भारतीय दंड संहिता धारा 253 से 260 तक का विस्तृत अध्ययन

जैसा कि आप सभी को ज्ञात होगा इससे पहले की पोस्ट मे भारतीय दंड संहिता धारा 252  तक का विस्तृत अध्ययन करा चुके है यदि आपने यह धाराएं नहीं पढ़ी तो आप उनको पढ़ लीजिये जिससे आपको आगे की धाराएं समझने में आसानी होगी।

धारा 253 –

इस धारा के अनुसार  जो कोई  व्यक्ति कपटपूर्वक कोई कार्य करता है।  या इस आशय से कि कपट करता है कि ऐसे सिक्के को कब्जे में रखेगा, जिसके बारे में धारा 247 या 249 में से किसी में परिभाषित अपराध किया गया हो और जो उस समय जिस समय   वह सिक्का उसके कब्जे में आया था। उस समय  यह जानता था कि उस सिक्के के बारे में ऐसा अपराध किया गया है। वह 5 वर्ष तक के कारावास जो साधारण या कठोर हो सकता है । या फिर जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है।

धारा 254  –

इस धारा के अनुसार सिक्के का असली सिक्के के रूप में परिदान जिसका परिदान करने वाला उस समय जब वह उसके कब्जे में पहली बार आया था। उसका  परिवर्तित होना नहीं जानता था बताया गया है।

जो कोई व्यक्ति  किसी दूसरे व्यक्ति को कोई ऐसा  सिक्का जिसके बारे में वह जानता हो कि कोई ऐसी क्रिया  जैसी धारा 246, 247, 248 या 249 में वर्णित है। इस प्रकार की क्रिया की जा चुकी है।  किन्तु जिसके बारे में वह उस समय, जब उसने उसे अपने कब्जे में लिया था। तब वह  यह न जानता था कि उस पर ऐसी क्रिया कर दी गई है।

See Also  भारतीय दंड संहिता धारा 109 से 118 तक का विस्तृत अध्ययन

वह  असली के रूप में, या जिस प्रकार का वह है उससे भिन्न प्रकार के सिक्के के रूप में, परिदत्त करेगा या असली के रूप में या जिस प्रकार का वह है उससे भिन्न प्रकार के सिक्के के रूप में, किसी व्यक्ति को उसे लेने के लिए उत्प्रेरित करने का प्रयत्न करेगा  वह 2  वर्ष तक के कारावास जो साधारण या कठोर हो सकता है । या फिर जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है।  जो उस सिक्के की कीमत के दस गुने तक का हो सकेगा  जिसके बदले में परिवर्तित सिक्का चलाया गया हो या चलाने का प्रयत्न किया गया हो। उससे  दंडित किया जाएगा ।

धारा 255  –

इस धारा के अनुसार सरकारी स्टाम्प का कूटकरण को बताया गया है।इस धारा के अनुसार  जो कोई सरकार के  द्वारा राजस्व के प्रयोजन के लिए प्रचलित किसी स्टाम्प का कूटकरण करेगा या जानते हुए उसके कूटकरण की प्रतिक्रिया  के किसी भाग को करेगा तो  वह  10  वर्ष तक के कारावास जो साधारण या कठोर या आजीवन कारावास  हो सकता है । या फिर जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है।

स्पष्टीकरण–वह व्यक्ति इस अपराध को करता है।  जो एक अभिधान के किसी असली स्टाम्प को भिन्न अभियान के असली स्टाम्प के समान दिखाई देने वाला बना कर कूटकरण करता है ।

धारा 256 –

इस धारा के अनुसार सरकारी स्टाम्प के कूटकरण के लिए उपकरण या सामग्री कब्जे में रखना बताया गया है।  जो कोई सरकार के द्वारा राजस्व के प्रयोजन के लिए प्रचलित किसी भी स्टाम्प के कूटकरण के लिए उपयोग में लाए जाने के प्रयोजन से जिसने की  या यह जानते हुए या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए कि वह ऐसे कूटकरण के लिए उपयोग में लाए जाने के लिए आशयित है। इस प्रकार का  कोई उपकरण या सामग्री अपने कब्जे में रखेगा तो  वह  7  वर्ष तक के कारावास जो साधारण या कठोर या आजीवन कारावास  हो सकता है । या फिर जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है।

See Also  भारतीय दंड संहिता धारा 125 से 131 तक का विस्तृत अध्ययन

धारा 257-

इस धारा के अनुसार सरकारी स्टाम्प के कूटकरण के लिए उपकरण बनाना या बेचना बताया गया है। जो कोई सरकार के द्वारा राजस्व के प्रयोजन के लिए प्रचलित किसी स्टाम्प के कूटकरण के लिए उपयोग में लाए जाने के प्रयोजन से या फिर  यह जानते हुए या यह विश्वास करने का जो की 1955 के अधिनियम संख्या  26 की धारा 117 और अनुसूची द्वारा आजीवन निर्वासन के स्थान पर प्रतिस्थापित किया गया जिसके लिए यह कारण रखते हुए कि वह ऐसे कूटकरण के लिए उपयोग में लाए जाने के लिए आशयित है। की  कोई उपकरण बनाना या बनाने की प्रक्रिया  के किसी भाग को करेगा या ऐसे किसी उपकरण को खरीदें या बेचें या व्ययनित करेगातो   वह  7  वर्ष तक के कारावास जो साधारण या कठोर या आजीवन कारावास  हो सकता है । या फिर जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है।

धारा 258-

इस धारा के अनुसार कूटकृत सरकारी स्टाम्प का विक्रय को बताया गया है। जो कोई किसी स्टाम्प को यह जानते हुए या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए बेचेगा या बेचने की प्रस्थापना करेगा कि वह सरकार द्वारा राजस्व के प्रयोजन के लिए प्रचलित किसी स्टाम्प की कूट कृति है। तो वह 7  वर्ष तक के कारावास जो साधारण या कठोर या आजीवन कारावास  हो सकता है । या फिर जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है।

धारा 259-

इस धारा के अनुसार सरकारी कूटकृत स्टाम्प को कब्जे में रखना आदि को बताया गया है। जो कोई असली स्टाम्प के रूप में उपयोग में लाने के या व्ययन करने के आशय से या  फिर इसलिए कि वह असली स्टाम्प के रूप में उपयोग में लाया जा सके। या फिर  किसी ऐसे स्टाम्प को अपने कब्जे में रखेगा जिसे वह जानता है कि वह सरकार द्वारा राजस्व के प्रयोजन के लिए प्रचलित स्टाम्प की कूट कृति है। तो वह 7  वर्ष तक के कारावास जो साधारण या कठोर या आजीवन कारावास  हो सकता है । या फिर जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है।

See Also  वस्तु विक्रय अधिनियम 1930- एक परिचय

धारा 260-

इस धारा के अनुसार किसी सरकारी स्टाम्प को, कूटकृत जानते हुए उसे असली स्टाम्प के रूप में उपयोग में लाना को बताया गया है। जो कोई किसी ऐसे स्टाम्प को, जिसे वह जानता है कि वह सरकार द्वारा राजस्व के प्रयोजन के लिए प्रचलित स्टाम्प की कूट कृति है।  असली स्टाम्प के रूप में उपयोग में लाएगा तो वह 7  वर्ष तक के कारावास जो साधारण या कठोर या आजीवन कारावास  हो सकता है । 

Leave a Comment