भारतीय संविदा अधिनियम के अनुसार उपनिधान, उपनिधाता, उपनिहिती की परिभाषा तथा उसका स्पस्टिकरण

Contract Law Bailment, bailor and bailee- Hindi Law Notes


भारतीय संविदा अधिनियम के अनुसार उपनिधान ,उपनिधाता ,उपनिहिती की परिभाषा तथा उसका स्पस्टिकरण इस प्रकार है।

भारतीय संविदा अधिनियम के अनुसार उपनिधान-

उपनिधान एक व्यक्ति द्वारा किसी अन्य व्यक्ति को किसी कार्य हेतु माल को इस संविदा के अनुसार देना की आवश्यकता पूरा हो जाने पर वह माल उसको वापस कर देगा या उसके कहे अनुसार किसी दूसरे व्यक्ति को वह माल वापस कर देगा।

माल को देने वाला व्यक्ति उपनिधाता कहलाता है और जिसको माल देता है वह उपनिहिती कहलाता है।

इसमे वह व्यक्ति भी शामिल होते है जो किसी दूसरे के माल पर अपना कब्जा जमा लेते है और तटद्वार उपनिहिती हो जाता है। और जो माल का स्वामी होता है वह उपनिधाता हो जाता है। जबकि वह माल उसका नही होता है।

यह भारतीय संविदा अधिनियम के धारा 148 मे बताया गया है। और अब देखते है की कैसे उपनिहिती को माल प्रदान किया जाता है यह धारा 149 के अंतर्गत आता है।

धारा 149

इसके अंतर्गत माल को प्रदान इस प्रकार किया जाये की माल उपनिहिती के स्वामित्व मे आ जाये । या फिर उसकी और से धारण किसी व्यक्ति के पास आ जाये जो उपनिहिती के रूप मे कार्य कर रहा हो।

धारा 150

उपनिधाता का यह कर्तव्य है कि वह उपनिहित  माल कि कमियो को प्रकट करे। इसके अनुसार यह बताया गया है कि जब उपनिधाता किसी माल को उपनिहित करता है तो उस माल से संबन्धित सभी कमियो को उपनिहिता को बता देना चाहिए भले ही वह उपनिहिता को पता  हो या नही ,भले ही वह उपनिहिता को नुकसान दे सकता है या नही।

See Also  सिविल प्रक्रिया संहिता धारा 13 से 20 तक का विस्तृत अध्ययन

यदि ऐसा उपनिधाता द्वारा नही किया जाता है तो उपनिहित माल कि ज़िम्मेदारी उपनिधाता की होगी और उपनिहिता को यदि कोई नुकसान होता है तो उसकी भरपाई भी उपनिधाता करेगा।

यदि माल भाड़े पर उपनिहित किया गया है और माल से कोई नुकसान हुआ है तो उसका भाड़ा उपनिधाता को देना होगा। भले वह उस नुकसान से परिचित था या नही।

उदाहरण –

क ने खा को एक गाय उधार के रूप मे  भेजी । क जानता था की यह गाय पैर मारती है और इससे दूध निकालना कठिन है। और यह बात खा को नही बताता है और जब खा  ले जाता है तो गाय का दूध निकालते समय खा को गाय के पैर मारने से चोट आ जाती है। क इसकी भरपाई करेगा क्योकि क ने खा को इसकी कामिया नही बतायी थी गाय देते समय।

इसका एक और उदाहरण इस प्रकार है।

क ने खा को एक गाड़ी किराए पर दी वह गाड़ी का पहिया ठीक नही था और क को यह पता था परंतु फिर भी वह गाड़ी किराए पर दी जिससे खा बाहर गया। यदि खा को कोई क्षति पाहुचती है तो इसका जिम्मेदार क होगा।

धारा 151

उपनिहिती द्वारा बरती जाने वाली सावधानिया –

उपनिहिती का यह कर्तव्य है की वह उपनिहित माल के प्रति वही सावधानी बर्ते जैसे की जब वह माल खरीदने जाते है तब बरत्ते है जिससे कोई कमी न हो जैसे माल का मूल्य ,माल की वैधता ,माल का प्रकार, माल का परिणाम आदि।

धारा 152

उपनिहित वस्तु के लिए कब उपनिहिती  उत्तरदायी नही होता है।

See Also  Contract (संविदाये) जिनका पालन करना आवश्यक होता है? तथा contract (संविदा) का पालन किसको करना होगा?

उपनिहिती ने जब माल की आचे से देख रेख की हो और संविदा के अनुसार उसका पालन किया हो तो माल संबंधी कोई भी क्षति होने पर उपनिहिती जिम्मेदार नही होगा।

धारा 153

उपनिहिती के कार्यो द्वारा जो संविदा से असंगत हो उपनिधाता द्वारा पर्यवसान –

यदि उपनिहिती उपनिहित माल के संबंध मे कोई ऐसा कार्य करे जो संविदा के अनुसार नही हो तो उपनिधाता संविदा को खत्म कर सकता है।

यदि खा एक घोडा क को सवारी के लिए देता है जो केवल क प्रयोग कर सकता है परंतु क उसका प्रयोग सवारी गाड़ी मे करता है और लोगो को ले जाता है तो खा इसका प्रवसन कर सकता है और अपना घोडा वापस ले सकता है।

धारा 154

उपनिहित माल का अप्राधिक्र्त प्रयोग करने पर उपनिहिती का दायित्व –

यदि उपनिहिती किसी माल का ऐसा प्रयोग करे जो की संविदा के अनुसार उपनिहिता द्वारा न कहा गया हो तो उपनिहिती किसी भी माल से संबन्धित नुकसान के लिए उपनिधाता को प्रतिकर देने के लिए उत्तरदायी होगा।

उदाहरण

यदि खा एक घोडा क को सवारी के लिए देता है जो केवल क प्रयोग कर सकता है परंतु क उसका प्रयोग सवारी गाड़ी मे करता है और लोगो को ले जाता है एक दिन घोडा गिर जाता है और क्षति हो जाती है क खा को उसका नुकसान देने के लिए प्रतिकर है।

धारा 155

उपनिहिती के माल और उपनिधाता की संपत्ति से उसका माल के मिश्रण का प्रभाव –

यदि उपनिहिती अपने माल के साथ उपनिधाता के माल को मिश्रित कर देता है तो वह इस अनुपात मे माल का बटवारा करेंगे।

See Also  भारतीय साक्ष्य अधिनियम के अनुसार धारा 68 से 78 तक का अध्ययन

धारा 156

जब माल को उपनिधाता के माल से अलग किया जा सकता है तो उसका प्रभाव –

जब माल को उपनिधाता के माल से अलग किया जा सकता है तो उसका प्रभाव इस प्रकार पड़ेगा।

यदि उपनिहिती अपने माल के साथ उपनिधाता के माल को मिश्रित कर देता है तो वह माल को उपनिधाता के माल से अलग किया जा सकता है। तो उपनिहिती उस माल को अपने माल से अलग कर देगा तथा अलग करने मे जो व्यय आया है वह उपनिहिती द्वारा दिया जाएगा।

धारा 157

जब माल को अलग नही किया जा सकता है तो उपनिहिती के माल को अलग न करने का प्रभाव इस प्रकार होगा। यदि उपनिहिती अपने माल के साथ उपनिधाता के माल को मिश्रित कर देता है तो वह माल को उपनिधाता के माल से अलग नही किया जा सकता है। तो उस माल से संबन्धित सभी हानि को  उपनिहिती द्वारा उपनिधाता को दिया जाना चाहिए।

उदाहरण

क ने खा को चावल का  26 किलो आटा दिया था खा ने उस आटे को साधारण आटे मे मिला दिया खा क के उस 26 किलो आटे का दाम क को देने के लिए उत्तरदायी है।

धारा 158

जब उपनिधाता द्वारा उपनिहिती को कोई माल किसी कार्य हेतु या उसको रखने के लिए दिया जाता हो और उपनिहिती को उस पर कोई ब्याज या कोई पैसा नही मिलता हो तो उससे संबन्धित सभी व्यय उपनिधाता द्वारा किया जाएगा।

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published.