भारतीय दंड संहिता धारा 211 से 214 तक का विस्तृत अध्ययन

जैसा कि आप सभीको ज्ञात होगा इससे पहले की पोस्ट मे भारतीय दंड संहिता धारा 205  तक का विस्तृत अध्ययन करा चुके है यदि आपने यह धाराये नही पढ़ी है तो आप उनको पढ़ लीजिये जिससेआपको आगे की धराये समझने मे आसानी होगी।

धारा 211

इस धारा के अनुसार क्षति करने के आशय से अपराध का मिथ्या आरोप लगाया जाना बताया गया है।

इस धारा के अनुसार यदि  किसी व्यक्ति को यह जानते हुए कि उस व्यक्ति के विरुद्ध ऐसी कार्यवाही या आरोप के लिए कोई न्यायसंगत या विधिपूर्ण आधार नहीं है। फिर भी  क्षति कारित करने के आशय से उस व्यक्ति के विरुद्ध कोई दांडिक कार्यवाही संस्थित करेगा या करेगा या उस व्यक्ति पर मिथ्या आरोप लगाया कि उसने अपराध किया है। तब  वह दोनों में से किसी भांति के कारावास की  दो वर्ष तक की हो सकती है ।  या जुर्माने से।  या दोनों से। दंडित किया जा सकता है।

और  ऐसी दांडिक कार्यवाही में मृत्यु या आजीवन कारावास या सात वर्ष या उससे अधिक के कारावास से दंडनीय अपराध के मिथ्या आरोप लगाया जाये तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से जो की  सात  वर्ष तक की हो सकती है ।  या जुर्माने से।  या दोनों से। दंडित किया जा सकता है।

धारा 212

इस धारा के अनुसार अपराधी को संश्रय देना शामिल होता है।
यदि कोई अपराध किया जा चुका है और  तब जो कोई किसी ऐसे व्यक्ति को जिसके बारे में वह जानता हो या विश्वास करने का कारण रखता हो कि वह अपराधी है। और फिर भी उसको  वैध दंड से प्रतिच्छादित करने के आशय से संश्रय देगा या छिपाएगा।

यदि छिपाया गया अपराधी का अपराध मृत्यु से दंडनीय हो तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से जो की  पाँच वर्ष तक की हो सकती है ।  या जुर्माने से।  या दोनों से। दंडित किया जा सकता है।

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यदि छिपाया गया अपराध आजीवन कारावास से या कारावास से दंडनीय हो तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से जो की तीन  वर्ष तक की हो सकती है ।  या जुर्माने से।  या दोनों से। दंडित किया जा सकता है।

और यदि वह अपराध एक वर्ष तक के कारावास से दंडनीय हो  न कि दस वर्ष तक के कारावास से दंडनीय हो तो वह उस अपराध के लिए उपबंधित भांति के कारावास से, जिसकी अवधि उस अपराध के लिए उपबंधित कारावास की दीर्घतम अवधि की एक चौथाई भाग  तक की हो सकेगी या फिर जुर्माने से या दोनों से दंडित किया जाएगा ।

 धारा 212  में “अपराध’ के अंतर्गत भारत से बाहर किसी स्थान पर किया गया ऐसा कार्य आता है।  जो कि  यदि भारत में किया जाता तो यह धारा उस पर लागू होती जैसे – 302, 304, 382, 392, 393, 394, 395, 396, 397, 398, 399, 402, 435, 436, 449, 450, 457, 458, 449 और 460 में से किसी धारा के अधीन दंडनीय होता।  और हर एक ऐसा कार्य इस धारा के प्रयोजनों के लिए ऐसे दंडनीय समझा जाएगा मानो अभियुक्त व्यक्ति उसे भारत में ही करने का दोषी था ।

इसका अपवाद पति या पत्नी द्वारा अपराधी को छिपाया गया शामिल नही किया जाता है।

धारा 213

इस धारा के अनुसार अपराधी को दंड से प्रतिच्छादित करने के लिए उपहार आदि लेना शामिल होता है।
जो कोई अपने या किसी अन्य व्यक्ति के लिए कोई परितोषण या अपने या किसी अन्य व्यक्ति के लिए किसी संपत्ति का प्रत्यास्थापन या फिर  किसी अपराध के छुपाने के लिए या किसी व्यक्ति को किसी अपराध के लिए वैध दंड से प्रतिच्छादित करने के लिए या किसी व्यक्ति के विरुद्ध वैध दंड दिलाने के प्रयोजन से उसके विरुद्ध की जाने वाली कार्यवाही न करने के लिए प्रतिफल स्वरूप कुछ भेट या उप हार लेता है या  अभिप्राप्त करने का प्रयत्न करेगा या प्रतिगृहीत करने के लिए करार करेगा तो –

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यदि अपराध मृत्यु से दंडनीय हो तो ऐसे वाद मे यदि वह अपराधी से कुछ लेता है।  तो वह वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से जो की सात  वर्ष तक की हो सकती है ।  या जुर्माने से।  या दोनों से। दंडित किया जा सकता है।

यदि आजीवन कारावास या कारावास से दंडनीय होतो उसे वाद मे यदि वह अपराधी से कुछ लेता है।  तो वहवह दोनों में से किसी भांति के कारावास से जो की तीन वर्ष तक की हो सकती है ।  या जुर्माने से।  या दोनों से। दंडित किया जा सकता है

तथा यदि वह अपराध दस वर्ष से कम तक के कारावास से दंडनीय होत है।  तो वह उस अपराध के लिए उपबंधित भांति के कारावास सेउस  अवधि के लिए जो उस अपराध के लिए उपबंधित कारावास की दीर्घतम अवधि की एक चौथाई तक की डो सकेगी या जुर्माने से या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।

धारा 214

इस धारा के अनुसार अपराधी के प्रतिच्छेदन के प्रतिफल स्वरूप उपहार की प्रस्थापना या संपत्ति का प्रत्यावर्तन को बताया गया है।
जब किसी व्यक्ति के द्वारा  किसी व्यक्ति को कोई अपराध उस व्यक्ति द्वारा छिपाए जाने के लिए या उस व्यक्ति द्वारा किसी व्यक्ति को किसी अपराध के लिए वैध दंड से प्रतिच्छादित किए जाने के लिए या उस व्यक्ति द्वारा किसी व्यक्ति को वैध दंड दिलाने के प्रयोजन से उसके विरुद्ध की जाने वाली कार्यवाही न की जाने के लिए प्रतिफल स्वरूप कोई लाभ  देगा या दिलाएगा या देने का प्रयास करेगा  या दिलाने की प्रस्थापना या करार करेगा या फिर किसी संपत्ति प्रत्यावर्तित करेगा । तो –

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यदि अपराध मृत्यु से दंडनीय हो तो ऐसे वाद मे यदि वह अपराधी से कुछ लेता है।  तो वह वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से जो की सात  वर्ष तक की हो सकती है ।  या जुर्माने से।  या दोनों से। दंडित किया जा सकता है।

यदि आजीवन कारावास या कारावास से दंडनीय होतो ऐसे बाद मे यदि वह अपराधी से कुछ लेता है।  तो वह वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से जो की तीन वर्ष तक की हो सकती है ।  या जुर्माने से।  या दोनों से। दंडित किया जा सकता है
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तथा यदि वह अपराध दस वर्ष से कम तक के कारावास से दंडनीय होत है।  तो वह उस अपराध के लिए उपबंधित भांति के कारावास से इतनी अवधि के लिए जो उस अपराध के लिए उपबंधित कारावास की दीर्घतम अवधि की एक चौथाई तक की हो सकती है।  या जुर्माने से या दोनों से दंडित किया जा सकता है। |

अपवाद-

यह धारा ऐसे मामलों मे लागू नही होती  जिससे कि अपराध का शमन विधि पूर्वक किया जा सकता है।

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