INFORMATION TECHNOLOGY ACT 2000 Section 3 to 12


आज हम आपको इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के धारा 3 से 12 तक का विस्तृत ज्ञान प्रदान करेंगे। इससे पहले की धारा को हमने अपनी पहले पोस्ट मे वर्णित की है। इसको पढ़ने से पहले आप उसको देख ले जिससे आपको समझने मे आसानी होगी।

इन्फॉर्मेशन टेक्नालजी सेक्शन 3

Authentication of record –

Authentication की जरूरत हर जगह पड़ता है। सिग्नेचर एक authentication प्रोसैस है।

रिकॉर्ड को authentication करने के लिए डिजिटल सिग्नेचर का प्रयोग होता है और इसका processor भी एलेक्ट्रोनिक होगा।

यह एक कोडिंग सिस्टम के माध्यम से डिजिटल सिग्नेचर को authenticate करता है ।

Algoritham  के दावरा एलेक्ट्रोनिक रिकॉर्ड को produce कर सकते है।

Receiver पब्लिक की के माध्यम से इसको authenticate करते है।

यह की नंबर होता है जो की की मे होता है प्राइवेट की के माध्यम से मैसेज को प्रोसैस करते है और पब्लिक की के द्वारा यह चेक करते है।

उदाहरण –

ए ने य को एक मैसेज भेजा य को यह चेककरना है की यह मैसेज ए का ही है वह ए के द्वारा प्रयोग किया गया प्राइवेट की का प्रयोग को चेक करेगा उसके लिए वह पब्लिक की का प्रयोग कर मैसेज को देखता है जब यह authenticate हो जाता है की यह मैसेज ए का है तो यह validate होगा। यदि वह सिग्नेचर नही verify होगा तब वह invalid हो जाएगा ।

सेक्शन 4 –

Legal recognition of record –

जैसा की आपको इसके पहले के पोस्ट पर इसका डीटेल विस्तार से बता दिया गया है आप इसको वहा से पढ़ सकते है। इसमे यह बताया गया है की कोई सूचना किसी तक पहुँचना है तो क्या वह valid व्यक्ति तक पाहुच रही है इसकी पुस्टी करना आवश्यक है। इसकी पुस्टी के लिए authentication होना आवश्यक है ।चाहे वह एलेक्ट्रोनिक रूप मे दिया गया कोई मैसेज हो। या फिर कोई निर्देश हो जो किसी कार्य हेतु दिया जा रहा हो।

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सेक्शन 5

Legal recognition of signature-

एलेक्ट्रोनिक सिग्नेचर के द्वारा डॉकयुमेंट को कैसे प्रमाणित करेंगे इसमे यह बताया गया है। ऐसी विधि जिसमे यह बतया गया हो की किसी भी सूचना या दिशा निर्देश को बिना प्रमाणित  किए प्राप्त नही किया जा सकता वहा पर सिग्नेचर का प्रयोग डॉकयुमेंट को प्रमाणित करने के लिए किया जाता है ।

इसके अनुसार जैसे बैंक मे चेक लगाने हेतु सिग्नेचर की आवश्यकता होती है बिना सही सिग्नेचर के पैसे नही निकलते वैसे ही डॉकयुमेंट को verify करने के लिए डिजिटल सिग्नेचर की आवश्यकता पड़ती है।

सेक्शन 6

इसके अंतर्गत सभी कार्यालय और प्राधिकरण मे एलेक्ट्रोनिक सूचना मान्य होगी। इसके अंतर्गत यदि किसी विधि के द्वारा कोई सूचना कोई फ़ाइल या कोई दस्तावेज़ जो भी पहले लिखित रूप मे जाती थी वह सब अब एलेक्ट्रोनिक रूप से भी स्वीकार्य किया जाएगा।

कोई भी अनुमोदन, या फिर सरकार द्वारा कोई मंजूरी या फिर कोई विज्ञप्ति विधि द्वारा बताई गयी तरीके से  यानि की एलेक्त्र्निक फॉर्म मे जा सकती है,और वह सभी के द्वारा मान्य होगी ।

कोई भी धन से संबन्धित कार्य एलेक्ट्रोनिक रूप से किया जा सकता है।और इन सभी डॉकयुमेंट को एलेक्ट्रोनिक रूप से सँजो कर रखा जाना चाहिए।

सेक्शन 7

इसके अंतर्गत एलेक्ट्रोनिक चिन्हों के प्रमाण पत्र के बारे मे बताया गया है ।

इसके अनुसार जहा पर यह बताया गया है की एलेक्ट्रोनिक रिकॉर्ड ,डॉकयुमेंट को निश्चित समय तक सजो कर रखा जाना चाहिए तो उसको एलेक्ट्रोनिक रूप मे भी रखा जा सकता है।

इसमे लिखित सूचना का विस्तार इस प्रकार हो की सभी तक आसानी से पहुच सके।

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एलेक्ट्रोनिक रिकॉर्ड को ऐसे रखा जाये की उसकी मूल प्रति नस्ट न हो यानि की उसकी सूचना को ठीक वैसे ही सुरक्षित रखा जाये जैसे की वह पहले थी।

यदि कोई सूचना किसी को भेजी गयी हो या कोई डॉकयुमेंट जिस दिन भेजा गया हो या प्राप्त हुआ हो उसको डेट सहित एलेक्ट्रोनिक फॉर्म मे सुरक्षित रखे।

यदि कोई डॉकयुमेंट एलेक्ट्रोनिक फॉर्म मे उपलब्ध नही है तो उसका मनुयल प्रयोग किया जा सकता है ।

सेक्शन 8

एलेक्ट्रोनिक राजयपत्र मे नियम आदेश आदि का प्रकाशन-

इसके अनुसार यदि किसी राजयपत्र मे किसी नियम आदेश,विनिमय को प्रकाशित किया जाता है। तो प्रकाशित करने की डेट को ही राजयपत्र सूचना की डेट मान ली जाती है।इसमे प्रकाशन की डेट और इयर आदि लिखित होगा।  

सेक्शन 9

इस अधिनियम के अनुसार कोई भी राज्य सरकार या केंद्र सरकार यह नही कहती है की सभी डॉकयुमेंट को एलेक्ट्रोनिक फॉर्म मे ही होना आवश्यक है। यह धारा 6 ,धारा 7 धारा 8 के अनुसार कार्य करने को बताती है परंतु इसके लिए बाध्य नही करती है।

सेक्शन 10

इसमे एलेक्ट्रोनिक चिन्ह बनाने से संबन्धित केंद्र सरकार की शक्तियों का वर्णन किया गया है।

इसमे सरकार एलेक्ट्रोनिक चिन्ह के प्रकार के लिए नियम बना सकती है ।

वह इसके प्रयोग से संबन्धित नियम बना सकती है ।

वह रीति जिसके अनुसार एलेक्ट्रोनिक चिन्ह का प्रयोग किया जाये।

वह विधि जिसके दावरा एलेक्ट्रोनिक चिन्ह को सुगम बनाया जा सकता है।

ऐसी प्रक्रिया जिसके दावरा इसकी वैधता को स्वीकार्य किया जा सके और फ़्रौड से बचा जा सके।

ऐसा नियम जो संविदा के  लिए स्थापित किया गया हो और इसके प्रावधानों को लागू करता हो।

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सेक्शन 11

एलेक्ट्रोनिक अभिलेखो का अधिकार –

यह अधिकार रिसीवर को प्राप्त होगा।

यदि वह इसको खुद के द्वारा पारित किया है।

यदि किसी के द्वरा संदेश भेजा गया हो या उस संदेश का कार्यक्रमित सूचना प्रडाली द्वारा भेजा गया ।

सेक्शन 12

प्राप्ति की स्वीक्रती –

जब यह जरूरी नही होता की अभिलेखो को प्राप्ति एक निश्चित रूप मे उसकी रसीद मिले तो एलेक्ट्रोनिक रूप जरूरी नही होता है।

प्रेषिता दावरा खुद या किसी अन्य व्यक्तियों द्वारा सूचना प्रदान करना

रिसीवर द्वारा किसी आचरण के दावरा प्रेषिता को यह ज्ञात कराता है कि सूचना प्राप्त हो गयी है। प्रेशिता द्वारा भेजे गए संदेशो को संग्रहीत करना आवश्यक है तथा भेजने वाले का डीटेल रखना आवश्यक है ।

रिसीवर को मैसेज रिसीव करने का समय तिथि आदि को इंगित करना जरूरी है,

यह स्पष्ट होना चाहिए कि जो मैसेज भेजा गया है वह आपके लिए ही भेजा गया है।

यदि रिसीवर को प्रेशिता द्वारा भेजा गया मैसेज प्राप्त नही हो रहा है जो की भेज दिया गया है तो उसको नोटिस भेज सकते है और यह माना जाएगा की वह मैसेज कभी भेजा ही नही गया है।

यदि कोई मैसेज निश्चित समय सीमा के लिए भेजा गया है और वह उस समय तक नही पाहुचा है तो नोटिस भेज सकते है और यह मान लिया जाएगा की मैसेज नही भेजा गया है। 

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