
(2) संसद‌ में या उसकी किसी समिति में संसद‌ के किसी सदस्य द्वारा कही गई किसी बात या दिए गए किसी मत के संबंध में उसके विरूद्ध किसी न्यायालय में कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी । और किसी व्यक्ति के विरूद्ध संसद‌ के किसी सदन के प्राधिकार द्वारा या उसके अधीन किसी प्रतिवेदनया  पत्र, मतों या कार्यवाहियों के प्रकाशन के संबंध में इस प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी।
(3)  इसमे अन्य बातों में संसद‌ के प्रत्येक सदन की और प्रत्येक सदन के सदस्यों और समितियों की शक्तियाँ, विशेषाधिकार और उन्मुक्तियाँ ऐसी होंगी जो संसद‌, समय-समय पर इस  विधि द्वारापरिनिश्चित करे  और जब तक वे इस प्रकार परिनिश्चित नहीं की जाती हैं । तब तक वही होंगी जो संविधान (चवालीसवाँ संशोधन)अधिनियम, 1978 की धारा 15 के प्रवृत्त होने से ठीक पहले उस सदन की और उसके सदस्यों और समितियों की थीं।
(4) जिन व्यक्तियों को इस संविधान के आधार पर संसद‌ के किसी सदन या उसकी किसी समिति में बोलने का और उसकी कार्यवाहियों में अन्यथा भाग लेने का अधिकार है, उनके संबंध में खंड (1), खंड (2) और खंड (3) के उपबंध उसी प्रकार लागू होंगे जिस प्रकार वे संसद के सदस्यों के संबंध में लागू होते हैं।

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इसमे निम्न संशोधन किया गया है।

संविधान के  (चावलिसवा संशोधन) अधिनियम 1978 की धरा 15 द्वारा (20-6-1979 से) कुछ शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित किया गया ।

अनुच्छेद 106

इस अनुच्छेद के अनुसार सदस्यों के वेतन और भत्ते के बारे मे बताया गया है।

संसद  के प्रत्येक सदन के सदस्य  जिंका वेतन और भत्ते, जिन्हें संसद , समय-समय पर, विधि द्वारा, अवधारित करते रहते है।  और जब तक इस संबंध में इस प्रकार उपबंध नहीं किया जाता है।  तब तक ऐसे भत्ते, ऐसी दरों से और ऐसी  शर्तों पर, जो भारत डोमिनियन की संविधान सभा के सदस्यों को इस संविधान के प्रारंभ से ठीक पहले लागू थींउसको  प्राप्त करने के हकदार होंगे ।

अनुच्छेद 107

इस अनुच्छेद के अनुसार विधेयकों के पुरःस्थापन और पारित किए जाने के संबंध में उपबंध को बताया गया है।

(1)इस  धन विधेयकों और अन्य वित्त विधेयकों के संबंध में अनुच्छेद 109 और अनुच्छेद 117 के उपबंधों के अधीन रहते हुए यदि कोई विधेयक संसद के किसी भी सदन में आरंभ हो सकेगा ।

(2) अनुच्छेद 108 और अनुच्छेद 109 के उपबंधों  के अधीन रहते हुए यदि कोई विधेयक संसद के सदनों द्वारा तब तक पारित किया गया नहीं समझा जाएगा जब तक संशोधन के बिना या केवल ऐसे संशोधनों सहित जिन पर दोनों सदन सहमत हो गए हैं। तो  उस पर दोनों सदन सहमत नहीं हो जाते हैं ।

(3) संसद में लंबित विधेयक सदनों के सत्रावसान के कारण व्यपगत नहीं  होगा ।

(4) राज्य सभा में लंबित विधेयक जो कि  जिसको लोक सभा ने पारित नहीं किया है।  लोक सभा के विघटन पर व्यपगत नहीं   होगा ।

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(5) कोई विधेयक जो लोक सभा में लंबित है।  या जो लोक सभा द्वारा पारित  कर दिया गया है। और वह  राज्य सभा में लंबित है। तो  अनुच्छेद 108 के उपबंधों  के अधीन रहते हुए  लोक सभा के विघटन पर व्यपगत हो जाएगा ।

अनुच्छेद 108-

इस अनुच्छेद के अनुसार कुछ दशाओं में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को बताया गया है।

(1) इसके अनुसार  यदि किसी विधेयक के एक सदन द्वारा पारित किए जाने और दूसरे सदन को पारेषित किए जाने के  बाद मे –
(क) दूसरे सदन द्वारा विधेयक अस्वीकर कर दिया गया है।  या
(ख) विधेयक में किए जाने वाले संशोधनों के बारे में दोनों सदन मे से कोई भी एक सदन  अंतिम रूप से असहमत हो गए हैं।  या
(ग) दूसरे सदन को विधेयक प्राप्त होने की तारीख से उसके द्वारा विधेयक पारित किए बिना छह मास से अधिक बीत गए हैं।  तो उस दशा के सिवाय जिसमें लोकसभा का
विघटन होने के कारण विधेयक व्यपगत हो गया है। इस स्थित मे राष्ट्रपति विधेयक पर विचार-विमर्श करने और मत देने के प्रयोजन के लिए सदनों को संयुक्त बैठक में अधिवेशित होने के लिए आहूत करने के अपने आशय की सूचनातथा  यदि वे बैठक में हैं । तो संदेश द्वारा या यदि वे बैठक में नहीं हैं तो लोक अधिसूचना द्वारा देगा ।

परन्तु उस खंड की कोई बात धन विधेयक को लागू नहीं होगी।
(2) जिसमे छह मास की ऐसा अवधि की गणना करने में जो खंड (1) में निर्दिष्ट है। या  किसी ऐसी अवधि को हिसाब में नहीं लिया जाएगा जिसमें उक्त खंड के उपखंड (ग) में निर्दिष्ट सदन सत्रावसित या निरंतर चार से अधिक दिनों के लिए स्थगित कर दिया जाता है।
(3) यदि राष्ट्रपति ने खंड (1) के अधीन सदनों को संयुक्त बैठक में अधिवेशित होने के लिए आहूत करने के अपने आशय से यह  सूचना दे दी है।  तो कोई भी सदन विधेयक पर आगे कार्यवाही नहीं करेगा।

किन्तु राष्ट्रपति अपनी अधिसूचना की तारीख के पश्चात्‌ किसी समय सदनों को अधिसूचना में विनिर्दिष्ट प्रयोजन के लिए संयुक्त बैठक में अधिवेशित होने के लिए आहूत कर सकेगा और यदि वह ऐसा करता है तो उसे  सदन तद्‌नुसार अधिवेशित होंगे।
(4) यदि सदनों की संयुक्त बैठक में विधेयक ऐसे संशोधनों सहित यदि कोई हों तो  जिन पर संयुक्त बैठक में सहमति हो जाती है। तो उन दोनों सदनों के उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों की कुल संख्‍या के बहुमत द्वारा पारित हो जाता है।  तो इस संविधान के प्रयोजनों के लिए वह दोनों सदनों द्वारा पारित किया गया समझा जाएगा।

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परन्तु संयुक्त बैठक में

(क) यदि विधेयक एक सदन से पारित किए जाने पर दूसरे सदन द्वारा संशोधनों सहित पारित नहीं कर दिया गया है।  और उस सदन को जिसमें उसका आरंभ हुआ था। और उसको  लौटा नहीं दिया गया है।  तो ऐसे संशोधनों से भिन्न (यदि कोई हों) तो जो विधेयक के पारित होने में देरी के कारण आवश्यक हो गए हैं।  
 उस विधेयक में कोई और संशोधन प्रस्थापित नहीं किया जाएगा।

(ख) यदि विधेयक इस प्रकार पारित कर दिया गया है । यह और लौटा दिया गया है । तो विधेयक में केवल पूर्वोक्त संशोधन और ऐसे अन्य संशोधन जो उन विषयों से सुसंगत हैं । जिन पर सदनों में सहमति नहीं हुई है। वह उसके द्वारा  प्रस्थापित किए जाएँगे।  और पीठासीन व्यक्ति का इस बारे में विनिश्चय अंतिम होगा कि कौन से संशोधन इस खंड के अधीन ग्राह्य हैं।

(5) सदनों की संयुक्त बैठक में अधिवेशित होने के लिए आहूत करने के अपने आशय की राष्ट्रपति की सूचना के पश्चात्‌, लोकसभा का विघटन बीच में हो जाने पर भी इस अनुच्छेद के अधीन संयुक्त बैठक हो सकेगी । और उसमें विधेयक पारित हो सकेगा।

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