सिविल प्रक्रिया संहिता धारा 58 से 60 तक का विस्तृत अध्ययन

जैसा कि आप सभी को ज्ञात होगा इससे पहले की पोस्ट मे सिविल प्रक्रिया संहिता धारा 56  तक का विस्तृत अध्ययन करा चुके है यदि आपने यह धराये नही पढ़ी है तो पहले आप उनको पढ़ लीजिये जिससे आपको आगे की धराये समझने मे आसानी होगी।

धारा 58

इसमे निरोध और व्यक्ति को छोडने की प्रक्रिया बताई गयी है।

इसके अनुसार डिक्री के निष्पादन हेतु जो भी व्यक्ति सिविल करागार मे निरूध है ऐसा कोई भी व्यक्ति-

जब डिक्री की राशि 5000 रुपये से अधिक की है तो वह इस धन के संदाय के लिए व्यक्ति को 3 माह से अनधिक अवधि के लिए और जब डिक्री की राशि 2000 रुयपये तक है तो वह इस धन के संदाय के लिए व्यक्ति को 6 सप्ताह से अनधिक अवधि के लिए निरुद्ध किया जा सकता है।

परंतु इस निरोध मे से –

उसके निरोध की राशि वारंट मे लिखित राशि का सिविल करगार के भार साधक अधिकारी के संदाय कर दिये जाने पर या फिर उसके विरुद्ध डिक्री के अन्यथा पूर्ण हो जाने पर

या फिर

जिस व्यक्ति के आवेदन पर उसको निरुद्ध किया गया है उसके अनुरोध पर

जिस व्यक्ति के आवेदन पर उसको निरुद्ध किया जाये उसके जीवन निर्वाह भत्ते के संदाय करने के लोप करने पर निरोध की अवधि अवसान से पहले ही छोड़ दिया जाये।

खंड 2 व खंड 3 के अनुसार ऐसा निरोध न्यायालय के आदेश के बिना नही छोड़ा जा सकता है।

जब डिक्री की राशि 2000 रुपये तक है तो वह इस धन के संदाय के लिए व्यक्ति को 6 सप्ताह से अनधिक अवधि के लिए विरुद्ध किया जा सकता है। और जब उसको सिविल कारागार मे निरुद्ध किया गया है तो उसके निष्पादन मे सिविल कारागार मे पुनः गिरफतार नही किया जा सकता है।

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धारा 59

रुग्णता (Disease) के आधार पर छोड़ा जाना –

इस धारा के अनुसार यदि कोई व्यक्ति न्यायालय के द्वारा निर्णीत ऋणी की गिरफ्तारी के लिए वारंट निकाले जाने के बाद किसी भी समय उसकी भयानक रुग्णता के आधार पर उसके वारंट को निरस्त किया जा सकता है।

निर्णीत ऋणी को यदि गिरफ्तार कर लिया गया है तो गंभीर बीमारी होने पर उसको छोड़ा जा सकता है।

राज्य सरकार द्वारा यदि किसी निर्णीत ऋणी को यदि गिरफ्तार कर लिया गया है। और उसको जिला कारागार मे बंद कर रखा है तो संक्रामक  बीमारी होने पर उसको छोड़ा जा सकता है।

यदि कोई न्यायालय किसी न्यायालय के अधिन्स्थ है तो न्यायालय अपने अधिन्स्थ न्यायालय को किसी निर्णीत ऋणी को यदि गिरफ्तार कर लिया गया है तो गंभीर बीमारी होने पर उसको छोड़ा जा सकता है।

इस धारा के अधीन छोड़ा गया निर्णीत ऋणी को फिर से  गिरफ्तार कर लिया जा सकता है।

परंतु कारागार मे उसका निरोध धारा 58 के अधीन अवधि से अधिक नही होना चाहिए।

धारा 60

वह संपत्ति जो डिक्री के निष्पादन के लिए कुर्क और विक्रय की जा सकती है।

निम्न संपत्ति डिक्री के निष्पादन मे कुर्क और विक्रय की जा सकेगी। अर्थात भूमि, गृह ,और अन्य  निर्माण माल ,धन बैंक नोट,हुंडी वचन पत्र , सरकारी प्रतिभूति ,ऋण निगम अंश और उसके सिवाय जैसा इसमे व्रणित है। चाहे वह निर्णीत ऋणी के नाम धारित हो या अन्य किसी व्यक्ति को हो।

विक्रय की जाने वाली ऐसे सभी स्थावर संपत्ति जो निर्णीत ऋणी की है जिस पर वह लाभों को व्ययन की शक्ति रखती है। जिससे चाहे वह निर्णीत ऋणी के नाम मे धारित हो या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उसके न्यास मे इसकी और धारित हो।

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परंतु कुछ वस्तु कुर्क और विक्रय नही की जा सकती है।

निर्णीत ऋणी ,उसकी पत्नी बच्चे उसका परिवार को वस्त्र ,भोजन ,आभूषण ,या धार्मिक वस्तुए जो जरूरी है।

अगर कोई शिल्पकार है तो उसका औज़ार यदि क्रषक है तो उसका खेती का उपकरण पशु बीज ।आदि जो न्यायलय की राय मे जीविका के लिए आवश्यक है। उसको मुक्त घोसित किया जाता है।

वे घर और भाग जो क्रषक या नौकर के है। और उनके अभिभोग मे है।

लेखाबहिया

नुकसान के लिए वाद लाने का अधिकार मात्र

व्यक्तिगत सेवा संबंधी अधिकार

वे उपदान जो सरकार के द्वारा या नियोजक के द्वारा या किसी अन्य प्रयोजन के द्वारा पेन्सन भोगियों को अनुज्ञात है।

जो राजनैतिक पेन्सन है।

श्रमिकों और घरूलु नौकर को मजदूरी चाहे वह धन या वस्तु के रूप मे हो।

भरण पोषण की डिक्री से भिन्न डिक्री के निष्पादन मे वेतन के रकम 1000 रुपये।

परंतु जहा वेतन के प्रभाव को कुर्क कर दिया जाता है। जहा कोई भाग लगातार 24 माह तक कुर्क रहा हो।

वह जब तक आगे का 12 माह तक समाप्त न हो जाए कुर्की से छूट  मिलता है। जहा कुर्की एक ही डिक्री के निष्पादन के लिए की गयी हो वह 12 माह तक कुर्की चालू रहने के बाद ऐसे भाग को निष्पादन मे कुर्की से छूट प्राप्त होगी।

भरण पोषण के रूप मे वेतन का 1/3 हिस्सा का छूट मिलेगा।

ऐसे व्यक्ति का वेतन भत्ता जिनको वायु सेना अधिनियम 1950 और नौ सेना अधिनियम 1950 और सेना अधिनियम 1950 के तहत लागू किया गया है।

ऐसे निधि जो भविष्य निधि के रूप मे प्रयोग की जा रही है उसको कुर्क से छुट प्राप्त है।

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निर्णीत ऋणी के द्वारा जीवन बीमा पॉलिसी के अदीन संघेय धन

किसी ऐसे निवास गृह पर जैस्पर पट्टे दार के हिट पर भाटक और वास सुविधा के नियंत्रण संबंधी तुरंत प्रभाव से किसी विधि को लागू होना।

सरकार या रेल प्राधिकरण के द्वारा किसी सरकारी कर्मचारी को भत्ते के रूप मे कोई ऐसा भत्ता जैस्पर राज्य सरकार अधिसूचना के द्वारा यह घोसित करते है की वह कुर्क से छुट प्राप्त है।

उत्तर जीविका के लिए उत्तरदाई के द्वारा प्रत्याशा

भावी भरण पोषण का अधिकार

ऐसा कोई भत्ता जैस्पर विधि ने छुट प्रदान की हो।

जहा निर्णीत कोई ऐसा व्यक्ति है जो भू राजस्व के संदाय के लिए उत्तरदाई है वह कोई संपत्ति जो विक्रय से छुट प्राप्त है।

सिविल प्रक्रिया संहिता की कई धराये अब तक बता चुके है यदि आपने यह धराये नही पढ़ी है तो पहले आप उनको पढ़ लीजिये जिससे आपको आगे की धराये समझने मे आसानी होगी।

यदि आपको इन धाराओ को समझने मे कोई परेशानी आ रही है। या फिर यदि आप इससे संबन्धित कोई सुझाव या जानकारी देना चाहते है।या आप इसमे कुछ जोड़ना चाहते है।या फिर आपको इन धाराओ मे कोई त्रुटि दिख रही है तो उसके सुधार हेतु भी आप अपने सुझाव भी भेज सकते है।

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