Treasury management क्या होता हैं।

जैसा की आप सबको treasure मतलब खजाना होता हैं और treasury management वह होता हैं जो हमारे खजाने की देख रेख कर सके |

हमारे देश का treasury manage कौन करता हैं तो वह हैं आरबीआई हैं उसी प्रकार कंपनी का treasury management treasury मैनेजर के द्वारा होता हैं | treasury केवल रुपये ही नही बल्कि विदेशी पैसे को भी manage करती हैं |

कंपनी मे मुख्यता 2 पोस्ट होती हैं financial मैनेजर और treasury मैनेजर यहा दोनों के काम अलग अलग होते हैं | यहा treasury manger केवल कैश को देख रेख करता है और financial मैनेजमेंट मे सभी प्रकार की फ़ाइनेंस की देख रेख किया जाता हैं यह लॉन्ग टर्म होता हैं|

जैसा की हम घर मे देखते हैं पापा एक फ़ाइनेंस मैनेजर की तरह कार्य करते हैं जबकि मम्मी treasury मैनेजर की तरह कार्य करती  हैं | जैसे पापा बजट बनाते हैं और मम्मी उसको लागू करती हैं इसी प्रकार treasury मैनेजर बजट को लागू करता हैं जबकि फ़ाइनेंस मैनेजर प्लानिंग करता हैं | फ़ाइनेंष्यल मैनेजमेंट लॉन्ग टर्म होता हैं और treasury मैनेजमेंट शॉर्ट टर्म का होता हैं | treasury मैनेजर एक्सिकिटिव बॉडी होता हैं | और फ़ाइनेंष्यल मैनेजर प्लानर बॉडी हैं |

Treasury मैनेजमेंट केवल करेंट अससेस्ट्स को देखती हैं और फ़ाइनेंष्यल मैनेजमेंट मे फ़िक्स्ड और करेंट दोनों अससेस्ट्स की देख रेख होती हैं |

छोटी कंपनियो मे ये दोनों काम एक ही व्यक्ति को दे दिया जाता हैं | वो ही फ़ाइनेंस और treasury दोनों का काम करती हैं | फ़ाइनेंष्यल मैनेजमेंट का कार्य stablish करना cordinate करना और प्लान बनाना हैं जिससे फ़र्म को कंट्रोल मे रख सके | उस प्लान के अंदर कितना कैपिटल बजट हैं कितना पैसा लगेगा कितना विक्री होगा ये सब बताता हैं | कंपनी मे फ़ाइनेंस मैनेजर स्टैंडर्ड सेट करता हैं जिसके अनुसार कार्य किया जाता हैं|

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वही treasury मैनेजमेंट बार बार यह देखता हैं की दिन प्र्तिदिन कार्य कैसे होगा | यह एक्सिकिटिव बॉडी की तरह कार्य करता हैं यह लिकुइडिटी को ध्यान मे रखकर यह बताता हैं की किसमे इन्वेस्ट करे | यह ये भी बताता हैं की बजट को कहा पर रिपोर्ट करना हैं | यह छोटे बजट भी बनाता हैं |

फ़ाइनेंस मैनेजर टॉप लेवल के साथ कार्य करता हैं वही treasury मैनेजर स्टैंडर्ड के अनुसार कार्य करता हैं |और फ़ाइनेंष्यल मैनेजर के expectation को पूरा करे | यह पिरियोडिक बजट बनाता हैं और उस अनुसार कार्य करते हैं |

टॉप मैनेजमेंट डिसाइड करेगे की क्या कार्य करना हैं| कोई भी व्यक्ति को treasury मैनेजमेंट मे analiase की पावर होनी चाहिए | फ़ाइनेंस मैनेजर उसपर strategy बनाएगा और उसपर लॉन्ग टर्म डिसिशन लेगा | फ़ाइनेंस मैनेजर उसपर लॉन्ग टर्म views लेगा |

Treasury मैनेजमेंट liquidity का ध्यान रखता हैं और कैश बजट बनाता है और कैश के फ्लो को देखता हैं और उस अनुसार कार्य करता हैं |

Treasury मैनेजर के पास zero base बजट होता हैं |

Treasury मैनेजर यह डिसाइड करता हैं की पैसे कहा से आएगा और कहा इन्वेस्ट होगा|

किसी भी कंपनी को देख रेख करने के लिए ये आवश्यक हैं |

सबसे पहले कंपनी की finanacial स्टेटमेंट को ध्यान मे रखना चाहिए |

Treasury मैनेजमेंट को कैश को रखना भी आवश्यक होता हैं और उसका इनवेस्टमेंट भी जरूरी हैं |

इसके लिए कंपनी को उसके soundness को जानना बहुत आवश्यक होता हैं |और इसके लिए financial स्टेटमेंट की स्टडि बहुत जरूरी हैं इसी के अनुसार हम उस पर पैसे लगाते हैं |

किसी भी कार्य को करने के लिए रीज़न या ऑब्जेक्ट होना बहुत आवश्यक हैं zero base बजेटिंग मे यह बहुत आवश्यक हैं सबसे पहले हम देखते हैं की हमारा ऑब्जेक्ट क्या हैं और उस ऑब्जेक्ट को करने का तरीका क्या हैं और कितने प्रकार का हैं और उसमे सबसे अच्छा तरीका क्या हैं और किसमे सबसे कम पैसा लग रहा हैं हम उसको चुनते हैं | यह अक ऐसा टूल हैं जो हम नए तरीके ढुड्ने के लिए किया जाता हैं |

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और हम देखते हैं जैसे हमने प्लान बनाए थे बजट उस अनुसार बने हैं या नही उसका देख रेख जरूरी हैं क्या हम जो कार्य कर रहे हैं वह हमारे प्लान के अनुसार ही हैं या नही यही treasury मैनेजमेंट के टूल हैं और अक अच्छे treasury मैनेजमेंट के लिए यह सब जरूरी हैं |

इंटरनल treasury मैनेजमेंट के लिए सेल्फ इम्प्रोवेमेंट जरूरी होता हैं | देखते हैं पैसा कहा से आ रहा कहा पैसा इन्वेस्ट करना हैं इनफ़्लो और आउट फ्लो को बैलेन्स करते हैं |

Analysis ऑफ डाटा सबसे जरूरी हैं treasury मैनेजर के लिए प्लान करने के लिए और उसके अनुसार कार्य करने के लिए |

अब हम आपको बताएँगे की प्रॉफ़िट सेंटर क्या होता हैं और कॉस्ट सेंटर क्या होता हैं |आये जानते हैं इसके बारे मे – कॉस्ट सेंटर का कार्य खर्चे को कम से कम करना हैं वही प्रॉफ़िट सेंटर का कार्य जादा से जादा प्रॉफ़िट पप्राप्त कर सके | इसमे सभी को decentralization करके ऑब्जेक्ट को ध्यान रखकर टीम बनाते है और उनकी परफॉर्मेंस चेक करते हैं और ऑब्जेक्ट को पूरा करते हैं |

Decentralization मे हमेशा प्रॉफ़िट बजट बनाता हैं |सही समय पर कैश आना चाहिए और सही समय पर जाना भी चाहिए | कैश आने और जाने दोनों मे साम्ञ्जस्य होना चाहिए |और दोनों का समय सही होना चाहिए |और quantity कितनी होनी चाहिए | सही समय क्या होता हैं जब हमे पैसे की आवश्यकता हो उस समय ऐसा उपलब्ध होना चाहिए |treasury मैनेजर इस सबको अच्छे से देख रेख करते रहते हैं जिससे फ़ंड न जादा न कम उपलब्ध हो यहा कैश मे बैंक बैलेन्स को भी शामिल करते हैं | और यहा सही समय सिचुएशन पर निर्भर करती हैं | जैसा की हम कैश मैनेजमेंट मे इसको detailed मे पढ़ते हैं treasury मैनेजमेंट फ़ंड की व्यवस्था करते हैं और इसको निश्चित करते हैं की सही समय पर यह उपलभ्ध हो चाहे यह कंपनी के पास हो या लोन से हो या किसी अन्य व्यवस्था से किया गया हो |

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Treasury मैनेजर को माइक्रो और मैक्रो के बारे मे देखते हैं | सेंट्रल गवर्नमेंट को आरबीआई issue करती हैं और स्टेट गवर्नमेंट को पैसा चाहिए होता हैं तो वो securities लोन पर रख सकता हैं और आरबीआई उसकी हेल्प कर सकता हैं |मैक्रो लेवेल पर आरबीआई देख रेख करती हैं यह सीआरआर और एसआरआर आदि को भी maintain करते हैं और करेंसी चेस्ट maintain करते हैं यह किसी प्राइवेट बैंक का भी हो सकता हैं| treasury मैनेजमेंट के लिए आरबीआई एसएलआर फ़िक्स्ड करता हैं | आरबीआई सेंट्रल गवर्नमेंट का underwriter जैसे कार्य करते हैं और वही स्टेट गवर्नमेंट के लिए ब्रोकर की तरह कार्य करते हैं | मैक्रो मे आरबीआई करेंसी को इशू करती हैं उसको distribute करती हैं और उसके लिए नियम बनाती हैं | वही मैक्रो लेवेल कंपनी स्तर पर कार्य करती हैं जिसमे treasury मैनेजमेंट फ़ंड मैनेजमेंट बन जाती हैं micro लेवल पर कंपनी पर फ़ंड मैनेजर फ़ंड की व्यवस्था करते हैं |

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