Membership Company Act 2013

सेक्शन 2 (55) के अनुसार मेंबरशिप को परिभाषित किया गया है। 

वह subscriber जिसका नाम memorandam of association मे लिखा गया है वह कंपनी का पहला मेंबर है। और इनका नाम रजिस्टर ऑफ मेंबर मे लिखा होता है। 

प्रत्येक वह व्यक्ति जो कि लिखित रूप से कंपनी का मेंबर, बनने के लिए तैयार हो और उसका नाम कंपनी के रजिस्टर ऑफ मेंबर मे लिखा गया है। 

ऐसा व्यक्ति जो कंपनी के शेयर ख़रीदा हो और उसका नाम कंपनी के मेंबर्स के रजिस्टर मे लिखा गया हो। 

Memorandam of association के द्वारा subscribe करने वाले मेंबर्स की प्रक्रिया –

1 subscribers कंपनी के प्रमोटर के द्वारा चुने गए ही हो। 

2 subscriber को private कंपनी मे कम से कम 2 और public कंपनी में 7 subscriber को कम से कम 1 शेयर लेना आवश्यक है। 

3 subscriber को अपना नाम पता और signature आदि सभी डीटेल कंपनी को देनी होती है। 

4 रजिस्ट्रेशन के दौरान subscriber ही कंपनी के मेंबर बन जाते हैं। 

5 subscriber कंपनी के शेयर के बदले मे कंपनी को पैसे देते है। 

6 कंपनी के रजिस्ट्रेशन के बाद subscriber का नाम कंपनी के मेंबर्स रजिस्टर मे लिखा जाता है। 

सेक्शन 19 कंपनी एक्ट 2013

कोई भी कंपनी खुद या अपने किसी नॉमिनी के द्वारा अपनी होल्डिंग कंपनी का शेयर नही ले सकती है। और न ही होल्डिंग कंपनी अपने कोई भी शेयर अपनी सब्सडरी कंपनी को दे सकती है। और ऐसा कोई भी अलोटमेंट जो सब्सडरी कंपनी को किया गया है void होता है। 

यह इन सब पर लागू नही होता है। 

जब सब्स्ड़ियरी कंपनी होल्डिंग कंपनी के शेयर रिप्रेजेंटेटिव बन कर ले लेती है तो यह लागू नही होता है।

जब सबस्डियरी कंपनी ट्रस्टी के रूप मे शेयर को लेती है तो यह लागू नही होता।

जब सब्स्ड़ियरी कंपनी शेयर होल्डेर्स के रूप मे कार्य करे चाहे वह कंपनी पहले या बाद मे सब्स्ड़ियरी कंपनी बनी हो।

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मेम्बर्स कैसे बनते है।

1 memorandum को subscribe करके-

Memorandum के subscriber को मेम्बर्स मान लिया जाता है। उसके लिए यह आवश्यक नही है कि वह कंपनी का एक भी शेयर होल्ड करता है या नही। और उसको लिखित रूप मे मेम्बर बनने के लिए कोई प्रार्थना पत्र भी देने कि आवश्यकता नही होती हैं।

2 शेयर के अलॉट्मेंट के द्वारा –

जब किसी भी व्यक्ति को शेयर दिया जाता है तो वह उस शेयर का होल्डर होता है वह मेम्बर्स तभी बन सकता है जब उसका नाम कंपनी के रजिस्टर ऑफ मेम्बर्स मे लिखा गया हो।

3 ट्रान्सफर के द्वारा –

वह व्यक्ति जिसको शेयर ट्रान्सफर किया गया हो अर्थात ट्रांसफ़री तभी मेम्बर्स बन सकता है जब ट्रान्सफर किया हुआ शेयर पहले रजिस्टर ऑफ मेम्बर्स मे लिखा रहा हो और ट्रान्सफर के बाद ट्रांसफ़री भी उस को अपना नाम रजिस्टर ऑफ मेम्बर्स मे दर्ज कराये ।

4 ट्रांसमिसन के द्वारा –

कोई व्यक्ति ट्रांसमिसन के द्वारा तभी मेम्बर बन सकता है जब वह अपना नाम रजिस्टर ऑफ मेम्बर्स मे दर्ज कराये।

5 शेयर को खरीद करके-

वह शेयर होल्डेर्स जिसका नाम डिपॉज़िटरी के पास लिखित रूप मे है वह कंपनी का मेम्बर कहलाता है।

6 estoppels के द्वारा –

वह व्यक्ति जिसका नाम रजिस्टर ऑफ मेम्बर मे लिखा हुआ है और उसने कभी इस बात पर कोई विरोध नही किया है वह एस्टोप्पेल्स कहलाएगा।

मैम्बरशिप को खत्म कैसे किया जा सकता है-

शेयर को सरैंडर करके

शेयर को ट्रान्सफर करके

शेयर के ट्रांसमिसन के द्वारा

शेयर को बेच करके

शेयर को वापस ले कर

मेम्बर्स कौन बन सकता है ?

1 MINOR

ऐसा कोई भी नियम नही है कि minor कंपनी का मेम्बर नही बन सकता है परंतु मेम्बर बनने के लिए उसको कंपनी के fully paid up  शेयर लेने होंगे और minor कि उसपर कोई ज़िम्मेदारी नही होगी।

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कंपनी यदि शेयर minor को देती है तो कंपनी के क्या दायित्व है।

यदि कंपनी किसी minor को मेजोरिटी को ध्यान मे रखकर शेयर नही देती है तो उसके निम्न दायित्व होंगे।

1 minor बकाया का कोई भी कॉल मनी देने के लिए बाध्य नही है।

2 minor के guardian का भी बकाया राशि देने के लिए उत्तरदायी नही है।

3 यदि minor को शेयर नही दिया गया या वह शेयर नही लेना चाहता है तो वह जमा राशि को वापस मांग सकते है।

4  यदि कंपनी minor को शेयर नही allot करती है तो वह बाकी राशि को वापस ले सकता है।

2 COMPAY

कोई भी कंपनी किसी दूसरे कंपनी कि मेम्बर हो सकती है यदि कंपनी कि memorandum ऑफ association ऐसा करने के लिए मान्य होता है तो वह दूसरे कंपनी के शेयर खरीद सकती है । कोई कंपनी खुद अपनी कंपनी की मेम्बर नही बन सकती है । कोई सबस्डियरी कंपनी अपनी होल्डिंग कंपनी की मेम्बर नही बन सकती है।

अपवाद –

यदि सबस्डियरी कंपनी सब्स्ड़ियरी बनने के पहले ही किसी कंपनी की मेम्बर है तो वह इसको जारी रख सकती है। लेकिन उसको वोट करने की पावर नही होगी ।

3 COPERATIVE SOCIETY –

Cooperative society एक लीगल पर्सन होती है और उसको प्रॉपर्टि रखने का अधिकार होता है। और वह किसी कंपनी की मेम्बर बन सकती है । सोसाइटी तभी किसी कंपनी की मेम्बर बन सकती है जब वह सोसाइटीएक्ट मे रजिस्टर होगी।

4 TRADE UNION

 ऐसा ट्रेड यूनियन जो ट्रेड यूनियन एक्ट मे रजिस्टर्ड है वह एक लीगल पर्सन होगा और मेम्बर बन सकता है। क्योकि वह भी प्रोपेटी खरीद और रख सकता है।

5 फ़र्म

फ़र्म लीगल पर्सन नही होता है। वह खुद के नाम से प्रोपेर्टी नही खरीद और रख सकता है वह अपने पार्टनर के नाम से प्रोपेर्टी खरीद सकता है अतः वह मेम्बर नही बन सकता है ।

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6 HUF

HUF की अपनी कोई अलग identity नही होती है एसलिए वह कंपनी से अलग नही है और वह कंपनी का मेम्बर नही बन सकता है।

7 JOINT HOLDER

इसमे 2 या 2 से अधिक लोग कंपनी के शेयर अपने नाम से लेते है वह मेम्बर बन सकते है।

8 FOREIGNER

Foreigner किसी कंपनी के मेम्बर बन सकते है यह तभी संभव है जब वह फ़ॉरेन एक्स्चेंज के सभी नियम का अनुशरण करेंगे।

9 GOVERNMENT

गवर्नमेंट भी कंपनी के मेम्बर्स बन सकते है ।

10 INSOLVENT

इनसोलवेंट तब तक कंपनी का मेम्बर रहता है जब तक की रिसीवर द्वारा उसके शेयर को बेंच कर रजिस्टर ऑफ मेम्बर से उसका नाम हटा नही दिया जाता है।

यदि कोई व्यक्ति गलत मैम्बरशिप का फायदा लेकर कंपनी से कोई लाभ कमाता है तो उसको 1 लाख से लेकर 3 लाख तक का जुर्माना व 1 साल से 3 साल तक की सजा हो सकती है।

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