भारतीय दंड संहिता धारा 206 से 210  तक का विस्तृत अध्ययन

 जैसा कि आप सभीको ज्ञात होगा इससे पहले की पोस्ट मे भारतीय दंड संहिता धारा 205 तक का विस्तृतअध्ययन करा चुके है यदि आपने यह धाराये नही पढ़ी तो आप उनको पढ़ लीजिये जिससेआपको आगे की धराये समझने मे आसानी होगी।

धारा 206-

इस धारा के अनुसार जब कोई व्यक्ति किसी संपत्ति को और उसमे निहित हित को यदि छिपाएगा या फिर हटाएगा या फिर किसी व्यक्ति को अंतरित या परिदत्त करेगा और यह सूचना देगा कि एतद््द्वारा वह उस संपत्ति या उसमें के किसी हित का ऐसे दंडादेश के अधीन जो न्यायालय या किसी अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा सुनाया जा चुका है ।

या फिर यह जानकारी प्राप्त हो कि न्यायालय या अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा उसका सुनाया जाना संभाव्य है। या फिर समपहरण के रूप में या जुर्माने के चुकाने के लिए लिया जाने वाला ऐसी डिक्री या आदेश के निष्पादन में जो सिविल वाद में न्यायालय द्वारा दिया गया हो या जिसके बारे में वह जानता हो कि सिविल वाद में न्यायालय द्वारा उसका सुनाया जाना संभाव्य है। या फिर उसको लिया जाना निवारित करे। और वह 2 साल की सजा या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है।

धारा 207-

इस धारा के अनुसार जब कोई व्यक्ति किसी संपत्ति को या उसमें के किसी हित कोजिसको की वह जानती है की उस पर उसका कोई हित नही है । या उसपर कपटपूर्वक प्रतिगृहीत करेगा और प्राप्त करेगा या उस पर दावा करेगा अथवा किसी संपत्ति या उसमें के किसी हित पर किसी अधिकार के बारे में इस आशय से दिखावट करेगा कि उसके द्वारा वह उस संपत्ति या उसमें के हित का ऐसे धारा के अधीन जिसमे न्यायालय या किसी अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा सुनाया जा चुका है।

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या जिसके बारे मे न्यायालय या किसी अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा उसका सुनाया जाना संभाव्य है। समपहरण के रूप में या जुर्माने के चुकाने के लिए लिया जाना, या ऐसी डिक्री या आदेश के निष्पादन में, जो सिविल वाद में न्यायालय द्वारा दिया गया हो, या जिसके बारे में वह जानता है कि सिविल वाद में न्यायालय द्वारा उसका दिया जाना संभाव्य हुआ है। और उसको लिया जाना निवारित हुआ और वह 2 साल की सजा या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है।

पी गोपालकृष्णन दिलीप बनाम केरल राज्य के मामले मे न्यायालय ने कहा है की रिपोर्ट या दस्तावेजों के काफी ज्यादा मोटा होने की स्थिति में आरोपी को इन दस्तावेजों को खुद या अपने वकील के माध्यम से देखने की इजाजत दी जा सकती है। इस वाद मे केरल के फिल्म अभिनेता दिलीप ने फरवरी 2017 में केरल की अभिनेत्री के खिलाफ यौन अपराध के मामले में विजुअल्स की कॉपी वापस करने की मांग की थी।जिसमे की अदालत ने यह कहा कि किसी अपराध से संबंधित मेमरी कार्ड के कंटेंट एक ‘दस्तावेज’है। और कोई ‘मटेरियल ऑब्जेक्ट’ नहीं होता है। इसमे अदालत ने सीआरपीसी की धारा 207 केलाभ पर गौर किया जिसमें आरोपी को पुलिस रिपोर्ट की कॉपी और अन्य दस्तावेज देने के प्रावधानों का जिक्र है।

धारा 208-

इस धारा के अनुसार जब कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति के बाद में ऐसी राशि के लिए जिस राशि को ऐसे व्यक्ति को शोध्य न हो या फिर शोध्य राशि से अधिक हो। या किसी ऐसी संपत्ति या संपत्ति में के हित के लिए जिसका ऐसा व्यक्ति हकदार न हो। और वह अपने विरुद्ध कोई डिक्री या आदेश कपटपूर्वक पारित करवाता है या फिर पारित किया जाना सहन करता है । अथवा किसी डिक्री या आदेश को उसके तुष्ट किए जाने के पश्चात् या किसी ऐसी बात के लिए जिसके विषय में उस डिक्री या आदेश की तुष्टि की हो तो वह अपने विरुद्ध कपटपूर्वक निष्पादित करवाता है । या किया जाना सहन करता है तो वह 2 साल की सजा या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है।

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इसका एक उदाहरण इस प्रकार है ।
राम के विरुद्ध एक वाद क संस्थित करता है ।राम यह संभाव्य जानते हुए कि राजा उसके विरुद्ध डिक्री अभिप्राप्त कर लेगा, रानी के वाद में, जिसका उसके विरुद्ध कोई न्यायसंगत दावा नहीं है, अधिक रकम के लिए अपने विरुद्ध निर्णय किया जाना इसलिए कपटपूर्वक सहन करता है कि रानी स्वयं अपने लिए या राम के फायदे के लिए राम की संपत्ति के किसी ऐसे विक्रय के आगमों का अंश ग्रहण करे, जो राजा की डिक्री के अधीन किया जाए । राम ने इस धारा के अधीन अपराध किया है ।

धारा 209-

इस धारा के अनुसार जो कोई व्यक्ति कपटपूर्वक या बेईमानी से या किसी व्यक्ति को क्षति या क्षोभ कारित करने के आशय से न्यायालय में कोई ऐसा दावा करेगा, जिसका मिथ्या होना तय है या फिर वह जानता है की यह मिथ्या है तो वह 2 साल की सजा या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है।

धारा 210 –

इस धारा के अनुसार जो कोई किसी व्यक्ति के विरुद्ध ऐसी राशि के लिए, जो शोध्य न हो, या जो शोध्य राशि से अधिक हो, या किसी संपत्ति या संपत्ति में के हित के लिए, जिसका वह हकदार न हो, डिक्री या आदेश कपटपूर्वक अभिप्राप्त कर लेता है। या फिर किसी डिक्री या आदेश को जो ऐसे डिक्री या आदेश है जो उसके तुष्ट कर दिए जाने के पश्चात् या ऐसी बात के लिए जिसके विषय में उस डिक्री या आदेश की तुष्टि कर दी गई हो। वह किसी व्यक्ति के विरुद्ध कपटपूर्वक निष्पादित करवाता या अपने नाम में कपटपूर्वक ऐसा कोई कार्य किया जाना सहन करेगा या किए जाने की अनुज्ञा देगा । तब वह 2 साल की सजा या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है।

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