दंड प्रक्रिया संहिता धारा 48 से 53 तक का विस्तृत अध्ययन

जैसा कि आप सभी को ज्ञात होगा इससे पहले की पोस्ट मे हमने दंड प्रक्रिया संहिता धारा 1 से 47  तक का विस्तृत अध्ययन करा चुके है यदि आपने यह धराये नही पढ़ी है तो पहले आप उनको पढ़ ली जिये जिससे आपको आगे की धराये समझने मे आसानी होगी।

धारा 48

इस धारा मे यह बताया गया है कि किस प्रकार पुलिस अधिकारी द्वारा अपराधी का पीछा किया जा सकता है। इसके अनुसार अन्य अधिकारी के क्षेत्र मे पुलिस द्वारा अपराधी का पीछा करने से है।

जब कोई व्यक्ति किसी अन्य थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है और दूसरे थाना क्षेत्र मे अपराध करता है तो वह अपराधी पुलिस अधिकारी द्वारा पकड़ा जा सकता है।

यह पुलिस अधिकारी को यह अधिकार देती है कि भारत के किसी भी क्षेत्र से अपराधी को पकड़ सकता है जो उसके क्षेत्र मे अपराध किया हो।

पुलिस अधिकारी जिसको गिरफ्तार करने के लिए विधि द्वारा प्रदत्त है तो वारंट के अनुसार भारत के किसी भी क्षेत्र से गिरफ्तार कर सकता है।

धारा 49

इसमे अनावश्यक अवरुद्ध न करने के बारे मे बताया गया है। कोई भी पुलिस अधिकारी किसी के साथ ऐसा कार्य नही करेगा जिससे उसको नुकसान हो। पुलिस किसी गिरफ्तार किए गए व्यक्ति के साथ मार पीट या शक्ति  का ज्यादा उपयोग नही करेगा और उसको हानि नही पहुचाएगा।

किसी अपराधी को उतना ही अवरुद्ध किया जाएगा जितना उसके निकल के न भागने के लिए आवश्यक है।

इलाहाबाद हाइकोर्ट के अनुसार गवाह को पुलिस द्वारा सुनवाई के लिए गिरफ्तार किया गया था। गवाह ने खुद को पुलिस को सुपुर्द किया था। फिर भी पुलिस ने उन सबको मारा था जिससे दोष सिद्ध होने पर पुलिस को धारा 49 के अनुसार दंडित किया गया था।

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धारा 50

इसके अनुसार गिरफ़्तार किए गये व्यक्ति के अधिकार के बारे मे बताया गया है।

यदि कोई अपराधी ज़मानती अपराध करता है तो वह जमानत पर छोड़े जाने का अधिकार रखता है। जमानत पेश करने के बाद उसको छोड़ा जा सकता है।

अजामनतीय अपराध मे यह क्रिया मजिस्ट्रेट द्वारा छोड़ा जा सकता है।

किसी व्यक्ति को बिना वारंट के गिरफ्तार किए गये कोई पुलिस अधिकारी उसको गिरफ्तारी करता है। तो उसको थाने से जमानत मिल जाता है तो वह गिरफ्तार व्यक्ति को इत्तला देगा। कि वह जमानत पर छोड़े जाने का अधिकारी है। वह इसके लिए अपने गारेंटर को प्रस्तुत करे।

किसी व्यक्ति को बिना वारंट के कोई पुलिस अधिकारी उसको गिरफ्तारी करता है।तो गिरफ्तारी का कारण उसको बताना जरूरी होता है।

यदि किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है तो उसको 24 घंटे के अंदर उसको मजिस्ट्रेट के पास प्रस्तुत करना होगा। यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 22 के अनुसार है।

धारा 51

इसमे यह बताया गया है कि गिरफ्तार व्यक्ति की तलाशी कैसे की जा सकती है। यदि कोई व्यक्ति जो गिरफ्तार किया जाता है उसकी तलाशी ली जाती है।

जब कोई पुलिस अधिकारी किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करता है जो वारंट के बिना या वारंट के अधीन गिरफ्तार किया जाता है जो जमानत नही ले सकता है।

तो गिरफ्तार करने वाला व्यक्ति उसकी तलाशी ले सकता है। और कपड़े के अलावा सभी सामान को सुरक्षित रख सकता है और उसकी सामान की एक लिस्ट उस गिरफ्तार व्यक्ति को दे देता है।

गिरफ्तार किए गये व्यक्ति को रशीद दी जाती है जिसमे पुलिस अधिकारी प्राप्त सामान की लिस्ट लिखता है।

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किसी स्त्री की तलाशी किसी स्त्री के द्वारा ही ली जा सकती है। इसमे तलाशी के समय कोई पुरुष उपस्थित नही होना चाहिए।

दंड प्रक्रिया संहिता के 1858 के अनुसार यह धारा 51,52 मे दिया गया है। इसमे धारा 51 ,97 ,99 ,110 तलाशी से संबन्धित है।

तलाशी के समय 2 व्यक्ति गवाह के रूप मे होना चाहिए। यह आवश्यक नही है परंतु यह लोक सिद्ध है।

धारा 52

इसमे बताया गया है कि गिरफ्तार किए गये व्यक्ति से हथियार लेने कि शक्ति किसकी है।

यदि किसी व्यक्ति को किसी पुलिस अधिकारी द्वारा गिरफ्तार किया गया है तो हथियार को अपने पास लेने का अधिकार पुलिस को है।

हथियार के अंतर्गत वह सभी हथियार आता है जो किसी को मारने के लिए रखा गया है। पुलिस ऐसे हथियार को न्यायालय या अधिकारी को सुपुर्द करेगा जहा गिरफ्तार व्यक्ति को पेश करेगा।

हथियार लेते समय पुलिस को यह ध्यान रखना होगा कि गिरफ्तार व्यक्ति के पास कितना हथियार है उसको कही चोट तो नही आई है। हथियार का प्रयोग कब किया गया । उसका प्रयोग हो चुका है या नही।

अपराधी के कपड़े पर निशान है या नही इन सब को देखना आवश्यक होगा।

धारा 53

इसमे बताया गया है कि गिरफ्तार व्यक्ति का डॉक्टर के द्वारा मेडिकल परीक्षण कैसे किया जाएगा।

जब भी किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाता है तो उसका मेडिकल परीक्षण कराना आवश्यक होता है। यह पुलिस अधिकारी द्वारा प्रार्थना करने पर पंजीकरण डॉक्टर द्वारा किया जाएगा जो राजकीय डॉक्टर रजिस्टर मे दर्ज है और उसको डॉक्टर के लिए लिए सेंस प्राप्त हो। और पुलिस अधिकारी कम से कम उप निरीक्षक के श्रेणी का होना चाहिए।

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जब कोई व्यक्ति ऐसे अपराध के लिए गिरफ्तार किया जा रहा हो जिसकी मेडिकल जांच साक्ष के रूप मे प्रस्तुत किया जा सकता हो।

परीक्षण मे रक्त के धब्बे, डीएनए ,वीर्य ,आदि का मेडिकल परीक्षण किया जाएगा। या जो डॉक्टर द्वारा कहा जाएगा।

धारा 53 क यह धारा चिकित्सा व्यवशयी द्वारा 376 धारा का आरोप है तो उसका मेडिकल परीक्षण धारा 53 क के अनुसार होगा।

जब कोई व्यक्ति जो बलातसंग का अपराधी है। यह बिस्वास करने का आधार है कि मेडिकल से साक्ष मिल सकता है तो सरकार द्वारा चलाते गये अस्पताल के डॉक्टर या  रजिस्टर्ड डॉक्टर या पंजीकरण चिकित्सा व्यवसायी कि अनुपस्थिति मे और 16 किलो मीटर के अंदर मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा।

यह उपनिरीक्षक के कम श्रेणी का अधिकारी नही होना चाहिए ऐसे पुलिस कि प्रार्थना पर चिकित्सा  परीक्षण करेगा।

यह बिना विलंब के होना चाहिए। और उसका रिपोर्ट तैयार किया जाएगा। और उसमे अभियुक्त और उसको लाने वाले व्यक्ति का नाम पता लिखा होना चाहिए।

अभियुक्त कि आयु

अभियुक्त व्यक्ति के चोट का निशान

डीएनए के लिए शरीर से ले गया विवरण और कारण

डॉक्टर द्वारा निकाले गये निष्कर्ष का विवरण लिखा होगा।

मेडिकल आरंभ और अंत का समय लिखा होना चाहिए।

अन्वेक्ष्ण अधिकारी को तुरंत रिपोर्ट प्रस्तुत किया जाएगा जो धारा 173 मे वर्णित रिपोर्ट मे आता है और न्यायालय मे प्रस्तुत किया जाता है।

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