भारतीय दंड संहिता धारा 305 से 310 तक का विस्तृत अध्ययन

IPC Section 305 to 310- Hindi Law Notes

जैसा कि आप सभी को ज्ञात होगा इससे पहले की पोस्ट मे भारतीय दंड संहिता धारा 304  तक का विस्तृत अध्ययन करा चुके है यदि आपने यह धाराएं नहीं पढ़ी तो आप उनको पढ़ लीजिये जिससे आपको आगे की धाराएं समझने में आसानी होगी।

धारा 305 –

इस धारा मे शिशु या उन्मत्त व्यक्ति की आत्महत्या का दुष्प्रेरण को बताया गया है। इस धारा के अनुसार यदि कोई नाबालिग जिसकी आयु अठारह वर्ष से कम होती है और वह  उन्मत्त, भ्रांतचित्त, मूर्ख व्यक्ति, या कोई व्यक्ति जो नशे की अवस्था में है। और ऐसे स्थित मे  आत्महत्या कर ले तो जो भी कोई ऐसी आत्महत्या के किए जाने का दुष्प्रेरण करेगा।  वह मॄत्युदण्ड, या आजीवन कारावास या कारावास से दंडित किया जाएगा  जिसकी अवधि दस वर्ष से अधिक की न हो सकेगी।  तथा  जुमाने से भी दण्डनीय होगा ।
तो उसे मॄत्युदण्ड या आजीवन कारावास या किसी एक अवधि के लिए कारावास जिसे अधिकतम दस वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।  और साथ ही आर्थिक दण्ड से दण्डित किया जाएगा।

धारा 306 –

इस धारा मे आत्महत्या का दुष्प्रेरण को बताया गया है। यदि कोई व्यक्ति आत्महत्या कर लेता है। तो इस दशा मे   जो भी इस तरह की आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करता / उकसाता है।  तो उसे किसी एक अवधि के लिए  कारावास या कारावास से दंडित किया जाएगा  जिसकी अवधि दस वर्ष से अधिक की न हो सकेगी।  तथा  जुमाने से भी दण्डनीय होगा ।

अमलेंदु पाल बनाम पश्चिम बंगाल राज्य (2010) 1 एससीसी 707 के एक वाद के अनुसार –

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एक मामले को लाने के लिएजिसमे  आत्महत्या का मामला निश्च‌ित रूप से होना चाहिए और उक्त अपराध को बनाने के लिए।  जिस व्यक्ति के बारे में कहा जाता है कि उसने आत्महत्या के लिए प्रेरित किया है यदि उसने सक्रिय भूमिका निभाई हो तथा घटना के दरमियान अभियुक्त की ओर से किसी सकारात्मक कार्रवाई के बिना केवल परेशान करना जिसके कारण आत्महत्या हुईहै तो यह  धारा 306 IPC के तहत अपराध नहीं माना जाएगा।

चित्रेश कुमार चोपड़ा बनाम राज्य (NCT दिल्ली सरकार)

किसी व्यक्ति द्वारा उकसाना तब कहा जाता है।  जब कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को कुछ करने के लिए कहता है और उकसाने का अनुमान तब लगाया जा सकता था। जब आरोपी अपने कृत्यों से ऐसी परिस्थितियां पैदा करता है कि मृतक के पास आत्महत्या के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता तो इसको इस धारा मे शामिल किया जाता है।

धारा 307 –

इस धारा मे हत्या का प्रत्यन करने के लिए दण्ड को बताया गया है।  किसी व्यक्ति  द्वारा किसी अन्य व्यक्ति की हत्या करने का प्रयास करना इस धारा के अंतर्गत आता है एवं इसमें धारा 307 में हत्या करने के प्रयास के लिए दंड के प्रावधान दिए गए हैं।इसके अनुसार  सजा के प्रावधान सिर्फ उसी के लिए हैं जिसने किसी व्यक्ति का हत्या करने का प्रयत्न किया हो । ना की हत्या के लिये ये सिर्फ हत्या करने का प्रत्यन करने वाले पर है लागू होगी।

इस धारा के अनुसार हत्या करने के प्रयास में यदि किसी व्यक्ति को किसी भी चोट के लिए कार्रवाई का परिणाम दिखता है ।  तो अपराधी को एक समय अवधि के लिए कैद किया जाएगा जो 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक हो सकता है। तथा यह  जुर्माने के साथ भी हो सकता है।

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धारा 308 –

इस धारा के अनुसार गैर इरादतन हत्या करने का प्रयास को बताया गया है। जो भी कोई इस तरह के इरादे या बोध के साथ ऐसी परिस्थितियों में कोई कार्य करता है, जिससे वह किसी की मृत्यु का कारण बन जाता है।  तो वह गैर इरादतन हत्या जो हत्या की श्रेणी मे नही आता है उसका   दोषी होगा।  और उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास जिसे तीन वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।  या आर्थिक दंड, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।

यदि इस तरह के कृत्य से किसी व्यक्ति को चोट पहुँचती है। तो अपराधी को किसी एक अवधि के लिए कारावास जिसे सात वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।  या आर्थिक दंड या दोनों से दण्डित किया जाएगा।

यदि इस तरह के कृत्य से किसी भी व्यक्ति को चोट पहुँचती है। तो उस दशा मे उसको 7 वर्ष कारावास या आर्थिक दंड या दोनों से दंडित किया जा सकता है।
यह एक गैर-जमानती, संज्ञेय अपराध है और सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है।

धारा 309 –

इस धारा के अनुसार जो भी कोई आत्महत्या करने का प्रयत्न करेगा तथा   उस अपराध के करने के लिए कोई कार्य करेगा तो उसे किसी एक अवधि के लिए सादा कारावास से जिसको की एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।  या आर्थिक दण्ड से  या दोनों से दण्डित किया जाएगा।
यह एक जमानती, संज्ञेय अपराध है और किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।तथा यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है।

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धारा 310 –

इस धारा मे ठग को बताया गया है। जो कोई इस अधिनियम के पारित होने के पश्चात् किसी समय हत्या द्वारा या हत्या सहित लूट या शिशुओं की चोरी करने के प्रयोजन के लिए अन्य व्यक्ति या अन्य व्यक्तियों से स्वभावतः संबद्ध रहता है वह ठग कहलाता है। तथा जो कोई ठग होगा उसके लिए अपराध लागू किया गया है एवं आजीवन कारावास से दंडित किया जाएगा तथा साथ ही साथ  जुर्माने से भी दंडनीय होगा।
यह अपराध संज्ञेय अपराध एवं अजमानती है और किसी भी सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है।
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