कॉपीराइट से संबन्धित अधिकारो की रक्षा हेतु अंतरराष्ट्रीय संधि और सम्मेलन का वर्णन

Copyright international treaties

जब भी कोई व्यक्ति अपने भाव या विचार को प्रकट करता है और एक नई संरचना का निर्माण करता हैं वह कॉपी राइट होता हैं। आजकल भारत मे कॉपी राइट के क्या कानून हैं हम आपको ये भी बतायेंगे। यह नैचुरल या सिविल एक्ट नही है। यह लॉ द्वारा निर्धारित हैं सबसे पहले यह प्रिंटिंग प्रेस पर लागू हुआ बाद मे यह अन्य क्षेत्रो मे भी लागू किया गया।

1662 मे ब्रिटिश गोवर्नमेंट ने मशीनों के विकास के रूप मे इसका प्रयोग किया बाद मे अन्य देशो मे भी यह प्राशिध् हो गया और सभी देश इसको लागू किये। लेकिन यह कानून केवल अपने देश मे ही कॉपी राइट पर रोक लगा सकते थे दूसरे देश मे लोग इसकी कई कापिया बंनाने लगे और इसकी रक्षा के लिए देशो के मध्य संधिया होने लगी सभी देश एक दूसरे से कॉपी न करने के लिए संधि करने लगे और इस तरह से इसका विकास हुआ। 

इसके अंतर्गत जो लेखक द्वारा लेखन किया गया हैं वह उस कृति को प्रकाशित करने उसको वितरित करने का अधिकार प्राप्त कारता हैं लेकिन इसका समय निश्चित होता हैं। और यह लेखक को अधिकार प्रदान करता है। यह लेखन संगीत वाद आदि छेत्रो मे कार्य करता हैं। इसको प्रकाशक की अनुमति के बिना कोई प्रयोग नही कर सकता हैं। 

भारत वर्ष मे कॉपी राइट एक्ट 1957 मे लागू हुआ था ।  इसमे कई संधिया और सम्मेलन हुए कुछ इस प्रकार हैं । इस संधि और सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य अंतर्रास्टीय स्तर पर कॉपीराइट के कर्ता के अधिकारो की रक्षा करना हैं ।  यह प्रत्येक देशो मे एकता का संदेश देता हैं तथा कॉपीराइट नियमो को  सुरक्षा प्रदान करता हैं ।

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बर्ने सम्मेलन – यह अंतर्रास्टीय स्तर पर विभिन्न देशो के बीच किया जाने वाला समझौता हैं ।  इसमे मुख्य रूप से कॉपीराइट को संरक्षण प्रदान करने के लिया किया गया था ।  यह कॉपी राइट के साहित्य और कलात्मक चीजों को संरक्षित करने के लिए किया गया सम्मेलन था ।  जिसको 1886 मे किया गया । यह बर्ने जो कि स्विट्ज़रलैंड मे हैं वहा किया गया इसलिए इसका नाम बर्ने समझौता भी पड़ा ।  बर्ने समझौता के अनुसार कॉपी राइट के लेखक को अन्य देशो मे भी  वैसे ही सुरक्षा मिलेगी जैसे उसको अपने देश मे मिलती थी।

रोम सम्मेलन – यह सम्मेलन 1961 मे किया गया ।  इसके तहत कलाकारो ,फोनोग्राम के प्रोड्यूसर और ब्रोडकास्टिंग के संगठनो को सुरक्षा प्रदान करना था । यह 26 अक्टूबर 1961 को लागू किया गया ।  पहले भारत इसका सदस्य नही था ।  इसके वही सदस्य थे जो जायदातर  बर्ने सम्मेलन के थे ।  इसके तहत पहली बार कॉपीराइट लेखक को यह अधिकार मिला था कि यह वीडियो कैसेट आदि बना सके ।

जिनेवा समझौता – इसके तहत कॉपीराइट लेखक को ,फोनोग्राम के प्रोड्यूसर को उनके ड्यूप्लिकेट कॉपी के प्रति सुरक्षा प्रदान करती हैं ।  यह 1971 मे लागू हुआ ।  इसके अनुसार कोई भी व्यक्ति बिना लेखक के सहमति के बिना उनकी बनाई गयी प्रतियो को पब्लिक मे नही बाट सकता हैं और न ही उसकी कॉपी बना सकता हैं यदि कोई व्यक्ति ऐसा करता हैं तो उसको नोटिस भेजा जाएगा तथा दोषी पाने पर दंडित किया जा सकता हैं ।

ब्रुसेल्स समझौता – इस समझौता के तहत सेटेलाइट के माध्यम से सबको सिगनल प्रदान करना हैं ।  इसके तहत सभी स्टेट को अपने अपने क्षेत्रो को ध्यान मे रखकर हर जगह समान रूप से सुविधाओ का आदान प्रदान करना हैं और अगर इसमे कही परेशानी आ रही हैं तो इसका निशतारण करना होगा ।

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WIPO संधि – इसका पूरा नाम  world intellectual property right इसमे इंटरनेट के माध्यम से होने वाले कॉपीराइट उलंघन और डिजिटल तरीके से किए गए कॉपीराइट को सम्मलित किया गया हैं । यह आईपीआर के क्षेत्र मे महत्वपूर्ण कदम हैं ।  इसके अंतर्गत लेखको को अंतर्रास्टीय स्तर पर एक कर दिया जाएगा ।  उनको अलग देश मे भी अपने देश जैसा ही संरक्षण प्राप्त होगा ।  इसके अंतर्गत रचनात्मक छवि को उसका परिश्रमिक मिलेगा ।  व्यापार मे बढ़ोत्तरी होगी ।  देश का विकाश होगा ।

 यह तकनीक व्यवस्था का उपयोग करके कॉपी राइट एक्ट को सहायता प्रदान करती हैं । यह बर्न सम्मेलन के तहत की एक रूप हैं ।  इसके अंदर 26 संधिया हैं ।  यह सयुक्त राज्य अमेरिका की मत्वपूर्ण संधियो मे से एक हैं ।  यह मुख्यता  कलात्मक चीजों का व्यापार मे व्रधि करने के लिए की गयी थी ।  इसका head office जेनेवा मे हैं ।  प्रतेय्क 26 अप्रैल को यह दिवस मनाया जाता हैं ।  भारत 1975 मे इसमे शामिल हुआ । और इसका सदस्य कहलाया।  इसके तहत मध्यथता केंद्र की स्थापना भी हुई जिससे विवादो को सुलझाने मे मदद मिल सके।

Marrakesh संधि- जैसा की नाम से आप सुना होगा यह विश्व व्यापार संगठन से जुड़ा हुआ हैं 1992 मे कॉपी राइट से संबन्धित जो संधि हुई इसका संबंध उससे भी हैं यह Marrakesh नाम की जगह पर संधि होने के कारण ही इसका नाम Marrakesh पड़ा। जैसा की आप सब जानते हैं हमारे भारत देश मे आज भी नेत्रहीनो के लिए जरूरत के अनुसार सुविधाए नही हैं ।  गाव देहात मे तो उनके लिए स्कूल तक नही हैं ।  जिसके वजह से आज भी वो लोग दीन हीं माने जाते हैं ।

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 गरीब लोग अगर अपने बच्चे को बाहर पढ़ने भेजते भी हैं तो पहले तो नेत्रहीन होने की वजह से उनको एड्मिशन नही मिलता और फिर मिल भी गया तो स्कूल मे बच्चा अन्य बच्चो की त्राह नही पढ़ पाने से पीछे रह जाता हैं और नेत्रहीन स्कूल की कमी होने से ये बच्चे आगे नही बढ़ पाते हैं किसी त्राह नेत्रहीन स्कूल मे एड्मिशन हो भी गया तो कॉपी किताब ही उपलब्ध नही जिससे उनकी पढ़ाई हो सके।  इन्ही सब को देखते हुए कॉपीराइट एक्ट मे संशोधन किया गया और नेत्रहीनो के लिए किताब और कॉपी को पूरे विश्व मे उपलब्ध कराया गया जिससे वो पढ़ सके और उनका कल्याड हो सके ।

इसको ही ध्यान मे रख कर 1994 मे एक संधि की गयी थी जो की 2012 मे लागू हुआ जिसका नाम Marrakesh संधि हैं यह 28 जून 2013 को साइन किया गया था ।  इसमे कुल 80 देश शामिल हैं भारत पहले स्थान पर हैं जिसने इसको लागू करने का भरशक प्रयाश किया ।  यह 30 सेप्टेम्बर 2016 को प्रभाव मे आया था ।  यह केवल नेत्रहीनो को प्रकाशित कॉपी ही नही पाहुचाएगा बल्कि यह उन स्कूल के लिए भी अच्छा होगा जो नेत्रहीन बच्चो कोस शिक्षा प्रदान करना चाहते हैं ।  यह शिक्षा सामग्री को आदान प्रदान आसानी से उपलब्ध कराएगा । यह व्यापार को भी बढ़ावा देगा । 

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