भारतीय दंड संहिता धारा 275 से 283 तक का विस्तृत अध्ययन

IPC Section 275 to 283- Hindi Law Notes

जैसा कि आप सभी को ज्ञात होगा इससे पहले की पोस्ट मे भारतीय दंड संहिता धारा 274  तक का विस्तृत अध्ययन करा चुके है।  यदि आपने यह धाराएं नहीं पढ़ी तो आप उनको पढ़ लीजिये जिससे आपको आगे की धाराएं समझने में आसानी होगी।

धारा 275

इस धारा के अनुसार दवाओं मे मिलावट को बताया गया है। इसके अनुसार जो कोई व्यक्ति यह जानते हुए कि किसी औषधि या भेषजीय निर्मिति में इस प्रकार से अपमिश्रण किया गया है कि उसकी प्रभावकारिता कम हो गई या उसकी प्रक्रिया बदल गई है।  या फिर  वह अपायकर बन गई है। फिर भी  उसे बेचेगा या बेचने की प्रस्थापना करेगा या बेचने के लिए अभिदर्शित करेगा।  तो ऐसे स्थिति मे वह  किसी औषधालय से औषधीय प्रयोजनों के लिए उसे अपने मिश्रा के तौर पर देता है  या फिर  उसका अपमिश्रित होना न जानने वाले व्यक्ति द्वारा औषधीय प्रयोजनों के लिए उसका उपयोग करता है। तो  वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से जो की छः माह तक कारावास अथवा एक हजार रुपये तक जुर्माना अथवा दोनों  हो सकता है। यह एक जमानती, गैर-संज्ञेय अपराध है और किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।तथा यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है।

धारा 276 –

इस धारा के अनुसार औषधि का भिन्न औषधि या निर्मिति के तौर पर विक्रय को बताया गया है। जो कोई किसी औषधि या भेषजीय निर्मित पदार्थ को भिन्न औषधि या भेषजीय निर्मिति के तौर पर यह ज्ञात होते  हुए बेचेगा या बेचने की प्रस्थापना करेगा या बेचने के लिए अभी दर्शन करेगा या औषधीय प्रयोजनों के लिए औषधालय से देगा तो  वह दोनों में से किसी भी भांति के कारावास से जो की  छह मास तक की हो सकेगी या  फिर जुर्माने से  जिसकी अवधि 6 माह और एक हजार रुपए तक का हो सकेगा उससे  दंडित किया जाएगा ।

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धारा 277-

इस धारा के अनुसार जो कोई व्यक्ति किसी भी लोक जल-स्रोत या जलाशय के जल को स्वेच्छया से  इस प्रकार भ्रष्ट या लक्षित करेगा कि वह इस प्रयोजन के लिए जिसके लिए वह मामूली तौर पर उपयोग में आता है इसकी उपयोगिता  कम  हो जाए तो ऐसे स्थिति मे  वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से जो की  तीन मास तक की हो सकेगी या  फिर जुर्माने से जो  की पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा या  फिर दोनों से दण्डित किया जाएगा ।

धारा 278-

इस धारा के अनुसार  जब कभी जो कोई व्यक्ति  किसी स्थान के वायुमण्डल को स्वेच्छया से इस प्रकार दूषित करेगा कि वह जनसाधारण के स्वास्थ्य के लिए जो पड़ोस में निवास या फिर कारोबार करता   हों और वह लोक मार्ग से आते जाते हों अपायकर बन जाए तो  वह जुर्माने से जो  की पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा उससे दंडित किया  जा सकता है।

धारा 279-

इस धारा के अनुसार जो भी कोई किसी वाहन को एक सार्वजनिक मार्ग पर किसी भी तरह की जल्दबाजी या लापरवाही से चलाता है।  या फिर उसकी  सवारी करता है। या फिर  जिससे मानव जीवन को कोई संकट हो या किसी व्यक्ति को चोट या आघात पहुचाने जाने की संभावना होती है। , तो ऐसे स्थित मे  उसको दोनों प्रकार के कारावास जिसे छह महीने तक बढ़ाया जा सकता है।  या आर्थिक दंड जो एक हजार रुपए तक हो सकता है।  या फिर दोनों से दंडित किया जाएगा।यह एक जमानतीतथा  संज्ञेय अपराध है।  और किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।तथा यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है।

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धारा 280-

इस धारा के अनुसार जलयान का उतावलेपन से चलाना बताया गया है। इस धारा के अनुसार जो कोई किसी भी जलयान को ऐसे उतावलेपन या उपेक्षा से चलाएगा जिससे की  मानव जीवन संकटापन्न हो जाए या किसी अन्य व्यक्ति को उपहति या क्षति कारित होना सम्भाव्य हो जाता है तो ऐसे स्थित मे  वह दोनों में किसी भी  भांति के कारावास से जो की छह मास तक की हो सकेगी ।  या फिर  जुर्माने से जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा या फिर दोनों से दण्डित किया जाएगा ।

धारा 281 –

इस धारा के अनुसार भ्रामक प्रकाश, चिन्ह या बोये का प्रदर्शन को बताया गया है।
इसके अनुसार जो भी  कोई किसी भ्रामक प्रकाश, चिन्ह या बोये का प्रदर्शन इस आशय सेकरता है ।  या  फिर  वह यह सम्भाव्य जानते हुए करता है  कि ऐसा प्रदर्शन किसी नौपरिवाहक को मार्ग भ्रष्ट कर देगा। तो ऐसे स्थित मे उसको 7 साल की सजा और जुर्माना या फिर दोनों दिया जा सकता है।

धारा 282-

इस धारा के अनुसार जो कोई किसी व्यक्ति को किसी जलयान में जलमार्ग से यह  जानते हुए या उपेक्षापूर्वक भाड़े पर तब प्रवहण करेगा या फिर कराएगा जब वह जलयान ऐसी दशा में हो या इतना लदा हुआ हो जिससे उस व्यक्ति का जीवन संकटापन्न हो सकता हो तो  ऐसे स्थित मे  वह दोनों में किसी भी  भांति के कारावास से जो की छह मास तक की हो सकेगी ।  या फिर  जुर्माने से जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा या फिर दोनों से दण्डित किया जाएगा ।

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धारा 283-

इस धारा के अनुसार  जो भी कोई किसी कार्य को करके या अपने अधीन किसी संपत्ति के कब्जे या प्रभार के तहत किसी आदेश का लोप करने के  द्वारा या फिर  किसी लोकमार्ग या नौपरिवहन के लोक पथ में किसी व्यक्ति को संकट या  फिर किसी भी प्रकार से  बाधा या क्षति कारित करता है तो  उसको दो सौ रुपये तक के आर्थिक दण्ड से दण्डित किया जा सकता है।

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